
Ranchi : रांची नगर निगम क्षेत्र में ठंड की दस्तक से गरीबों का जीना मुहाल हो गया है. शीतलहर और कड़ाके की ठंड में सबसे ज्यादा परेशानी सड़क किनारे रहने वाले बेघर और रिक्शा -ठेला चालकों को है. वहीं दूसरी तरफ जिला प्रशासन द्वारा अब तक सरकारी कंबल के वितरण और अलाव जलाने की व्यवस्था नहीं की गयी है.
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हालांकि जिला प्रशासन ने इस ठंड में करीब 63,700 कंबल वितरण की तैयारी पूरी कर ली है. यह संख्या आगे भी बढ़ सकती है. प्रशासन जल्द ही इसके लिए एक टेंडर फाइनल करेगा. यह टेंडर 9 या 10 दिसम्बर तक पूरा हो सकता है. यह जानकारी सामाजिक सुरक्षा के सहायक निदेशक ने दी है.
दिसंबर के पहले सप्ताह में ही शुरू हो जाती है कनकनी
बता दें कि दिसम्बर माह के आने के साथ ही राजधानी में तापमान का पारा गिरता जा रहा है. हालांकि ठंड अभी अपने चरम पर नहीं पहुंची है, लेकिन गरीबों को कंबल देना भी शुरू नहीं हुआ है. दूसरी तरफ राज्य सरकार द्वारा सभी जिला अधिकारियों को अपने क्षेत्र में टेंडर प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया जा चुका है. सभी जिलों में आगामी 10 से 12 दिसम्बर के बाद ही टेंडर फाइनल होने की उम्मीद जतायी जा रही है. अगर इन तिथि तक टेंडर का काम पूरा होता है, तो 15 दिसम्बर के बाद ही कंबल वितरण का काम हो सकेगा.
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जिला प्रशासन नगर निगम को देगा कंबल
जिला प्रशासन जैसे ही कंबल खऱीदने के लिए टेंडर काम पूरा करेगा, उसके बाद वह रांची नगर निगम को आवश्यकतानुसार कंबल बंटाने को देगा. निगम ने अपने वार्डों में वैसे लोगों यह कंबल देगा, जो गरीब रेखा से नीचे रह रहे है. इसके अलावा दिव्यांग, बुजुर्ग, असहाय, बंधुआ मजूदरों से मुक्त कराये लोगों को कंबल वितरण में प्राथमिकता देने की बात की गयी है.

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हर साल कंबल बांटने में होती है देर
राज्य के हर जिले में ठंड के मौसम में कंबल वितरण करने में देरी की प्रक्रिया झारखंड की एक परम्परा सी बन गयी है. जब सरकार व प्रशासन को पता रहता है कि ठंड में गरीबों को कंबल देना है, तो आखिर ऐसी देरी क्यों. इसकी तैयारी ठंड आने के पहले ही क्यों नहीं शुरू हो जाती है. कमोबेश ठंड बीतने के बाद ही अधिकारियों को कंबल की याद क्यों आती है?
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