
Ranchi: रिम्स, रांची ने दो माह पहले, अप्रैल में एक ऑनलाइन सर्वे कराया था. इसके जरिये कोरोना संकट में राज्य सरकार द्वारा उठाये गये कदमों और उसके प्रति लोगों के रवैये का आकलन किया गया. साथ ही लोगों के बीच कोविड-19 के संबंध में बनी हुई चिंता को भी परखा गया था.
सर्वेक्षण में मिली जानकारी के आधार पर सरकार अब कोरोना वायरस संबंधी आइइसी (IEC) सामग्री तैयार करेगी. सर्वे के अनुसार कोविड-19 से बचाव के लिए लॉकडाउन अपनाये जाने को झारखंड के लोग सही मानते हैं. कोरोना संक्रमण से बचाव संबंधी बुनियादी बातों की भी जानकारी लोगों में खूब है.
राज्य सरकार द्वारा लोगों को संक्रमित होने से बचाव के लिए उठाए गए प्रयासों की भी सराहना की गयी है. सर्वेक्षण में शामिल एक-चौथाई लोगों ने कहा कि वे आरोग्य सेतु एप का उपयोग नहीं करते हैं. सर्वे के अनुसार अल्हलिक सैनिटाइजर के उपयोग के बारे में लोगों में उलझन है.
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सर्वे में 4000 लोगों से पूछे गये 26 सवाल
10 अप्रैल से 30 अप्रैल, 2020 के दौरान राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स), रांची ने ऑनलाइन सर्वे किया था. इसमें 4000 से भी अधिक लोगों को शामिल किया गया था. इस दौरान 26 प्रश्नों का जवाब मांगा गया. सर्वे प्रक्रिया में रिम्स की डॉक्टर अर्पिता राय और डॉक्टर निशांत ने अहम भूमिका निभायी थी. दोनों डॉक्टरों के अनुसार सर्वेक्षण कार्य के दौरान अलग-अलग बैकग्राउंड वाले (सामाजिक-आर्थिक स्थिति) और अलग-अलग आयु के लोगों से सूचना मांगी गयी थी.
प्रोफेसर, शिक्षक, वकील, सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में कार्यरत पदाधिकारियों, कर्मियों, एनजीओ, कॉलेज स्टूडेंट्स और अन्य लोगों को इसमें शामिल किया गया. मिली जानकारी से पता चलता है कि राज्य में अधिकांश लोग कोविड-19 से संबंधित बुनियादी जानकारी जरूर रखते हैं. सर्वे में शामिल 90 फीसदी लोगों ने राज्य सरकार द्वारा लॉकडाउन बनाए रखने के निर्णय को सराहा है.
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98 फीसदी करते हैं मास्क का उपयोग
सर्वेक्षण में कई अहम जानकारियां मिलीं. 4000 लोगों में से 98 फीसदी ने कहा कि वे लगातार मास्क का प्रयोग कर रहे हैं. सैनिटाइजर में अल्कोहल की अनिवार्यता संबंधी मसले पर लोगों में भ्रम की स्थिति देखी गयी. उन्हें नहीं पता कि वास्तव में इसकी कितनी जरूरत है. सर्वे में शामिल एक-तिहाई लोगों को यह पता नहीं था कि किसी अनजाने व्यक्ति के निकट संपर्क में आने से कोरोना की चपेट में आ सकते हैं.
ढाई फीसदी लोगों ने कहा कि कोरोना के मुख्य लक्षणों और सामान्य फ्लू के बीच अंतर उन्हें ठीक से नहीं पता. किस स्थिति में स्क्रीनिंग सेंटर पर जाना चाहिये, इसे लेकर भी कई लोगों में सही जानकारी का अभाव दिखा. 25 फीसदी को यह पता नहीं था कि बुजुर्ग लोगों में कोविड-19 का खतरा ज्यादा होता है.
सामूहिक भागीदारी से ही निदान
स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी ने कहा है कि ऑनलाइन सर्वे के जरिए कोरोना वायरस और इसके प्रति लोगों की समझ को जानने का मौका मिला है.
मिली जानकारियों के आधार पर अब आइईसी (IEC) सामग्री डिजाइन की जायेगी. इससे हम सबों को कोरोना के खतरे के खिलाफ एक बेहतर रणनीति बनाने में भी मदद मिलेगी. समाज के सहयोग से ही कोरोना जैसे खतरों को कम किया जा सकेगा.
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