Main SliderRanchi

मुंडा अंचल में अबुआ राज के सपनों को मिली उड़ान, द्रेशद्रोह के मुकदमों की वापसी से 172 नामजद व 10 हजार अज्ञात लोगों को मिलेगी राहत

Pravin Kumar

Ranchi : चामडीह के बिरसा मुंडा की आत्मा को आज सुकून मिला होगा. गौरतलब है कि घाघरा में पत्थलगड़ी समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प में चामडीह गांव के बिरसा मुंडा की मौत गोली लगने से 4 जुलाई 2018 को घाघरा में हुई थी.

इसका शोक समस्त आदिवासी समाज को आज तक है. यही आदिवासी मूलवासी झारखंडी समाज बिरसा उलगुलान के समय से अबुआ दिसुम अबुआ राज का नारा बुलंद कर रहा है. झारखंड आंदोलन के दौर में भी यह नारा लोकप्रिय रहा है.

झारखंड राज्य गठन के बाद से अबुआ राज का सापना कमजोर पड़ता नजर आया है. लेकिन झारखुड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में महागठबंधन की जीत के साथ यह सपना एक बार फिर अंगडाई लेने लगा है.

इसे भी पढ़ेंः #Political_Strategist प्रशांत किशोर ने कहा, NRC पर सोनिया गांधी की चुप्पी समझ से परे है

कैबिनेट की पहली बैठक में लिया गया फैसला

कैबिनेट के पहले फैसले में जिस तरह हेमंत सरकार ने पत्थलगड़ी और सीएनटी-एसपीटी आंदोलन के दौर के मुकदमे वापस लेने का फैसला लिया है. उससे झारखंडियों का यह अरमान फिर बलवती हो गया है. एक फैसले के बाद वे सारे सवाल उठ खड़े हुए हैं, जिसके लिए झारखंडियों ने लगभग सौ सालों तक संघर्ष किया.

पत्थलगड़ी आदिवासियों की वह सांस्कृतिक पहचान है, जो पिछली सरकार के दौरान विवाद का विषय बन गया. संवैधानिक अधिकारों की बहाली की मांग, पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को बहाल करने को लेकर किये गये आंदोलन पर पिछली सरकार ने कई तरह के आरोप लगाये.

और खूंटी के मुंडा दिसुम में 23 एफआईआर में करीब 173 लोगों पर नामजद एवं 10 हजार से अधिक अज्ञात लोगो पर देशद्रोह जैसा संगीन मामला दर्ज कर दिया गया. दर्जनों लोग इस आरोप में जेल में हैं. आंदोलन को कुचलने के लिए जिला प्रशासन ने जिस तरह का दमन किया असके नासूर आज भी मुंडा इलाके में देखने को मिल रहे हैं.

इस प्रक्रिया ने खूंटी की शांति की प्रक्रिया को प्रभावित किया और पूरे राज्य के आदिवासियों ने इसे अपनी अस्मिता पर हमला माना.

झारखंड के नये कैबिनेट ने तय किया है कि वह पत्थलगड़ी मामले में दर्ज एफआईआर वापस लेने का फैसला किया है. देश भर के आदिवासी संगठनों व प्रगतिशील समूहों ने इस फैसले को हेमंत सोरेन सरकार का बेहतरीन आगाज बता कर स्वागत किया है.

इसे भी पढ़ेंः हेमंत सोरेन के शपथ ग्रहण समारोह पर बिहार के मंत्री का तंजः अली बाबा चालीस चोर वाला दिखा नजारा

 2016 से 2018 के बीच 23 मामले दर्ज किये गये

खूंटी जिले में 2016 से 18 के बीच 23 प्राथमिकियां पत्थलगड़ी के मामले में दर्ज की गयीं. जिसमें करीब 173 लोगों को प्राथमिकी में नामजद अभियुक्त बनया गया और 10 हजार से अधिक लोगो पर अज्ञात के रूप में एफआईआर दर्ज हुआ. इन एफआईआर में धारा 124 ए के तहत देशद्रोह जैसे संगीन आरोप लगाये गये हैं.

क्या है देशद्रोह से जुड़ी धारा 124 ए

भारतीय दंड संहिता यानी इंडियन पैनल कोड की धारा 124 ए को ही राजद्रोह का कानून कहा जाता है. अगर कोई व्यक्ति देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधि को सार्वजनिक रूप से अंजाम देता है तो वह 124 ए के अधीन आता है.

मुंडा आदिवासियों पर क्यों दर्ज हुआ देशद्रोह का मुकदमा

खूंटी जिले में पांचवीं अनुसूची की रक्षा को लेकर और भूमि अधिग्रहण कानून, लैंड बैंक के विरोध में मुंडा समुदाय ने जिले के लगभग 86 गांवों में पत्थलगड़ी की थी. इसके बाद कई बार जिला प्रशासन और पत्थलगड़ी समर्थक आमने-सामने भी हुए थे. पत्थलगड़ी में तेजी आने की एक मुख्य वजह मुंडा इलाके का मुंडारी खूंटकट्टी गांवों का विकास योजना से वंचित रहना भी रहा था.

