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#PM-CM डबल इंजन की बात करते हैं, पर नहीं बताते एक इंजन फेल हो गया- केंद्र नहीं दे रहा GST का 825 करोड़ बकाया

Akshay Kumar Jha

Ranchi: झारखंड के चुनावी मौसम में बीजेपी का सबसे मजबूत नारा “डबल इंजन” (केंद्र और राज्य दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकार) का है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, स्मृति ईरानी और मुख्यमंत्री रघुवर दास जैसे स्टार प्रचारक “डबल इंजन” की बात कर लोगों से बीजेपी को वोट देने की अपील कर रहे हैं.

उनका कहना है कि “डबल इंजन” की सरकार की ही वजह से पिछले पांच सालों में झारखंड में विकास संभव हो पाया है.

Sanjeevani

इस चुनाव में भाजपा को जितायें और झारखंड में फिर से डबल इंजन की सरकार बनायें. ताकि केंद्र की मदद से राज्य का विकास होता रहे.

भलें ही यह “डबल इंजन सरकार” वाली बात सही रही हो. पर अब यह सच बदल गया है. केंद्र सरकार की नीतियों का कोई फायदा झारखंड को मिलता नहीं दिख रहा.

हालात यह है कि केंद्र सरकार जीएसटी मद के 825 करोड़ रुपये झारखंड सरकार को नही दे रही है. चूंकि रघुवर सरकार पिछले पांच सालों से केंद्र की पिछलग्गू बनी नजर आयी है.

इस कारण यह राशि हासिल करने के लिये आवाज तक नहीं उठा पा रही. जबकि दूसरे राज्य आवाज उठा रहे हैं.

हाल ही में गैर बीजेपी शाषित दिल्ली, पंजाब, केरल, पश्चिम बंगाल और राजस्थान पांच राज्यों ने केंद्र पर उनके हिस्से की जीएसटी की रकम ना देने का आरोप लगाया है.

कहा जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों से उन्हें जीएसटी की राशि नहीं मिली है जिससे राज्य में कई योजनाओं पर असर पड़ रहा है.

इस खबर के बाद न्यूज विंग ने झारखंड की हालात जानने की कोशिश की. पड़ताल की गयी तो पता चला कि झारखंड की भी हालत उन्हीं पांचों राज्यों जैसी है. लेकिन बीजेपी शाषित होने की वजह से कोई कुछ बोल नहीं पा रहा है.

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राज्य के 825 करोड़ केंद्र देने में असमर्थ

झारखंड को केंद्र सरकार की तरफ से पब्लिक से वसूली हुई जो जीएसटी की राशि मिलनी चाहिए वो कई महीने से नहीं मिली है. बढ़ते-बढ़ते यह राशि 825 करोड़ के आस-पास पहुंच गयी है.

लेकिन राज्य सरकार की तरफ से केंद्र पर जीएसटी की राशि के लिए किसी तरह का दबाव नहीं बनाया जा रहा है. पुख्ता सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आयी है कि आर्थिक मंदी की वजह से जीएसटी टैक्स की वसूली का ग्राफ काफी नीचे गया है.

इसी के साथ राजकोषीय घाटा काफी बढ गया है. अनुमान लगाया गया था कि राज्य को 14 फीसदी का विकास दर हासिल होगा. लेकिन अभी जो विकास दर है वो करीब 10 फीसदी कम है.

यानि 14 के मुकाबले सिर्फ चार फीसदी विकास ही झारखंड में हो पा रहा है. ऐसा होना राज्य के लिए दोहरे खतरे का संकेत माना रहा है. इस समस्या से कैसे निबटा जाये, सरकार रास्ता नहीं निकाल पा रही है.

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झारखंड सरकार का चुप्पी साधना गहरे खतरे का अनुमान

जानकारों का इस मामले को लेकर कहना है कि सरकार का अपना पैसा लेने के लिए आवाज बुलंद नहीं करना अच्छा संकेत नहीं है. इसका सीधा असर राज्य के विकास पर पड़ेगा.

जबकि झारखंड के अलावा पांचों राज्य के वित्त मंत्रियों ने एक एक संयुक्त बयान में केंद्र से अपील की है कि उनका जीएसटी बकाया जल्द से जल्द रिलीज किया जाये.

वित्त मंत्रियों के बयान में कहा गया है कि भुगतान में एक महीने की देरी का कोई कारण नहीं बताया गया है. उससे राज्य सरकारों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है.

कुछ राज्यों को फंड जुटाने के लिए दूसरे रास्ते अपनाने पड़ रहे हैं. यहां तक कि कुछ राज्यों ने ओवरड्राफ्ट का सहारा लिया है. वित्त मंत्रियों का कहना था कि जीएसटी में राज्यों के टैक्स रेवेन्यू का 60 फीसदी हिस्सा रहता है.

जाहिर तौर पर इतने बड़े रेवेन्यू सोर्स के रुक जाने से से उन पर वित्तीय बोझ बढ़ जायेगा. इतनी बड़ी रकम के रुक जाने से राज्यों की योजनाएं चरमरा जायेंगी.

केंद्र ने भरोसा दिया था कि जीएसटी कलेक्शन के राज्यों का हिस्सा बगैर किसी अड़चन के मिलेगा. यही वजह है कि राज्यों ने जीएसटी लागू करने की सहमति दे दी थी.

लेकिन अब उन्हें इस बात की चिंता होने लगी है कि राज्यों का हिस्सा उन्हें वक्त पर मिलेगा या नहीं. इसके लिए संविधान में प्रावधान किये गये हैं.

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