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बाल विवाहः कोरोना काल में झारखंड में 68 बाल विवाह रुके, चुनौती अब भी बाकी

Ranchi : बच्चों के लिए काम करनेवाली संस्थाओं का दावा है कि इस साल कोरोना काल में झारखंड के दस जिलों में 68 बच्चों का बाल विवाह रोका गया है. इन संस्थाओं का यह भी मानना है कि इसके बावजूद राज्य भर में अब भी बाल विवाह पर अंकुश नहीं लगा है.

बाल कल्याण संस्था के सचिव संजय मिश्रा कहते हैं कि बाल विवाह के खिलाफ कानून बनाने और जागरुकता कार्यक्रम चलाने के बाद अब भी बाल विवाह हो रहे हैं. इसकी वजह से कई सामाजिक समस्याएं भी बढ़ रही हैं. कम उम्र में बच्चियां मां बन रही हैं. कमजोर शिशु जन्म ले रहे हैं और इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी बढ़ रही हैं.

घट रही है बाल विवाह की दर

बाल विवाह को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्था सेव द चिल्ड्रेन की हालिया रिपोर्ट थोड़ी राहत देनेवाली है. सेव द चिल्ड्रेन की वैश्विक बचपन रिपोर्ट 2019 के अनुसार 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की विवाहित लड़कियों की संख्या में साल 2000 की तुलना में 51 फीसदी की कमी आयी है.

और अगर 1990 से तुलना करें तो कम उम्र में विवाह करने के मामले 63 फीसदी कम हुए हैं. यह रिपोर्ट पूरे देश के संदर्भ में है. रिपोर्ट बताती है कि अगर यह कमी नहीं आयी होती तो आज देश में विवाहित लड़कियों की संख्या 90 लाख ज्यादा होती.

झाऱखंड में भी बाल विवाह में कमी आ रही है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस)-4 की रिपोर्ट के तहत शहरी क्षेत्रों में बाल विवाह की दर 21.1 फीसदी है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 44.1 फीसदी है.

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इन जिलों में बाल विवाह बड़ी समस्या

झारखंड में जिन जिलों में बाल विवाह की समस्या रही है उनमें गोड्डा, गढ़वा, देवघर आदि जिले शामिल हैं. गोड्डा में बाल विवाह की दर 63.5 फीसदी रही है. गढ़वा में 58.8 प्रतिशत और देघर में 52.2 प्रतिशत पर लगातार अभियान चलाने के बाद इन जिलों में हालात सुधर रहे हैं. बाल कल्याण संघ के सचिव संजय मिश्रा बताते हैं कि अब गिरिडीह, कोडरमा जैसे जिलों में बाह विवाह के ज्यादा मामले आ रहे हैं. इन पर अंकुश लगाने के लिए उन जिलों में जागरुकता कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जा रहा है.

ये समस्य़ाएं आ रहीं

• बच्चों व माताओं में कुपोषण
• जल्दी विवाह होने से लड़कियों की पढ़ाई छूट जाती है
• लड़कियों के खिलाफ दुर्व्यवहार और हिंसा का खतरा बढ़ जाता है

इन उपायों से बाल विवाह पर अंकुश लगाने के हो रहे प्रयास

सरकार और संस्थाएं बाल विवाह के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं. इसके तहत बाल विवाह के खिलाफ कानून का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है. साथ ही सामाजिक जागरुकता अभियान भी चलाये जा रहे हैं. प्रभावित जिलों में ग्रामीण क्षेत्रों में ये अभियान ज्यादा चलाये जा रहे हैं. इसके अलावा अभिभावकों को सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजना से भी जोड़ने के प्रयास चल रहे हैं ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरे और वे लड़कियों को बोझ न समझें.

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