
Ranchi: झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में स्टेट टिशू एंड ऑर्गन ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (SOTTO) की स्थापना की जाएगी. सोटो (SOTTO) के स्थापित हो जाने से मरीजों को ऑर्गन ट्रांसप्लांट में सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे. ऑर्गन फेलियर से जूझ रहे मरीजों को ट्रांसप्लांट के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा.
किडनी के मरीजों को इससे सबसे अधिक लाभ मिलेगा. किडनी ट्रांसप्लांट से पहले मरीजों और उनके परिजनों को दो से तीन महीने के चक्कर लगाने पड़ते थे. सिविल सर्जन कार्यालय में अनुमति के आवेदन करने से ट्रांसप्लांट की अनुमति मिलने तक काफी परेशान होना पड़ता था.
रिम्स में सोटो के स्थापित हो जाने से तत्काल प्रभाव से अनुमति मिल जाएगी और बिना समय गंवाये मरीजों का ऑर्गन ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा.
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राज्य में किडनी के औसतन हर साल तीन लाख मरीज
झारखंड में किडनी रोग से परेषान मरीजों की संख्या लाखों में है. राज्य में प्रतिवर्ष औसतन तीन लाख किडनी के नए मरीज आते हैं. किडनी के बिमारी से ग्रसित युवा उम्र अधिकतर मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी जाती है.
पर ट्रांसप्लांट में लगने वाली प्रक्रिया के कारण कई लोग ट्रांसप्लांट नहीं करा पाते. क्योंकि मरीजों को सप्ताह में तीन दिन डायलिसिस कराना होता है. ऐसे में सरकारी दफ्तरों के चक्कर में वे परेशान नहीं होना चाहते.
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रिम्स में ही होगा किडनी ट्रांसप्लांट
रिम्स के स्थापना के 60 सालों के बाद किडनी रोग विभाग भी खोला गया है. डॉ प्रज्ञा घोष पंत ने रिम्स में योगदान दिया है. डॉ प्रज्ञा घोष को ट्रांसप्लांट का अनुभव है.
प्रज्ञा घोष के ज्वांइन करने से रिम्स को नौ सालों के बाद किडनी की चिकित्सक मिली है. सोटो के स्थापना होने के साथ रिम्स में डायलिसिस सेंटर की भी स्थापना की जाएगी. ताकि गरीब मरीजों को ईलाज में अधिक पैसे खर्च ना करना पड़े.
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