
Ranchi: झारखंड में 1645 ऐसे आंगड़बाड़ी केंद्रों के निर्माण की योजनाएं हैं जिनका अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है. जमीन की समस्या या अन्य किसी तरह के विवाद की वजह से इन योजनाओं का काम लटका हुआ है. बार-बार यह प्रयास हो रहा है कि इन केंद्रों के लिए भवन निर्माण का काम शुरू कराया जाये पर अभी तक काम लटका हुआ है. ग्रामीण विकास सचिव ने इसकी समीक्षा की है और इसे काफी चिंतनीय बताया है. सचिव ने स्पष्ट कहा है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 एवं इसके पूर्व प्रारंभ किए गये योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर यथाशीध्र पूर्ण करें. उपविकास आयुक्तों को इस बाबत दिशा-निर्देश दिया गया है.
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संसद में भी उठा है मामला
दरअसल, झारखंड में मनरेगा योजना से अभिसरण करते हुए आंगनबाड़ी केंद्र का भवन निर्माण कराया जा रहा है. राज्य में लगभग 5000 आंगनबाड़ी केंद्र के भवन निर्माण की योजना ली गयी है. संसद सत्र में रांची के सांसद संजय सेठ ने सवाल पूछा था कि पांच साल में कितने आंगनबाड़ी केंद्र झारखंड में बने. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री की ओर से जवाब आया था कि राज्य में 3347 आंगनबाड़ी भवन बन चुके हैं जबकि 1712 भवन निर्माणाधीन हैं. लेकिन, विभाग की समीक्षा में यह बात आ रही है कि राज्य में 1645 आंगनबाड़ी भवन निर्माण की योजना ऐसी है जिस पर काम ही प्रारंभ नहीं हो सका.
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डीडीसी को निर्देश सीओ के साथ समन्वय कर विवादों का हल करें
ग्रामीण विकास सचिव डॉ.मनीष रंजन ने आंगनबाड़ी की योजनाओं को भी प्राथमिकता के आधार पर क्रियान्वयन कराते हुए पूर्ण कराने का निर्देश दिया गया है. सभी जिलों के उपविकास आयुक्त को कहा गया है कि वे संबंधित अंचलाधिकारी से समन्वय स्थापित कर भूमि विवाद से संबंधित मामलों की यथाशीध्र निष्पादन करते हुए लंबित आंगनबाडी के कार्यो को प्रारंभ करायें.




