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कोरोना ने कैसे बिगाड़ी देश की अर्थव्यवस्था, उसकी बानगी बना  COVID-19 HOTSPOT चंद्रपुरा का तेलो

– इस प्रखंड के तेलो गांव में चार और पिपराडीह में कोरोना का एक मरीज है संक्रमित

Ranchi/Bokaro: कोराना महामारी अर्थव्यवस्था के सामने एक चुनौती बनकर सामने आया है. बड़े उद्योग और व्यापार जगत के नुकसान को छोड़कर छोटे स्तर पर समझना है तो एक प्रखंड की अर्थव्यवस्था को समझते हैं. चलते हैं बोकारो के चंद्रपूरा प्रखंड. इसी प्रखंड के तेलो गांव से बोकारो जिला की पहली महिला कोरोना संक्रमित पायी गयी. यह महिला बांग्लादेश और दिल्ली में जमातियों के संपर्क में आयी थी. जिसके बाद यह कोरोना पॉजिटिव पायी गयी. इस महिला के कोरोना संक्रमित पाये जाने का खामियाजा पूरे प्रखंड के लोग भुगत रहे हैं.

स्थानीय लोगों के मुताबिक, चंद्रपुरा प्रखंड का व्यापारियों ने पूरी तरह से बायकॉट कर दिया है. जिससे सबसे अधिक परेशानी किसानों को हो रही है. किसान अपने उत्पादन व्यापारियों या बिचैलियों को नहीं दे पा रहे हैं. असर ये हो रहा है कि किसानों को एक दिन में लाखों का नुकसान हो रहा है. जहां एक ओर सरकार संक्रमण से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने को कह रही है, वहीं कुछ ऐसे उदाहरण भी सामने आ रहे है कि पूरे प्रखंड का ही बायकॉट कर दिया जा रहा है.

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बाजार नहीं पहुंच रही सब्जियां, सिमट रहे लोग

चंद्रपुरा प्रखंड में 23 पंचायत हैं. तेलो में चार व पिपराडीह में कोरोना के मिले एक मरीज से गांवों के लोग सकते में हैं. इस प्रखंड की अर्थव्यवस्था और यहां के लोगों के हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गांवों के बाजार सिमट रहे हैं. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और समाज के लिए बाजार की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है. दीपक नाम के एक किसान ने बताया की व्यापारी या बिचैलिये गांव में आना नहीं चाहते हैं.

कोरोना ने कैसे बिगाड़ी देश की अर्थव्यवस्था, उसकी बानगी बना  COVID-19 HOTSPOT चंद्रपुरा का तेलो
चंद्रपुरा प्रखंड में कोरोना पॉजिटिव केस मिलने के बाद से व्यापारियों ने पूरी तरह से वहां का बायकॉट कर दिया है. जिससे किसानों को परेशानी हो रही है.खेत में लगी सब्जियां अब सड़ रही हैं, फोटो में सब्जियों को दिखाता किसान

जिससे क्विंटल की क्विंटल सब्जियां गांवों में ही सड़ रहे हैं. हाट बाजार में असर इस हद तक है कि बाजार सिमटते जा रहे हैं. लोगों की रोजी रोटी पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. क्योंकि इस प्रखंड के अधिकांश लोग किसान हैं. इस गांव में बैंगन, तरबूज, गोभी आदि की खेती बहुतायत में होती है.

पहले दो सौ किसान हर दिन जाते थे बाजार, अब एरिया है सील

प्रखंड के लगभग दो सौ किसान हर दिन बाजार जाते थे और सब्जियों की बिक्री करते थे. किसान उत्पादित फसलों को कोयलांचल के चंद्रपुरा-फुसरो, दुगदा से लेकर नावाडीह व धनबाद जिले के डुमरा-बाघमारा, गोमो के हाट-बाजारों तक बिक्री करने जाते थे.

20-30 किलोमीटर के सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि श्रम, संसाधन व पूंजी लगाकर लोगों ने गरमा फसल लगाये थे. अब जब फसल में उपज शुरू हुई, तो लॅाकडाउन के बाद कोरोना संक्रमित मरीजों के मिलने से पांच किमी की परिधि वाले गांव पूरी तरह सील कर दिये गये हैं.

मरीजों की बढ़ती संख्या से भय बढ़ता ही जा रहा है. ग्रामीण खेतों की ओर जाना तो दूर भय से घरों के दरवाजे तक नहीं खोल रहे हैं.

30 से 40 क्विंटल साग-सब्जियां खराब हो रही

किसानों की स्थिति का आंकलन इस बात से किया जा सकता है की गांवों की कृषि उपज बाजारों तक नहीं पहुंच पा रही है. खेतों में ही रोजाना 30 से 40 क्विंटल साग सब्जियां खराब हो रही हैं. ऐसा होने से किसानों को एक दिन में दो से तीन लाख रूपये का नुकसान हो रहा है.

