
Ranchi: झारखंड के पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव की जमानत पर मंगलवार को हाइकोर्ट सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निचली अदालत से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. अब जमानत पर 20 जनवरी को सुनवाई होगी.
एनटीपीसी जमीन अधिग्रहण के खिलाफ विधायक निर्मला देवी के नेतृत्व में आंदोलन चलाया जा रहा था. पुलिस से झड़प होने के बाद बड़कागांव थाने में प्राथमिकी दर्ज करते हुए योगेंद्र साव समेत अन्य को आरोपी बनाया गया था.
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जमानत हुई थी रद्द
दंगा करने और हिंसा भड़काने के मामले में आरोपी बनाये गये योगेंद्र साव और उनकी पत्नी कांग्रेस विधायक निर्मला देवी को दिसंबर 2017 में सशर्त मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने 4 अप्रैल को रद्द कर दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने की वजह से उनकी जमानत रद्द की थी. कोर्ट ने कहा कि दोनों को झारखंड आने पर रोक था लेकिन पूर्व मंत्री अनधिकृत रूप से झारखंड में मिले. इस तरह उन्होंने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया इसलिए उनकी जमनत रद्द की जाती है. इसके साथ ही कोर्ट ने पूर्व मंत्री और उनकी विधायक पत्नी के 18 मुकदमे झारखंड की हजारीबाग अदालत से रांची स्थानांतरित कर दिया था.
ज्ञात हो कि दिसंबर, 2017 में जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने दोनों को सशर्त जमानत दी थी. कोर्ट ने कहा था कि दोनों लोग झारखंड से बाहर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रहेंगे. साथ ही शर्त लगायी थी कि वह गवाहों से किसी सूरत में संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे. इन्हें अपना पासपोर्ट भी जमा कराने के निर्देश दिये गये थे.
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क्या है आरोप
योगेंद्र और निर्मला देवी पर हजारीबाग जिला के बड़कागांव में एनटीपीसी के प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण का विरोध करने और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और सुरक्षाबलों पर भीड़ से हमला कराने का आरोप है.
बड़कागांव के ढेंगा गांव में एनटीपीसी के पकरी बरवाडीह कोल माइनिंग प्रोजेक्ट के विरोध में 14 अगस्त, 2015 को पुलिस के साथ ग्रामीणों की झड़प हो गयी थी. इस मामले में योगेंद्र साव और उनकी पत्नी निर्मला देवी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.
साव ने हाइकोर्ट में अपील की और उन्हें वहां से जमानत दे दी गयी. झारखंड सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की. सरकार ने कहा कि झारखंड हाइकोर्ट ने केस डायरी देखे बगैर ही योगेंद्र साव और उनकी पत्नी को जमानत दे दी.
झारखंड सरकार की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने साव और निर्मला देवी की जमानत रद्द कर दी. साथ ही झारखंड हाइकोर्ट को आदेश दिया कि वह फिर से मामले की सुनवाई करे. 15 अप्रैल 2019 को रांची की निचली अदालत में उन्होंने सरेंडर किया, जिसके बाद से वो जेल में ही हैं.




