Ranchi. रांची नगर निगम की कार्यशैली एक बार फिर से चर्चा में है. चर्चा राजधानी की सीवरेज ड्रैनेज सिस्टम की खराब दशा को लेकर है. रांची को राजधानी बने करीब 20 साल पूरे होने को है, लेकिन अभी तक सीवरेज ड्रेनेज के केवल फेज-1 का ही काम पूरा नहीं हो सका है. करीब 84 करोड़ तो केवल फेज 1 में ही खर्च कर दिये गये, लेकिन काम आज तक अधूरा है.
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राजधानी में चल रहा सीवरेज ड्रेनेज कार्य कब पूरा होगा, इसकी जवाबदेही से नगर निगम से लेकर जिला प्रशासन तक पल्ले झाड़ चुका है. अधूरे काम को पूरा करने के लिए पिछले 4 माह में निगम ने दूसरी बार टेंडर निकाला है. दोनों ही टेंडर जोन-1 (कुल 9 वाडों) में बर्बाद हो चुके सीवरेज-ड्रेनेज प्रोजेक्ट को लेकर है.
भ्रष्टाचार के इस खेल में जा चुकी हैं जानें
सीवरेज ड्रैनेज में हुए इस भ्रष्टाचार के खेल की जमीनी हकीकत तो यह है कि इसमें कुछ लोगों की जान भी जा चुकी है. बीते वर्ष जुलाई माह में हिंदपीढ़ी में एक बच्ची ‘फलक’ इस भ्रष्टाचार की शिकार हुई थी. दो दिन पहले हुई मूसलधार बारिश में कोकर के एक व्यक्ति के बह जाने की जानकारी है. खबर लिखे जाने तक उस व्यक्ति को नहीं खोजा जा सका है.
209 करोड़ खर्च, फेज-1 का काम अधूरा
निगम ने फेज-1 के अधूरे काम को पूरा करने के लिए मंगलवार को एक टेंडर निकाला है. टेंडर सरकार के दिशानिर्देश के विपरीत है. क्योंकि सरकार ने नये एसओआर बनने के तक किसी भी तरह के टेंडर पर रोक लगा दी है. लेकिन फिर भी निगम ने करीब 209 करोड़ रूपये खर्च कर इस अधूरे काम को पूरा करने का मन बनाया है. इससे पहले बीते 20 मई को भी निगम ने इस काम के लिए टेंडर निकाला था. सूत्रों का दावा है कि केवल एक कंपनी के ही दिलचस्पी लेने के कारण टेंडर को रद्द कर दिया गया था.
जोन-1 में हुए कुल 9 वार्ड
इंजीनियरिंग शाखा की मानें तो सीवरेज ड्रेनेज के लिए बनाया जाने वाला डीपीआर जोन 1 के लिए है. इस जोन में कुल 9 वार्ड हैं. यह वार्ड 1 से 5 और 30 से 33 तक के लिए है. 9 वार्डों में कांके रोड, गोंदा टाउन, मिसिर गोंदा, सिंदवार टोली, मोरहाबादी, बड़गाई, बुटी बस्ती, डिहवार मोहल्ला, रातू रोड के अल्कापुरी, धोबी घाट, इंद्रपुरी रोड. नंबर 1, पिस्का मोड़, स्ट्रॉफ बैंक कोलोनी, टंका टोली रांची शामिल है.
84 करोड़ खर्च, काम केवल 113 किमी
बता दें कि राजधानी में सीवरेज-ड्रेनेज का काम 4 फेज में किया जाना था. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के नगर विकास मंत्री रहते 2006 में सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम के डीपीआर का जिम्मा कंसल्टेंट कंपनी मैनहर्ट को दिया गया. मैनहर्ट कंपनी ने सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम को चार फेज में पूरा करने डीपीआर बनाया. इन चारों फेज के लिए मैनहर्ट द्वारा 1200 करोड़ तक की राशि खर्च करने की बात की गयी.
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पहले फेज के काम के लिए ज्योति बिल्टडेक कंपनी का चयन भी किया गया. कुल 359 करोड़ रूपये खर्च कर कंपनी को पूरे शहर में सीवरेज ड्रेनेज का काम करना था. लेकिन पहले फेज में 84 करोड़ खर्च कर केवल कंपनी केवल 113 किमी सीवरेज-ड्रेनेज का काम ही कर पायी थी. बाद में ज्योति बिल्टेक के काम को देख मेयर आशा लकड़ा ने दिसंबर 2018 को ही उसे टर्मिनेट कर दिया. 2, 3, और 4 फेज के लिए टेंडर निकाले जाने की प्रकिया जारी थी.




