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कृषि सुधार कानून को क्रांतिकारी परिवर्तन बताने वाली भाजपा केवल अडाणी विलमर को लाभ पहुंचाना चाहती है  :  जेएमएम

भाजपा शासित हरियाणा,  उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, उनके समर्थक राज्य तमिलनाडु के किसान भी आज सड़क पर आंदोलनरत हैं

Ranchi : राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने कहा है कि किसान संगोष्ठी सम्मेलन आयोजित कर प्रदेश भाजपा नेता फिर से राज्य के लोगों को गुमराह कर रहे हैं. पार्टी महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि मोदी सरकार के लाये कृषि सुधार कानून के विरोध में केवल गैर-भाजपा शासित राज्यों के किसान ही नहीं है, बल्कि भाजपा शासित हरियाणा,  उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, उनके समर्थक राज्य तमिलनाडु के किसान भी आज सड़क पर आंदोलनरत हैं.

सभी तरह के किसान संगठन जिसमें आरएसएस की भाजपा किसान सभा भी शामिल है, वो भी इस कानून के विरोध में है. इसके बावजूद प्रदेश भाजपा नेता मोदी सरकार के फैलाये उस झूठ को और तेजी से प्रचारित कर रहे है कि किसान सुधार कानून किसानों के हित में है. इन सुधारों को क्रांतिकारी परिवर्तन का नाम देकर भाजपा जैसा प्रचार कर रही है, उससे साफ है कि भाजपा आज देश की सबसे बड़ी जाली पार्टी बन चुकी है. दरअसल मोदी सरकार के इस कानून के पीछे का उद्देश्य केवल खाद्यान उत्पाद बेचने वाली कंपनी “अडाणी विलमर” को लाभ पहुंचाना है.

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नये कानून के कारण ही आज हरी सब्जियों के दाम 80  रुपये से ऊपर

सुप्रियो ने कहा कि केंद्र बार-बार झूठ बोल रहा है कि उनकी सरकार एमएसपी के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं कर रही है. हकीकत यही है कि आज इस नये कानून में कहीं भी एमएसपी की बात नहीं है. नये सुधार कानून की कमियां यह है कि 1955 में लाये आवश्यक वस्तु अधिनियम (एसेंशियल कमोडिटी एक्ट) में आलू, ब्याज,दाल जैसे जरूरी चीजों के भंडारण की सीमा निर्धारित थी, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है. इसका असर भी बाजार में दिखने लगा है. आज राजधानी में आलू की कीमत खुदरा मूल्य पर 50 रूपये के ऊपर पहुंच गयी है. शायद ही ऐसी कोई हरी सब्जी है, जिसका खुदरा में दाम 80 रूपये से ऊपर नहीं चला गया है.

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बाजार में किसानों का नहीं पूंजीपतियों का होगा आधिपत्य

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अब कानून बनाकर किसानों को बंधुआ मजदूर बनाने पर लगी है. कांट्रैक्ट फार्मिंग इसी कड़ी का हिस्सा है. अब कम्पनियां मजबूरी में फंसे किसानों को पहले ही फसलों का रेट तय कर देगी. बाजार में किसानों का नहीं पूंजीपतियों का आधिपत्य होगा.

दरअसल सीधा-सीधी केंद्र की मोदी सरकार झूठ बोल रही है कि किसान अब अपनी फसल किसी को भी बेच पाएगें. सुप्रियो ने कहा कि पूरे विश्व में “अडाणी विलमर” ऐसी कंपनी है कि जो खाद्यान बेचने का काम करती है. मोदी सरकार ने ऐसा कानून पास कर यह बता दिया है कि उनके पूंजीपति दोस्त अडाणी को ही फायदा पहुंचाने के लिए यह कानून बनाया गया है.

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