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Jharkhand News: उपायुक्तों के अधिकार में होगी कटौती, किराया विवादों का निपटारा करेंगे जज

भाड़ा नियंत्रण अधिकरण का होगा गठन,विधेयक का प्रस्ताव तैयार

Nikhil Kumar

Ranchi:  झारखंड में भाड़े (किराये) संबंधित विवादों, शिकायतों एवं अपराधों के निपटारे और न्याय निर्णय की शक्ति उपायुक्तों से वापस ली जायेगी. भवन स्वामी और किरायदारों के बीच उत्पन्न विवादों के निपटारे का अधिकार न्यायाधिकरण को दिया जायेगा. इसके लिए राज्य में भाड़ा नियंत्रण अधिकरण का गठन किया जायेगा. उच्च न्यायालय की सलाह पर जिला न्यायाधीश को अधिकरण के अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया जायेगा. नगर विकास विभाग ने  झारखंड भवन (पट्टा, किराया एवं निष्कासन) नियंत्रण (संशोधन) विधेयक 2021 गठन की स्वीकृति का प्रस्ताव तैयार किया है. कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे विधानसभा में पारित कराने के बाद लागू किया जायेगा. 2011 के अधिनियम में यह शक्ति राज्य के जिला उपायुक्तों को दी गयी थी, लेकिन लंबित मामलों को देखते हुए सरकार ने अलग से न्यायाधिकरण के गठन की आवश्यकता महसूस की है. न्यायाधिकरण के जरिये सारे भाड़े व किराये संबंधित विवादों,शिकायतों का निपटारा किया जा सकेगा. इसके अलावा भवन स्वामी और किरायदार के हित,अधिकार एवं दायित्व का भी निर्धारण किया जा सकेगा. प्राधिकार के निर्णय की अपील आयुक्त यहां की जा सकेगी. प्राधिकार,भवन स्वामी या किरायदारों के आवेदन पर त्वरित सुनवाई करते हुए अपना निर्णय देगा. प्राधिकार में सरकार सदस्य और उप सचिव सहित अन्य कर्मियों को पदस्थापित करेगी.

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पंजाब,हरियाणा की तर्ज पर लागू होगा

राज्य सरकार ने किराया संबंधित विवादों के त्वरित निपटारे के लिए दूसरे राज्यों के प्रावधानों का भी अध्ययन कराया है. पंजाब, हरियाणा व छत्तीसगढ़ के प्रावधान को लागू करने का निर्णय लिया है. इन राज्यों में लागू प्रावधानों की भांति अपीलीय प्राधिकार के रूप में झारखंड भवन पट्टा, किराया एवं निष्कासन नियंत्रण अधिनियम 2011 को संशोधित किया जायेगा और नया अधिनियम 2021 लाने का निर्णय लिया गया है.

महाधिवक्ता ने भी दी है सलाह

झारखंड महाधिवक्ता ने भी इस संबंध राज्य के मशविरा दिया है. मेसर्स टाटा स्टील लिमिटेड बनाम झारखंड राज्य एंव अन्य में महाधिवक्ता द्वारा परामर्श दिया गया है कि अपीलीय प्राधिकार के रूप में अधिकरण का गठन करते हुए न्यायिक पदाधिकारी को अधिकरण का प्रधान बनाये जाने का प्रावधान किया जाना उचित होगा. इस संबंध में 7.3.2020 को महाधिवक्ता झारखंड की अध्यक्षता में बैठक भी हुई है. इस बैठक की अनुशंसा के बाद ही सरकार ने नियमों में बदलाव करने का निर्णय लिया है.

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ये होंगे अधिकार

भवन स्वामी और किरायेदारों के आवेदन पर विचार करना.

किसी भी व्यक्ति को समन करना तथा उपस्थिति प्रवर्तित करन तथा शपथ दिलाकर उसका परीक्षण करना.

दस्तावेज को खोजने तथा प्रस्तुती की अपेक्षा करना.

अपने निर्णय का पुनरीक्षण करना.

गवाहों या दस्तावेजों के परीक्षण के लिए कमीशन जारी करना.

व्यक्तिक्रम या एक पक्षीय कार्यवाही के लिए याचिका खारिज करना.

विधिक प्रतिनिधियों को अभिलेख पर लाना या अन्य कोई विषय हो.

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