Opinion

देशहित के नाम पर देश के नहीं चीनी खिलौना कारोबारियों को दी गई राहत !

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Girish Malviya

क्या सरकार खुद से फेक न्यूज प्रसारित करती है! किस तरह से अपने गलत काम को छुपाने के लिए क्या उसे देशहित में उठाया कदम दिखाती है! यह खबर इस बात का एक अच्छा उदाहरण है.

एक दिन पहले यह खबर आई कि सरकार ने घरेलू खिलौना उद्योग को गुणवत्ता मानकों को लागू करने के लिए और चार माह की मोहलत दी है. सरकार ने खिलौना (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश 2020 के क्रियान्वयन की समय सीमा को इस साल 01 सितंबर, 2020 से बढ़ाकर 01 जनवरी 2021 कर दिया है. इसका मतलब यह बताया गया कि कोरोना वायरस महामारी से जुड़ी परिस्थितियों के बीच घरेलू खिलौना उद्योग को अब इन मानकों को अमल में लाने के लिए अगले साल जनवरी तक का समय मिल गया है.

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प्रथम दृष्टया यह एक अच्छी बात लगती है. लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नही है. दरअसल, जब किसी गलत बात को आपको जस्टिफाई कराना हो उसे आप देशहित का नाम दे दो. यह बिल्कुल वैसा ही मामला है.

पिछले महीने अगस्त में उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने कहा था कि 01 सितंबर से आयातित खिलौने की अनिवार्य गुणवत्ता जांच के बाद ही भारत में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी. पासवान ने संवाददाताओं से कहा, “खिलौने के लिए अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण मानक (क्यूसीएस) 01 सितंबर से लागू किया जाएगा. आयात की खेप से नमूना लेने और गुणवत्ता जांच करने के लिए प्रमुख बंदरगाहों पर बीआइएस के कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा.”

कल हुआ ये कि इस आदेश को 01 सितंबर से बढ़ाकर 01 जनवरी 2021 कर दिया है. और नाम उन बेचारे भारत के खिलौना उत्पादकों लिया गया, जिसका इस आदेश से कोई मतलब ही नहीं है. सरकार अपना कार्य समय से पूरा नहीं कर पाई. न वह BIS के कर्मचारियों को बंदरगाहों पर नियुक्त कर पाई. न ही वह किसी तरह से इन खिलौनों के आयात पर रोकथाम लगा पायी और सितंबर भी आधा बीत गया. तब जाकर यह देशहित का खेल सामने लाया गया. और आदेश जारी किया गया कि भारतीय खिलौना उत्पादकों की सुविधा के लिए उठाया गया कदम बता दिया गया है.

अब चीन से होने वाला आयात निर्बाध रूप से जनवरी तक हो सकेगा और तब तक चीन से सीमा विवाद भी ठंडा पड़ जाएगा.

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डिसक्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं

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