जब राज्य सरकार ने लैंड बैक में इलाके की जमीन को डाल दिया तो मुंडाओ में सरकार के खिलाफ रोष चरम पर पहुंच गया. ठीक इससे पहले खूंटी के मुंडा अंचल में रघुवर सरकार के द्वारा सीएनटी-एसपीटी एक्ट में किये जा रहे संशोधन के विरोध में भी जोरदार आंदोलन हुआ था. इस दौरान सायको गोलीकंड की घटना में कई मुंडा आदिवासी गंभीर रूप से घायल हुए थे. और अब्राहम मुंडू की गोलीकंड में मौत हो गयी थी.

रघुवर सरकार ने पत्थलगड़ी में लिखी इबारतों का नहीं किया विश्लेषण

खूंटी जिले के तीन प्रखंडों खूंटी, अड़की एवं मुरहू के अनेक गांवों में पिछले दो सालों में मुंडा आदिवासियों ने संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों और पेसा कानून के आधार और अपने पारंपरिक रीति-रिवाज अनुसार पत्थलगड़ी की है. इसके तहत गांव के सीमाने में एक पत्थर की स्थापना की है, जिसमें विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या एवं ग्रामसभा द्वारा तय कुछ नियम लिखे हैं.

अधिकतर पत्थरों पर कुछ मूल बातें लिखी हुई हैं. जैसे जल, जंगल, ज़मीन पर आदिवासियों का अधिकार, ग्राम सभा की सर्वोच्चता, गांव में बाहरियों के घुसने पर रोक एवं आदिवासी ही मूल निवासी हैं. पत्थरों में कई प्रावधानों व निर्णयों की जिस रूप से व्याख्या की गयी है, वह असाधारण हैं.

कई व्याख्याएं शायद व्यावहारिक भी नहीं हैं. लेकिन इन व्याख्याओं पर लोगों के साथ चर्चा व विमर्श करने के बजाय राज्य सरकार आदिवासियों की मूल मांगों व मुद्दों को दरकिनार कर पुलिस के द्वारा कार्रवाई करने पर उतर आयी.

राजद्रोह के मामलो में 172 नामदज एवं हजारों ग्रामीण पर अज्ञात के रूप में आरोप लगाकर केस किया गया. मिली सूचना के अनुसार 45 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. जिसमें 19 गांव के हातू मुंडा (ग्राम प्रधान) भी शामिल हैं.

कई एफआईआर में पूरे गांव के महिला और पुरुषों पर अज्ञात के रूप में देशद्रोह के मामले दर्ज किय गये. पत्थलगड़ी को लेकर देशद्रोह के साथ के साथ-साथ आर्मस एक्ट एवं धारा -147, 148, 149, 341, 342, 323, 324, 325,  307, 109, 114, 124-अ,  153-अ, 153-इ, 295-अ, 186, 353, 290, 120इ, 302 की धाराएं लगायी गयी है.

खूंटी पत्थलगड़ी को लेकर दर्ज मामले, जिसमें देशद्रोह की धारा लगी

  • खूंटी कांड संख्या 102/17 में आठ लोगों को नामजद एवं 20-25 अज्ञात पर मामला दर्ज हुआ.
  • खूंटी कांड संख्या 17/18 में 24 को नामजद एवं 15-20 अज्ञात पर मामला दर्ज हुआ.
  • खूंटी कांड संख्या 33/18 में ग्रामसभा अध्यक्ष के साथ 27 लोगों को नामजद एवं 1000 से 1500 अज्ञात महिला-पुरुष पर मामला दर्ज हुआ.
  • मुरहू कांड संख्या में ग्राम प्रधान केवड़ा सहित 20/18 में 11 लोगों पर नामजद एवं 300 अज्ञात पर मामला दर्ज हुआ.
  • मुरहू कांड संख्या 23/18 में बिरसा मुंडा ग्राम प्रधान के सहित 29 लोगों पर नामजद एवं 3000 अज्ञात पर मामला दर्ज हुआ.
  • खूंटी कांड संख्या 80/18 में 15 लोगों पर जिनमें दो ग्राम प्रधान भी है, पर नामजद एवं 1200 से 1500 अज्ञात महिला-पुरुष पर मामला दर्ज हुआ.
  • खूंटी कांड संख्या 98/18 में ग्राम प्रधान घाघरा के साथ अन्य तीन लोगों पर नामजद एवं 250 अज्ञात पर मामला दर्ज हुआ.
  • खूंटी कांड संख्या 99/18 में 11 पर नामजद एवं 2500 से 3000 अज्ञात महिला-पुरुष पर मामला दर्ज हुआ.
  • खूंटी कांड संख्या 287/18 में खूंटी के बहार के 20 लोगों को नामजद अभियुक्त बनया गया है. जिसमें स्टेन स्वामी, अलोका कुजूर, कांग्रेस के थियोडोर किडो और रौशन किडो भी आरोपी हैं.

इसे भी पढ़ेंः #Bihar में बढ़ी BJP की परेशानीः प्रशांत किशोर बोले- विधानसभा चुनाव में नहीं चलेगा 50-50 का फॉर्मूला

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button