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विधानसभा सत्र के पहले तक थी आंदोलन की तैयारी, सरना आदिवासी धर्मकोड प्रस्ताव पारित होने के बाद सरना संगठनों ने मनाया जश्न

  • कहा- एक नाम होने से लोगों में मतभेद नहीं होगा

Ranchi : बुधवार को सरकार सरना आदिवासी धर्मकोड के नाम में बदलाव नहीं करती तो आंदोलन की स्थिति बनती. पुतला दहन किया जाता, बंदी किया जाता, चक्का जाम होता. लेकिन अब जन जागरण किया जायेगा. दूसरे राज्यों में भी लोगों को जागरूक किया जायेगा. ये बातें धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने कहीं. बुधवार को राज्य विधानसभा में सरना आदिवासी धर्मकोड को पारित किया गया.

धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने कहा कि लोग एकत्रित हुए थे विधानसभा सत्र के बाद रणनीति बनाने के लिए. लेकिन सरकार ने धर्मकोड का नाम बदला. अब जश्न मनाया जा रहा है. बता दें सरना आदिवासी धर्मकोड विधानसभा में पारित किया गया. अब इसे केंद्र को भेजा जायेगा.

पहले जिन सरना आदिवासी संगठनों की ओर से धर्मकोड के नाम पर विरोध किया जा रहा था, उन्होंने इसका स्वागत किया. विधानसभा सत्र के पहले ही लोग हरमू स्थित सरना स्थल में जमा हुए थे. जहां आगे की रणनीति बनायी जाती. लेकिन प्रस्ताव परित होने के बाद जुलूस निकाला गया.

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नाम के कारण लोगों में होता मतभेत

बंधन तिग्गा ने कहा कि एक नाम आ जाने से लोगों को एकजुट करने में आसानी होगी. राज्य में सरना और आदिवासी होने से लोग आपस में कंफ्यूज रहते. कुछ आदिवासी तो कुछ सरना धर्म की तरफ जाते. ऐसे में लोगों के बीच लड़ाई की आशंका थी. सरकार ने संगठनों के विरोध को माना है, जिसका समर्थन किया जा रहा है. उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्षी विधायकों को धन्यवाद दिया. उन्होंने बताया कि अगर सरकार नाम में बदलाव नहीं करती तो निश्चित रूप से आंदोलन किया जाता. इसके पहले सरकार सरना/आदिवासी धर्मकोड प्रस्ताव ला रही थी. लेकिन सरना संगठनों के विरोध के बाद इसका नाम सरना आदिवासी धर्मकोड दिया गया.

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सकंल्प पत्र जला किया गया था विरोध

राष्ट्रीय आदिवासी समाज सरना धर्म रक्षा अभियान के बैनर तले सामाजिक संगठन विधानसभा सत्र के दौरान एकत्रित हुए. डॉ करमा उरांव ने बताया कि कोड पारित होने के बाद लोगों में खुशी है. अभियान के तहत 30 सरना संगठनों ने मिल कर आंदोलन किया. संकल्प पत्र जलाया गया. जिसके बाद दबाव में आकर सरकार ने यह निर्णय लिया. अब इसके लिए लोगों को एकत्रित किया जायेगा. जिसमें सरकार का भी सहयोग होगा. जिसमें मुख्य रूप से राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा, आदिवासी सेना, केंद्रीय सरना समिति, आदिवासी छात्र संघ समेत अन्य संगठन हैं.

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