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पिछले 5 सालों के मुकाबले इस वर्ष कम हुई नक्सल घटनाएं, लेकिन शहीद हुए ज्यादा जवान

Saurav Singh

Ranchi: झारखंड में नक्सलियों के खात्मे के लिए लगातार सुरक्षाबलों के द्वारा अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद झारखंड में सक्रिय नक्सली सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बने हुए हैं.

इस वर्ष अब तक नक्सली घटनाएं तो कम हुई हैं, लेकिन जो घटनाएं घटी हैं उसमें पुलिस-प्रशासन को ज्यादा नुकसान पहुंचा है. पिछले पांच वर्ष में यह पहली बार है, जब 2019 के अबतक 14 जवान नक्सल हमले में शहीद हो चुके हैं. जबकि 2014-2018 तक शहीद जवानों का आंकड़ा नौ व इससे नीचे था.

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 घटनाएं कम लेकिन पुलिस को नुकसान ज्यादा 

पिछले 5 सालों में नक्सली घटनाएं कम हुई हैं लेकिन पुलिस जवानों को इसका ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है. पिछले पांच सालों की नक्सल घटनाओं के आंकड़ों पर ध्यान दे तों वर्ष 2014 में 231, में 2015 में 196, वर्ष 2016 में 196, वर्ष 2017 में 186,वर्ष 2018 में 118 और वर्ष 2019 में अबतक 96 नक्सल घटनाएं सामने आयीं हैं.

वहीं शहीद जवान की बात करें तो वर्ष 2014 में 8, वर्ष 2015 में 4, वर्ष 2016 में 9, वर्ष 2017 में 2, वर्ष 2018 में 9 और वर्ष 2019 में अबतक 14 जवान शहीद हुए हैं.

इन पांच सालों में कई नक्सली भी मारे गये हैं. 2014 में 10, 2015 में 25, वर्ष 2016 में 21, वर्ष 2017 में 12, वर्ष 2018 में 26 और वर्ष 2019 में अबतक 26 नक्सली मारे गए है.

आम नागरिक वर्ष 2014 में 86, वर्ष 2015 में 47, वर्ष 2016 में 61,वर्ष 2017 में 44, वर्ष 2018 में 27 और वर्ष 2019 में अबतक 28 मारे गये हैं.

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झारखंड में बचे हैं सिर्फ 550 माओवादी

झारखंड पुलिस का दावा है कि झारखंड में अब सिर्फ 550 माओवादी बचे हैं. लेकिन 550 माओवादियों से लड़ने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबल लगे हुए हैं. जिनमें सीआरपीएफ की 122 कंपनी, आइआरबी की 5 कंपनी और झारखंड जगुआर की 40 कंपनी फोर्स लगी हुई है.

इतनी भारी संख्या में सुरक्षाबल के तैनात होने के बावजूद भी झारखंड से पूरी तरह से माओवादिओं का खात्मा नहीं हो पा रहा है. समय-समय पर माओवादी छोटी-बड़ी घटना को अंजाम देकर अपनी उपस्थिति भी दर्ज करवा रहे हैं.

देश के 30 अति नक्सल प्रभावित जिलों में झारखंड के 13 जिले शामिल

झारखंड में भले नक्सली कमजोर पड़ गये हैं और झारखंड पुलिस लगातार नक्सलियों के खात्मे के लिए अभियान चला रही है. इसके बावजूद भी देश के 30 नक्सल प्रभावित जिलों में 13 जिले झारखंड के हैं, जो सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों की सूची में शामिल हैं.

सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों के मामले में झारखंड पहले स्थान पर है, तो वहीं छत्तीसगढ़ के 8 जिले सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों के साथ दूसरे स्थान पर है.

झारखंड के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों में खूंटी, गुमला, लातेहार, सिमडेगा, पश्चिम सिंहभूम, रांची, दुमका, गिरिडीह, पलामू, गढ़वा, चतरा, लोहरदगा और बोकारो है. सरायकेला, पूर्वी सिंहभूम, हजारीबाग, धनबाद, गोड्डा भी नक्सलवाद की समस्या से जूझ रहे हैं. वहीं कम संवदेनशील जिलों में कोडरमा, जामताड़ा, पाकुड़ और रामगढ़ है. जबकि देवघर-साहेबगंज नक्सल प्रभावित नहीं माना गया है.

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माओवादियों के खिलाफ ये डेवलपमेंट एक्शन प्लान चला रही पुलिस

सारंडा एक्शन प्लान, सरयू एक्शन डेवलपमेंट प्लान, झुमरा एरिया डेवलपमेंट एक्शन प्लान, पारसनाथ एरिया डेवलपमेंट प्लान, चतरा एरिया डेवलपमेंट एक्शन प्लान, बानालात इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान, गिरिडीह-कोडरमा बॉर्डरिंग एरिया डेवलपमेंट प्लान, दुमका-गोड्डा बॉर्डरिंग एरिया डेवलपमेंट प्लान, खूंटी-सरायकेला-चाईबासा बॉर्डरिंग एरिया एक्शन प्लान, सिमडेगा खूंटी बॉर्डरिंग एरिया एक्शन प्लान, जमशेदपुर एरिया एक्शन प्लान, पलामू-चतरा एरिया एक्शन प्लान व गढ़वा लातेहार-पलामू बॉर्डरिंग एरिया एक्शन प्लान.

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