ग्रामीणों से बात करने से जानकारी हुई कि अगर अभी गांव से सब्जियां बाजार नहीं जातीं और बिक्री नहीं होती है, तो आगामी फसलों के लिए भी किसान तैयार नहीं होंगे. क्योंकि बीज, सिंचाई, दवा आदि के लिए इनके पास पैसे नहीं होंगे. सिर्फ बीज के में बताते हुए किसानों ने कहा की बीज लाने में ही 30 से 40 हजार लगते हैं. फिर दवाई अलग से. ऐसे में अभी जो आमदनी की मार है. आने वाले समय में भी बनी रह सकती है.

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पूर्वी तेलो पंचायत की स्थिति सबसे खराब

चंद्रपुरा के तेलो की तीन पंचायतें पूर्वी, मध्य व पश्चिमी के अलावे पपलो, तारानारी, नररा आदि पंचायतों की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है. तेलो पूर्वी पंचायत के दीपक कुमार के खेत में लगभग 15 क्विंटल तरबूज, 60 किलो खीरा, 20 किलो टमाटर, 20 किलो झिंगा है. जो खराब हो रहा है.

कोरोना ने कैसे बिगाड़ी देश की अर्थव्यवस्था, उसकी बानगी बना  COVID-19 HOTSPOT चंद्रपुरा का तेलो
चंद्रपुरा के तेलो प्रखंड का किसान तैयार सब्दी दिखाता हुआ कि कैसे लॉकडाउन में खेत में ही सब्जियां सड़ रही हैं.

तारानारी पंचायत के संदीप कुमार के खेत में लगभग 2 क्विंटल बैगन, 30 किलो नेनुआ, 30 किलो झिंगा के खरीदार नहीं हैं. तेलो पूर्वी बहियारटांड के लक्ष्मण महतो ने बताया कि खेत में लगभग 3 क्विंटल टमाटर सड़ रहा है. खरीदार नहीं मिल रहे. इसी तरह पपलो पंचायत के बजरंगीलाल कुशवाहा के खेत में 50 किलो बैंगन और 40 किलो बंदगोभी खराब हो रहे हैं. प्रखंड के अन्य किसानों की स्थिति भी चरमरा गयी है.                                                                                                                                                                                                                                     

 मजदूरी करने वालों के सामने रोजगार का संकट

प्रखंड के सिर्फ किसान ही इस समस्या से परेशान नहीं हैं. बल्कि दिहाड़ी मजदूरी करने वाले भी भविष्य में अपनी रोजी रोटी को लेकर चिंतित हैं. प्रखंड के गांवों से बड़ी संख्या में लोग दिहाडी मजदूरी करने  सेल स्टील प्लांट, एसआरयू भंडारीदह प्लांट, डीवीसी चंद्रपुरा ताप विद्युत केंद्र, इलेक्ट्रोसटील तेलगडिया प्लांट जाते हैं.

लेकिन अब इन कंपनियों में कार्यरत इस क्षेत्र के मजदूरों को घर पर रहने की सलाह प्रतिष्ठानों ने दी है. जिससे किसानों के अलावा अब दिहाड़ी मजदूरों के बीच आनेवाले समय में रोजगार को लेकर चिंता भी बढ़ रही है.

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क्षेत्र में बंद हुआ दूध का बाजार

गांवों में पशुपालकों के लिए एक बड़ी समस्या दूध का बाजार नहीं मिल पाना है. जबकि पशुओं के चारे पानी में प्रतिदिन खर्च लग रहा है. चारा का अभाव बढ़ता जा रहा है. जिससे पशुपालकों की चिंता भी बढ़ रही है.

नौ रूपये किलो बिकने वाला कुटटी 14 रुपये भी नहीं मिल पा रहा है. होटलों के बंद होने से दूध का बाजार भी नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में पशुओं को पालना पशुपालकों के लिए मुसीबत हो रहे हैं. घर की जमा पूंजी भी खत्म हो रही है.

गांव देहातों में भी पशुचारा नहीं मिलनें से लोग चिंतित हैं. किराना दुकानों के सामने भी यही स्थिति है. बाहरी आवागमन को रोकने के लिए प्रखंड के सभी गांवों में ग्रामीणों ने बैरिकेटिंग कर रखा है. जिससे गांवों में संचालित किराना की दुकानों पर भी प्रभाव पड़ रहा है. गांवों तक सामानों की सप्लाई में भी समस्या आ रही है.

ग्रामीणों के समक्ष क्या हैं भविष्य की परेशानियां

गांव वालों से ही बात करने से जानकारी हुई कि अगर अभी सब्जियो और फलों की खरीदारी लोग नहीं कर रहे हैं, तो आगामी फसल की बुआई तक नहीं पायेगी. क्योंकि आमदनी पूरी तरह से ठप्प है. आवागमन लोग कर नहीं पा रहे हैं.

किसानों के मुताबिक, एक फसल की कटाई और बिक्री के साथ ही अगले फसल की तैयारी की जाती है. प्रखंड के हजारों घरों के सामने रोजी रोटी का बड़ा सवाल है. किसानों के मुताबिक, हो सकता है सब कुछ ठीक होने के बाद भी लोग प्रखंड या गांवों में आने जाने से गुरेज करें.

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