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त्रिस्तरीय पंचायत : अध्यक्ष की मृत्यु – निर्वाचन रद्द होने की स्थिति में उपाध्यक्ष को अध्यक्ष का प्रभार देने की शक्ति डीसी के पास

निलंबित या अनुपस्थित हैं तो विभाग के अनुमोदन की आवश्यकता

Nikhil Kumar

Ranchi: पंचायती राज विभाग ने त्रिस्तरीय पंचायतों में कार्य संचालन के लिए गठित कार्यकारी समिति के अध्यक्ष के प्रभार के संबंध में स्थिति स्पष्ट की है. गोड्डा सहित सभी जिलों के उपायुक्त व उपविकास आयुक्त को इस बाबत पत्र लिखा है. विभाग ने कहा है कि प्रावधान के अनुसार समिति के अध्यक्ष के अनुपस्थिति,निलंबन की स्थिति में विभाग के अनुमोदनोपारांत समिति के उपाध्यक्ष द्वारा समिति के अध्यक्ष पद का दायित्व निर्वहन करने का प्रावधान है, लेकिन यह देखा जा रहा है कि विभिन्न जिलों द्वारा समिति के अध्यक्ष के मृत्यु अथवा पद रिक्त रहने की स्थिति में उपाध्यक्ष को समिति के अध्यक्ष का दायित्व देने का प्रस्ताव विभाग को भेजा जा रहा है. ऐसे में पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उक्त प्रावधान अध्यक्ष के निलंबन,अनुपस्थित की स्थिति में दायित्व निर्वहन के लिए है. वर्तमान अध्यक्ष को उनकी अनुपस्थिति (लगातार तीन बैठक में अनुपस्थित) या निलंबित करने के कारण उपाध्यक्ष को समिति के अध्यक्ष का दायित्व देने की स्थिति में विभाग का अनुमोदन अपेक्षित होगा. वैसी स्थिति में उपाध्यक्ष को समिति के अध्यक्ष का दायित्व देने के प्रस्ताव के साथ संलग्न प्रपत्र में आरोप एवं साक्ष्य के साथ अध्यक्ष का निलंबन प्रस्ताव भी प्रेषित किया जाना जरूरी होगा. विभाग ने यह स्पष्ट कहा है कि अगर कार्यकारी समिति के अध्यक्ष की मृत्यु अथवा उनका निर्वाचन रद्द होता है और इसके फलस्वरूप अध्यक्ष का पद रिक्त होने के स्थिति में उपाध्यक्ष को अध्यक्ष पद का दायित्व देने के लिए जिले के उपायुक्त सक्षम होंगे.

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क्या है मामला

बता दें कि,झारखंड में पंचायत चुनाव नहीं होने की वजह से सरकार ने पंचायतों के संचालन के लिए त्रिस्तरीय कार्यकारी समिति गठित की है. इसके लिए इस साल अधिनियम लाया गया है और पंचायतों को अगले छह माह या चुनाव होने तक एक्सटेंशन दिया गया है. पंचायतों के संचालन के लिए कार्यकारी समिति बनायी गयी है. जिला परिषद में जिप  के अध्यक्ष, पंचायत समिति में प्रमुख और ग्राम पंचायत में अध्यक्ष मुखिया को बनाया गया है. इस बार यह प्रावधान किया गया है कि अगर मुखिया अनुपस्थित है तो उनकी जगह उप मुखिया को अध्यक्ष का प्रभार दिया जा सकता है. दरअसल, पिछले साल कई ऐसे पंचायत थे जो बिना मुखिया के ही रह गये. कुछ मुखिया पर कार्रवाई हुई थी और वे निलंबित थे. कहीं वित्तीय शक्ती जब्त की गयी थी. ऐसे में कार्य संचालन ठीक से नहीं हो पा रहा था. अब विभाग ने उप मुखिया को अध्यक्ष बनाये का प्रावधान जोड़ दिया है. इस मामले में अभी भी कई जिलों में स्थिति स्पष्ट नहीं होने की वजह से विभाग ने इसे स्पष्ट किया है.

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