
Ranchi: एक शहीद के परिजनों से वादा कर उसे पूरा ना करना शायद ही इससे ज्यादा शर्म की बात और कोई हो. वो भी एक राज्य का मुखिया ऐसा करे तो उस राज्य के आम जनों की नजरें भी शर्म से झुक जाये. ऐसा ही किया पूर्व सरकार के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने.
14 फरवरी 2019 को पुलवामा में करीब 44 जवान आंतकी हमले में शहीद हुए. 16 फरवरी को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने घोषणा की थी कि वो और उनके कैबिनेट के सभी साथी एक महीना का वेतन पुलवामा में शहीद के परिजनों को मदद के तौर पर देंगे. 17 फरवरी को झारखंड के सभी अखबारों के पहले पन्ने पर इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया.
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फरवरी के बाद सीएम रघुवर दास समेत बीजेपी के सभी कैबिनेट मंत्रियों ने सरकार गिरने तक 11 महीने का वेतन उठाया. लेकिन अपनी घोषणा के मुताबिक, किसी ने पुलवामा शहीद के परिजनों को एक महीने की सैलेरी नहीं दी. ना ही इस बारे अब रघुवर दास या बीजेपी किसी मंच पर कोई बात करती है. बस घोषणा की सुर्खियां बटोरी और भूल गये.
ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या शहीदों के परिजनों के साथ ऐसा करना एक संगीन धोखा नहीं है. क्या सिर्फ अखबारों में छपने के लिए रघुवर दास ने यह घोषणा की थी.
इसे लेकर सीएम ने ट्वीट भी किया. लेकिन घोषणा के 11 महीने बीतने के बाद भी रघुवर दास की कैबिनेट सदस्यों ने शहीदों को श्रद्धांजलि के तौर पर दिये जाने वाले एक महीने की सैलेरी नहीं दी.
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शहीद विजय सोरेंग के पार्थिव शरीर को कंधा देने के बाद की थी घोषणा
14 फरवरी को पुलवामा में 44 सीआरपीएफ जवानों के शहीद होने के बाद दूसरे ही दिन झारखंड के गुमला से शहीद विजय सोरेंग के पार्थिव शरीर को कंधा देने के बाद पूर्ण बहुमतवाली बीजेपी की सरकार के मुखिया रघुवर दास ने घोषणा की थी.
घोषणा में उन्होंने कहा था कि “पुलवामा के शहीदों की शहादत बेकार नहीं जायेगी. झारखंड सरकार की तरफ से पुलवामा के शहीदों के परिजनों को मदद के तौर पर मैं और मेरे कैबिनेट के सभी मंत्री एक महीने के वेतन की राशि देंगे.”
इसके एक दिन बाद 16 फरवरी को दोपहर 2.42 मिनट पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने एक ट्वीट किया.
पुलवामा में शहीद हुए वीर सुपूतों के परिजनों के साथ पूरा देश खड़ा है। मैं और मेरे मंत्रिमंडल के सभी साथी अपना एक महीने का वेतन शहीदों के परिजनों के चरणों में अर्पित करते हैं।
— Raghubar Das (@dasraghubar) February 16, 2019
इसमें उन्होंने लिखा थाः पुलवामा में शहीद हुए वीर सपूतों के परिजनों के साथ पूरा देश खड़ा है. मैं और मेरे मंत्रिमंडल के सभी साथी अपना एक महीने का वेतन शहीदों के परिजनों के चरणों में अर्पित करते हैं. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.
तत्कालीन सरकार ने नहीं बनाया कोई सिस्टम
इस काम को पूरा करने के लिए तत्कालीन सरकार को एक सिस्टम तैयार करना था कि कैसे कैबिनेट के सदस्यों और सरकार के अधिकारी और कर्मियों के वेतन से राशि कट कर प्रधानमंत्री राहत कोष में जाये.
लेकिन इस दिशा में मीडिया में खबर छपने के अलावा कोई काम नहीं हुआ. ऐसे में पुलवामा के शहीदों के परिजन झारखंड सरकार से अपने आप को ठगा हुए महसूस कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों का कितना वेतन
• मुख्यमंत्री का वेतन: 80,000
• मंत्री का वेतन: 65,000
• IAS कैडर का वेतन: 1,75,000 से 2,25,000
• IFS कैडर का वेतन: 1,75,000 से 2,25,000
• IPS कैडर का वेतन: 1,75,000 से 2,25,000
• मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों का एक माह का वेतन: 6,50,000
• सभी IAS कैडर के एक दिन का वेतन: 12,88,000
• IPS कैडर के एक दिन का वेतन: 8,16,000
• IFS कैडर के एक दिन का वेतन: 11,28,000
• 1.90 लाख राज्य कर्मियों के एक दिन का वेतन: लगभग 47 करोड़
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