
Pravin Kumar
Ranchi : काश हम भी होते अपने घर में, फोन पर बात करते हुए जुनूर अंसारी की आवाज में लाचारी, बेबसी और पीड़ा साफ सुनाई देती है. जुनूर अंसारी भिवंडी इंडस्ट्रियल एरिया में दिहाड़ी मजदूरी करते थे. लॉकडाउन के करण गांव नही लौट सके.
जुनुर कहते हैं, अगर राज्य में रोजगार उपलब्ध होता तो इतनी दूर काम करने नहीं आना पड़ता. कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन से दिहाड़ी मजदूरों की स्थिति बहुत ही बुरी होते जा रही है. जो कहीं बाहर फंसे हुए हैं, सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि घर लाने की व्यवस्था कर दें.
नमक रोटी खा कर अपने परिवार के साथ संकट की घड़ी में रह लेंगे. संकट की घड़ी में और इस बुरी स्थिति में से सरकार हमें बाहर निकाले.
इसे भी पढ़ें – पारासिटामोल दवा खरीदने वालों के पहचान पत्र की छाया प्रति लें दुकानदार, कोरोना से बचाव को सजगता जरूरी : उपायुक्त
बंद हैं आवागमन के सभी साधन
जहां पूरे देश में कोरोना वायरस के खौफ से सन्नाटा पसरा हुआ है. वहीं देश के विभिन्न के इंडस्ट्रियल एरिया में उत्पादन भी बंद कर दिया गया है. ऐसे में विभिन्न संयत्रो में काम करने वाले मजदूर की स्थिति खरब होती जा रही है. लॉकडाउन के बाद महराष्ट्र के भिवंडी इंडस्ट्रियल एरिया में झारखंड के 500 से अधिक मजदूर फंसे हुए हैं. जो घर वपास आना चाहते हैं.
लेकिन यातायात के साधनों के बंद होने की वजह से झारखंड लौट नही पाये. मजदूरों ने सीएम हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि उन्हें घर वापसी के लिए व्यवस्था की जाये. ताकि अपने परिवार के साथ अपने गांव में रह सकें.
इसे भी पढ़ेंः #Dumka में युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म, आरोपियों की गिरफ्तारी में जुटी पुलिस
दुमका और देवघर जिले के 100 से अधिक मजदूर फंसे हैं
मुंबई से 20 और काल्यण से 8 किलोमीटर दूर भिवंडी इंडस्ट्रियल एरिया हैं. जहां विभिन्न राज्य के 20 लाख से ज्यादा मजदूर काम करते हैं. करीब 14 करोड़ वर्ग फुट में फैले इस औद्योगिक इलाके में ज्यादातर टेक्सटाइल और वेयरहाउसिंग केंद्र हैं.

लॉकाडाउन के बाद घर वपास नहीं लौट पाने वाले मजदूरो में सिर्फ पलोजोरी और मसलिया थाना क्षेत्र के ही 100 से अधिक मजदूर हैं. जिसमें अधिकांश पालोजारी, मथाडंगल, बंधडीह, खेरवानी, पोखरिया,सगराजोर गांव के हैं.
इसे भी पढ़ेंः कश्मीर में #Corona के चार नये मामले व एक मौत के बाद पाबंदियां सख्त, अब तक कुल 11 केस
जो टेक्सटाइल उद्योग में काम कर रहे थे उन्हें ही मिल पा रहा भोजन
भिवंडी इंडस्ट्रियल एरिया में वैस मजदूरों को ही भोजन कपंनी की ओर से उप्लबध कराया जा रहा है जो किसी न किसी डद्योग में नियमित वर्कर हैं. बाकी के पास भोजन का अभाव है.
भिवंडी इंडस्ट्रियल एरिया के टेक्सटाइल मिल में काम करने वाले देवघर के समशेर अंसारी ने न्यूजविंग को बताया कि हमलोग अपना घर आना चाहते हैं. दिहाड़ी पर काम करने वाले झारखंड के मजदूरो का यहां सबसे बुरा हाल है.
उन्हे भोजना भी ठीक से नही मिल पा रहा है. ऐसे में झारखंड के सीएम से हमलोग विनम्र अग्रह करते हैं कि हमें घर वापस लौटने की व्यवस्था करें.
बाहर फंसे राज्य के लोगों के लिए सरकार ने टॉल फ्री नंबर 0651-2282201 जारी किया है
इधर, झारखंड सरकार ने राज्य के बाहर फंसे लोगों के लिए टॉल फ्री नंबर 0651-2282201 जारी किया है. यह नंबर कंट्रोल रूम का है, जिसमें बाहर फंसे लोग संपर्क कर अपनी समस्या बता सकेंगे. सरकार ऐसे लोगों के लिए हर संभव मदद की कोशिश कर रही है.
ताकि अपने राज्य के लोगों को किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो. इससे पहले राज्य सरकार ने राज्य में रह रहे लोगों के लिए जिलावार कोरोना कंट्रोल रूम के नंबर जारी कर चुकी है.

जिसमें लोग कोरोना संदिग्धों की सूचना सरकार को दे सकते हैं, या मरीज खुद मदद के लिए संपर्क कर सकते हैं. राज्य के बाहर के मजदूर, छात्र और प्रोफेशनल फंसे हुए हैं. जो विभिन्न माध्यमों से सरकार से मदद की अपील कर रहे थे. झारखंड सरकार ने अपने स्तर से कई को मदद भी पहुंचाई है.
इसे भी पढ़ें: #LockDown21 : दिल्ली में फंसे झारखंड के लोग, सीएम हेमंत सोरेन की पहल पर सीएम केजरीवाल ने मदद के लिए बढ़ाया हाथ




