
Pravin Kumar
Ranchi : संथाल परगना की 16 सीटों पर 20 दिसंबर को विधानसभा चुनाव होना है. संथाल के गोड्डा में किसानों और आडानी पवार प्लांट के बीच चला संघर्ष मीडिया की सुर्खियों में भी रहा. लेकिन विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दल गोड्डा के किसानो पर हुए अत्याचार को चुनावी मुद्दा बनाने से बच रहे हैं.
गोड्डा जिले में तीन विधानसभा पड़ते हैं. पोड़ैयाहाट, महगामा, गोड्डा विधानसभा क्षेत्र आता है. डबल इंजन की सरकार पर अडानी को लाभ पहुंचाने का आरोप विपक्षी दल लगाते रहे थे. लेकिन विधानसभा चुनाव में गोड्डा के किसानों की व्यथा को चुनावी कैंपेन का हिस्सा बनाने से बच रहे हैं.
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अंबानी-अडानी के खिलाफ बोलते रहे हैं राहुल गांधी
गोड्डा के पत्रकार नागमनी साह कहते है, सरकार ने अडानी प्लांट लगाने के लिए नियमों को ताक में रख कर काम किया. लेकिन चुनाव के दैरान विपक्षी दलों ने भी किसानों से जबरन ली गई जमीन को चुनावी मुद्दा नहीं बनाया है. हालांकि कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी अंबानी-अडानी जैसे कारपोरेट घराने के खिलाफ बोलते रहते रहे हैं.
लेकिन गोड्डा में किसानों पर हुए अत्याचार को किसी भी राजनीतिक दल ने चुनाव कैंपेन का हिस्सा नहीं बनाया. झाविमो के प्रदीप यादव ने अपने नामांकन के बाद इस मामले को रखा था. लेकिन महागठबंधन की ओर से महागामा कांग्रेस, गोड्डा आरजेडी, पोड़ैयाहाट झारखंड मुक्ति मोर्चा के खाते में आया है. इन दलों के उम्मीदवार अडानी के सवाल पर चुप हैं.
गोड्डा की सामाजिक कार्यकर्ता मेरी निशा कहती हैं, जिला में अडानी पावर प्लांट के साथ-साथ लैंड बैंक का सवाल, सीएनटी-एसपीटी कानून जैसे विषय पर ग्रामीण गोलबंद हैं. सरकार के द्वारा लैंड बैंक में सार्वजनिक जमीन दर्ज कर दी गयी है. लेकिन चुनावी कैंपेन का यह मुद्दा नही बन सका.
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डबल इंजन वाली सरकार ने किसानों की जमीन लूटी ली- रामजीवन पासवान
रामजीवन पासवान कहते हैं- आखिर देश में गरीब किसान कहां जायें, सरकार ही बाता दे. पुलिस-जिला प्रशासन पूरी तरह अडानी कंपनियों के लिए काम कर रहे हैं. यहां किसानों को न्याय कैसे मिल सकता है. राज्य में सरकार कंपनियों के लिए जमीन लूटने का काम कर रही है.
विकास के नाम पर जमीन की लूट की छूट कंपनियों को राज्य में मिली हुई है. न्याय के लिए हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. वर्तमान भाजपा सरकार में राज्य के किसानों की जमीन सुरक्षित नहीं है. चुनाव के दौरान विपक्षी दलो ने भी किसान के सवाल को चुनावी मुद्दा नही बनाया.
संथाल परगना में एसपीटी एक्ट लागू है
झारखंड के संथाल परगना इलाके में एसपीटी (Santal Parganas Tenancy) एक्ट लागू है. जिसमें स्पष्ट लिखा है कि इलाके की जमीन की खरीद-बक्रिी नहीं की जा सकती. एक्ट के सेक्शन 20 के अनुसार, सरकार सिर्फ लोक प्रयोजन के लिए ही जमीन का अधग्रिहण कर सकती है.
लेकिन यहां सरकार द्वारा एक निजी कंपनी के लिए जमीन का अधग्रिहण किया गया है. अडानी पावर प्लांट में राज्य सरकार का कोई शेयर नहीं है. और इसका लाभ भी राज्य को नहीं मिलने वाला है. आइये जानें भू अर्जन कानून को किस तरह से उल्लंघन किया गया:
सेक्शन-8 का उल्लंघन
चिंतामणि साह कहते हैं, भू-अर्जन कानून के सेक्शन-8 में कहा गया है, जिला में अगर पूर्व में किसी परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण हुआ हो तो पहले उसका उपयोग किया जाये. साह ने बताया कि 2011 में भूषण स्टील प्लांट लगाने के लिए सुंदरपहाड़ी में 1100 एकड़ जमीन अधिग्रहण किया गया था. उस जमीन का उपयोग आज तक नही हुआ. इसके बाद भी बहुफसली भूमि जबरन तत्कालीन डीसी ने अधिग्रहित कर ली.
सेक्शन-26
भू-अर्जन कानून 2013 के सेक्शन-26 में फसल के आधार पर मूल्यांकन करने की बात है. साह कहते हैं कि एसपीटी एक्ट के प्रावधान के अनुसार, संथाल परगना की जमीन बिकाऊ नहीं है, तो किस आधार पर मूल्य का निर्धारण सरकार ने किसानों को जबरन मुआवजा दिया.
सेक्शन-5
भू-अधिग्रहण कानून 2013 के सेक्शन-5 में जनसुनवाई का प्रावधान है. साह कहते हैं 6 दिसंबर 2016 को अडानी पावर प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण संबंधी जनसुनवाई लाठी, बंदूक के बल पर और प्रशासन के सहयोग से की गयी. इस तरह सरकार ने जनसुनवाई को भी नौटंकी बना दिया और किसानों का पक्ष सामने नहीं आया.
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