
Ranchi : झारखंड में एचआइवी पेशेंट की संख्या एक साल में बढ़कर 21400 से 24396 हो गयी है. इस साल कुल 2996 पेशेंट बढ़े हैं. राज्य में 24396 पेशेंट में से सिर्फ 11800 मरीज ही नियमित रूप से दवा ले पा रहे हैं.
इसके पीछे के कारणों का पता लगाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है, पर जो स्थितियां सामने आयी हैं उससे यह पता चल रहा है कि अधिकतर एचआइवी-एड्स जनित रोगों के मरीजों की संख्या ग्रामीण और दूर दराज के इलाकों में ही है जिन्हें इलाज के लिए शहर के सेंटर पहुंचने में पैसे का आभाव सामने आ जा रहा है.
वे सेंटर पहुंच नहीं पा रहे और उन्हें दवाइयां मिल नहीं पा रही हैं. इससे निपटने के लिए बने विभिन्न सेंटर्स की संख्या में भी इजाफा हुआ है.
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भेदभाव के कारण भी कतराते हैं मरीज
डॉक्टर्स से बात करने पर वे कहते हैं कि मरीजों को बीमारी पता होने के बाद भी समाज और परिवार में भेदभाव के कारण मरीज अपना इलाज कराने और दवा लेने से बचते हैं.
हालांकि उन्होंने कहा कि जागरुकता भी आयी है जिससे अधिक संख्या में मरीज काउंसिलिंग के लिए भी पहुंच रहे हैं.
उन्होंने कहा कि मध्यम स्तर से नीचे रहने वाले लोगों में जागरुकता का अभाव होने के कारण भी मरीजों की संख्या उस वर्ग में अधिक है.
क्या हो सकते हैं लक्षण
एड्स के सिम्पटम भी अन्य रोगों की तरह ही हैं. जैसे वजन की कमी होना. एक महीने से अधिक डायरिया रहना, अधिक समय तक बुखार रहना, भूख की कमी, शरीर में चकते, लगातार वजन घटना इसके प्रारंभिक लक्षण हैं.
डॉक्टर ने बताया कि इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
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उपचार केंद्रों की स्थिति
| 2018 | 2019 | |
| एआरटी सेंटर्स | 08 | 12 |
| आइसीटीसी | 65 | 98 |
| एफआइटीसी | 202 | 202 |
मरीजों की स्थिति
| 2018 | 2019 | |
| कुल मरीजों की संख्या | 21400 | 24396 |
| एआरटी सेंटर्स में मरीज | 18100 | 19787 |
| नियमित रूप से दवाई | 10100 | 11799 |
| एड्स से मौत | 3104 | 4499 |
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