
Ranchi: वर्ष 2020 झारखंड पुलिस के लिए अब तक अच्छा माना जा रहा है. इस वर्ष अब तक पुलिस और नक्सली पांच बार आमने सामने हुए लेकिन हर वक्त पुलिस ही नक्सलियों पर भारी पड़ी. पिछले साल की तुलना में पुलिस की स्थिति इस वर्ष अच्छी दिख रही है.
पिछले वर्ष नक्सलियों ने पुलिस के ऊपर सुनियोजित तरीके से कई हमले किये जिनमें अलग-अलग घटनाओं में 14 जवान शहीद हो गये थे. इस साल अबतक की बात करे तो झारखंड पुलिस ने मुठभेड़ में चार नक्सलियों को मार गिराया है. वहीं छह नक्सली इस वर्ष सरेंडर कर चुके है.
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पांच मुठभेड़ में मारे गये 4 नक्सली
इस वर्ष अब तक पुलिस और नक्सलियों के बीच पांच बार मुठभेड़ हो चुकी है. इस मुठभेड़ में पुलिस नक्सलियों पर भारी पड़ी और यह देख नक्सली भाग खड़े हुए. हाल के दिनों की बात करें तो पुलिस को पहली सफलता गुमला जिला में मिली जब 31 मार्च को बिशुनपुर थाना क्षेत्र के कठठोकवा जंगल में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई.
इस मुठभेड़ के दौरान एक इनामी नक्सली मारा गया है. जबकि जंगल का फायदा उठाकर उसके अन्य साथी भागने में सफल रहे. इसके महज चार दिन बाद झारखंड पुलिस को सबसे बड़ी सफलता चाईबासा में जिला में मिली. 4 अप्रैल को गुदड़ी के जंगल में नक्सली और फोर्स के बीच हुए मुठभेड़ में तीन महिला नक्सली ढेर हो गईं.
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पस्त पड़ते जा रहे हैं नक्सलियों के हौसले
झारखंड पुलिस द्वारा नक्सलवाद के खात्मे को लेकर राज्य के जंगली इलाकों में चलाये जा रहे ऑपरेशन से नक्सलियों को बड़ा नुकसान पहुंचा है. इस दौरान भारी मात्रा में विस्फोटक हथियार पकड़े गये हैं. वहीं कई बचे हुए नक्सलियों को भी पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा है. जहां एक-एक कर लगातार कई सफलताओं से पुलिस के हौसले बुलंद हैं तो वहीं नक्सलियों के हौसले पस्त पड़ते जा रहे हैं.
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मुखबिरी के आरोप में नक्सली ले रहे ग्रामीणों की जान
पुलिस को चप्पे-चप्पे की जानकारी मिले, इसलिए पुलिस अनाधिकृत तौर पर मुखबिरों को बहाल करती है. नक्सली गतिविधि और दूसरी ऐसी खबरों के बदले पुलिस की तरफ से मुखबिरों को कुछ इनाम भी मिलता है. इनाम में क्या और कितना मिलता है, यह भी सरकार के रिकॉर्ड में नहीं होता.
नक्सली इलाकों में मुखबिरों की ही वजह से पुलिस को कई बार बड़ी कामयाबी मिलती है. लेकिन इस बात की जानकारी नक्सलियों को अगर हो जाती है, तो फिर वो खबर देने वाले मुखबिर को कई बार जान से मार देते हैं. हाल के महीने में इस तरह के कई ऐसे मामले हैं जिसमें मुखबिरी का आरोप लगाकर गांव वालों को नक्सलियों ने मारा है.




