
Ranchi: वर्ष 2017 में 2500 सहायक पुलिस के पदों पर युवक-युवतियों की नियुक्त हुई थी. अगले दो वर्षों में बेहतर काम करनेवाले सहायक पुलिस को पुलिस में स्थायी रूप से बहाल किया जाना था. हालांकि, अब तक ऐसा नहीं हुआ है. मिली जानकारी के अनुसार दो वर्ष के बाद इन्हें एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया गया. यह अवधि भी अगस्त में समाप्त हो रही है. ऐसे में इन सहायक पुलिस को बेरोजगार होने का डर सता रहा है.
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5 साल के लिए हुई थी बहाली
मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 में सहायक पुलिस की बहाली पहले दो साल के लिए की गई .इसके बाद जिले के एसपी या एसएसपी की अनुशंसा पर डीआइजी के अनुमोदन के बाद एक-एक साल कर तीन साल तक उनकी सेवा अवधि बढ़ाई जा सकती है.
पुलिस में बहाली के समय एक साल की बेहतर सेवा पर परीक्षा में दो फीसदी अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे. नियुक्ति के बाद सबसे पहले सहायक पुलिस को बिना हथियार के ट्रेनिंग दी गई थी. इसमें ट्रैफिक, बचाव कार्य, प्राथमिक उपचार संबंधी ट्रेनिंग शामिल थी. इसके बाद उन्हें ड्यूटी पर लगाया गया था.
नियुक्ति के आधार पर भविष्य में स्थाई बहाली का दावा कोई भी अभ्यर्थी नहीं कर सकता है. इसके लिए संबंधित युवाओं से पहले ही शपथ पत्र ले लिया गया है. इन्हें मेडिक्लेम एवं दुर्घटना बीमा की सुविधा मिलेगी. काम के दौरान मौत होने पर आश्रित परिवार को गृह रक्षक के समान अनुग्रह अनुदान मिलेगा. लेकिन किसी आश्रित की नौकरी का दावा नहीं बनेगा. सहायक पुलिस को 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय के सिवा कोई भत्ता नहीं मिलता है.
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सालाना 2500 सहायक पुलिस के भर्ती की तत्कालीन सीएम ने की थी घोषणा
झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड में 10000 सिपाही और प्रत्येक साल 2500 सहायक पुलिस की भर्ती करने की घोषणा की थी. आज से करीब चार साल पहले 14 नवंबर 2016 को तत्कालीन सीएम रघुवर दास के द्वारा यह घोषणाएं की गई थी.
हालांकि वर्ष 2017 में 2500 सहायक पुलिस की भर्ती हुई. लेकिन इसके बाद ना वर्ष 2018 और 2019 और ना ही वर्ष 2020 में अबतक सहायक पुलिस की भर्ती हुई है. अगर बात करें 10000 पुलिसकर्मियों की भर्ती की तो घोषणा के बाद से अबतक ये भर्ती नहीं हो पायी है.
पुलिस कर्मियों की कमी से जूझ रहा झारखंड
झारखंड राज्य के गठन हुए 19 साल पूरे हो गए हैं. इसके बावजूद झारखंड पुलिस बल कमी से जूझ रहा है. जानकारी के मुताबिक, जिस वक्त बिहार से अलग होकर झारखंड एक नया राज्य बना था, उस वक्त झारखंड पुलिस बल की संख्या 28 हजार के करीब थी.
जबकि झारखंड के पुलिस बल के लिए स्वीकृत पदों की संख्या 79,950 है. कुल स्वीकृत संख्या में रिक्तियां 18,931 हैं. पुलिस बल की कमी की वजह से जहां पुलिस कर्मियों को 10 से 12 घंटे की ड्यूटी करनी होती है.वहीं पुलिस कर्मियों की कमी दूर करने के लिए सरकार की ओर से कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया गया है. आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में 956 लोगों की सुरक्षा में एक पुलिस कर्मी है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि झारखंड में पुलिस कर्मियों की कितनी कमी है.
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