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CBI कोर्ट का आदेशः लक्ष्मी विलास पैलेस होटल बिक्री के लिए पूर्व मंत्री शौरी के खिलाफ करें कार्रवाई

होटल को 7.52 करोड़ रुपए में निजी कंपनी को बेचा गया जबकि जांच में पता चला कि इसकी कीमत 252 करोड़ रुपए थी.

Jodhapur:  जोधपुर में एक विशेष अदालत ने सीबीआइ को आइटीडीसी के एक होटल की बिक्री संबंधी मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और तत्कालीन विनिवेश सचिव प्रदीप बैजल के खिलाफ मामले दर्ज करने का आदेश दिया है. इस बिक्री से राजकोष को 224 करोड़ रुपए का कथित घाटा हुआ.

सीबीआइ की अदालत ने दो दशक पहले उदयपुर में लक्ष्मी विलास पैलेस होटल की बिक्री करने से जुड़े तीन अन्य लोगों के खिलाफ मामले दर्ज करने का आदेश दिया है. इस बिक्री के समय केंद्र में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार थी.

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अरुण शौरी को बनाएं आरोपी- कोर्ट

भारत पर्यटन विकास निगम के मालिकाना हक वाला होटल जब निजी कंपनी भारत होटल्स लिमिटेड को बेचा गया था, उस समय शौरी विनिवेश के प्रभारी मंत्री थे. विशेष न्यायाधीश पूर्ण कुमार शर्मा ने कहा कि पत्रकार के रूप में शौरी ने बहसों एवं साक्षात्कारों के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी. ‘यह भष्टाचार के मामले पर उनके दोहरे मापदंड को दर्शाता है.’ अदालत ने बुधवार को दिए आदेश में सीबीआइ द्वारा मामला बंद करने के लिए अगस्त 2019 में जमा कराई गई क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी और एजेंसी को मामले की फिर से जांच करने का आदेश दिया.

उसने उदयपुर के जिला मजिस्ट्रेट को लक्ष्मी विलास पैलेस तत्काल कुर्क करने का भी आदेश दिया. अदालत ने आदेश दिया कि मामले का निपटारा होने तक होटल राजस्थान सरकार के संरक्षण में रहेगा.

अदालत ने शौरी और बैजल के अलावा वित्तीय सलाहकार लाजार्ड इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक आशीष गुहा, कांतिलाल कर्मसे एंड कंपनी के कांतिलाल कर्मसे और भारत होटल्स लिमिटेड की निदेशक ज्योत्सना सुरी के खिलाफ भी मामले दर्ज करने का आदेश दिया. अदालत ने कहा कि इन पांचों को अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा.
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244 करोड़ के राजस्व का नुकसान

होटल को 7.52 करोड़ रुपए में निजी कंपनी को बेचा गया था. सीबीआइ जांच में पता चला कि इसकी कीमत 252 करोड़ रुपए थी, यानी इस बिक्री से 244 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. सीबीआइ ने 13 सितंबर 2014 को इस संबंध में मामला दर्ज किया था.

अदालत ने इस बात को लेकर सीबीआइ की आलोचना की कि उसने शुरुआती जांच में संपत्ति को गलत तरीके से बेचे जाने की बात सामने आने के बावजूद क्लोजर रिपोर्ट जमा की.

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