
- संघ ने की जांच की मांग
Ranchi: राज्य में मनरेगा अधिनियम 2005 का उल्लंघन किये जाने का आरोप झारखंड छात्र संघ औऱ आमया ने लगाया है. संघ के मुताबिक ग्रामसभा को दरकिनार करके ऊपर से योजनाएं थोपी जा रही हैं. संघ ने मनरेगा कमिश्नर सिद्धार्थ त्रिपाठी को इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार बताया है.
इसे लेकर संघ ने मोरहाबादी में रविवार को धरना दिया. कमिश्नर के कार्यकाल की एसीबी से कराये जाने की मांग सरकार से की.
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मनरेगा का लाभ ग्रामीणों को नहीं
संघ के प्रमुख एस अली के अनुसार मनरेगा मांग अधारित योजना है. इसमें ग्राम सभा की सहमति से योजनाओं का चयन करके काम किया जाना है. पर अभी ग्रामसभा को दरकिनार कर दिया गया है. पहले सिंचाई कूप, तालाबों का जीर्णोद्धार, नादियों नालों में चेकडैम, खेत पगडंडी रास्ता, मिट्टी मोरम पथ, गांव ग्रेड वन पथ, फलदार वृक्ष रोपण जैसे काम होते थे. पर इसे समाप्त कर दिया गया है. लक्ष्य अधारित बनाकर मानव दिवस सृजन के नाम पर ऐसे योजनाएं थोपी जा रही हैं जिसका लाभ ना तो लाभुक को है ना ग्रामीणों को. इसकी बजाये सरकार राशि का दुरुपयोग और बंदरबाट हो रहा है.
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मनरेगा कमिश्नर की नियुक्ति गलत
संघ के अनुसार मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी के कार्यकाल की जांच एसीबी से करानी चाहिए. वन सेवा के अधिकारी सिद्धार्थ त्रिपाठी को नियमविरुद्ध तरीके से पिछली सरकार ने आयुक्त बना दिया. वे पांच वर्षों से उसी पद पर बैठे हैं. नियमानुसार ये पद आइएएस के लिए है. बिरसा हरित ग्राम योजना में लूट हुई है.पौधों और खाद की खरीदारी करीबी एजेंसियों से की जा रही है. सप्लायर से तीन गुणा अधिक कीमत पर सामान लिया गया. इनमें से अधिकांश खराब क्वालिटी के निकले हैं. मनरेगा में ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मजदूरों द्वारा सोशल ऑडिट कराने की बजाये सोशल ऑडिट यूनिट औऱ जेएसएलपीएस के द्वारा ऑडिट कराया जा रहा है.
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