
♦72 शहरों में होगी परीक्षा
♦6 लाख परीक्षार्थियों के शामिल होने की है उम्मीद
Ranchi : यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन की ओर से ली जानेवाली सिविल सर्विसेस प्रारंभिक परीक्षा 4 अक्टूबर को ही ली जायेगी. सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना के मद्देनजर परीक्षा रद्द करने की याचिका पर फैसला सुनाते हुए परीक्षा स्थगित करने से इनकार कर दिया है. केंद्र से सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वैश्विक महामारी के कारण परीक्षा नहीं दे पानेवाले उन लोगों को एक और मौका देने पर केंद्र विचार करे, जिनके पास यूपीएससी परीक्षा देने का इस बार आखिरी अवसर है. कोर्ट ने 2020 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को 2021 की परीक्षा के साथ आयोजित कराने के आग्रहवाली याचिका खारिज की.
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दो साल की परीक्षा एक साथ लेना संभव नहीं
यूपीएससी ने कोर्ट के सामने दलील दी थी कि अगर इस साल की परीक्षा टाली जाती है तो इसका असर अगले साल की परीक्षा पर साफ पड़ेगा. आयोग की पैरवी कर रहे अधविक्ता नरेश कौशिक ने कहा था कि परीक्षा स्थगित करना बिल्कुल भी संभव नहीं है. कोरोना की स्थिति को देखते हुए पहले ही एक बार परीक्षा स्थगित की जा चुकी है. अब दोबारा इसे स्थगित करने से परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को नुकसान पहुंचेगा. यूपीएससी ने कहा है कि प्रतिभागियों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए उचित इंतज़ाम किया जायेगा. कोर्ट ने यह स्पष्ट कहा है कि कोरोना वायरस से संक्रमित उम्मीदवारों को किसी भी हाल में परीक्षा केंद्र में घुसने नहीं दिया जायेगा. इससे इससे दूसरे उम्मीदवारों के संक्रमित होने का खतरा है.
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पूर्व की गाइडलाइन का भी करें पालन
परीक्षा आयोजन को लेकर कहा कि परीक्षार्थियों के बीच मास्क या फेस कवर पहनना अनिवार्य है. आयोग ने कहा है कि परीक्षार्थी परीक्षा के दौरान पारदर्शी बोतलों में सैनिटाइजर भी ला सकते हैं. बिना मास्क के किसी भी परीक्षार्थी को एग्जामिनेशन सेंटर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी. परीक्षार्थियों को कोविड-19 के नियमों का पालन करना होगा. उन्हें परीक्षा हॉल/कमरों के साथ परिसरों में भी सामाजिक दूरी का पालन करना होगा. देशभर के 72 शहरों में होनेवाली इस ऑफलाइन परीक्षा में 6 लाख उम्मीदवारों के शामिल होने की उम्मीद है. वहीं इस परीक्षा की पूर्व की तैयारियों में आयोग 50 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है, अगर आगे फिर से इस परीक्षा को टाला जाता है तो इससे सरकारी पैसे का बड़ा नुकसान होगा.
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