
Akshay Kumar Jha
Ranchi: झारखंड के पहले विधानसभा चुनाव से ही बाबूलाल मरांडी झारखंड की राजनीति के सबसे बड़े हीरो में से एक माने जाते रहे हैं. इनकी पार्टी की हर बार सरकार बनाने या बिगाड़ने में अहम भूमिका रही है. खुद बाबूलाल मरांडी झारखंड में एक ऐसी राजनीतिज्ञ शख्सियत हैं, कि इन्हें अपनी पार्टी का ब्रांड एंबेसेडर माना जाता है.
2014 के लोकसभा चुनाव में भी सरकार बनाने में इनकी पार्टी की अहम भूमिका रही थी. 2014 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जहां छह सीट पर जीत दर्ज की थी, वहीं जेवीएम ने आठ सीट पर बाजी मारी थी. इस बार भी बाबूलाल मरांडी और उनकी पार्टी क्या करेगी.
इस बात पर झारखंड की सभी पार्टियों के साथ निर्दलीय उम्मीदवारों और राजनीतिक पार्टी के बागी नेताओं की नजर टिकी है. जेएमएम और कांग्रेस सभी जानते हैं कि जेवीएम अगर महागठबंधन से नाराज होकर अकेले चुनाव लड़ता है, तो विपक्षी पार्टियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है.
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महागठबंधन के लिए सिरदर्द बने हुए हैं बाबूलाल
अभी तक विपक्षी पार्टी का महागठबंधन का स्वरूप तैयार नहीं है. राजनीतिक कयासों की मानें तो जेएमएम को 43, कांग्रेस को 30 प्लस, राजद को 5 और वामदल को 3 सीट मिलने वाले हैं. ऐसे में अभी तक बाबूलाल मरांडी की पार्टी को गठबंधन से बाहर माना जा रहा है. ऐसा होने के पीछे खुद बाबूलाल का आत्मविश्वास है. उन्होंने करीब-करीब घोषणा कर दी है कि वो अकेले ही इस बार चुनाव मैदान में उतरेंगे.
जाहिर सी बात है कि जेवीएम अगर अकेले चुनाव लड़ता है, तो जेएमएम और कांग्रेस को सीधा नुकसान पहुंचेगा. खासकर संथाल जो कि जेएमएम का गढ़ माना जाता रहा है, वहां सबसे ज्यादा नुकसान होने की बात कही जा रही है. ऐसे में खुद हेमंत सोरेन महागठबंधन के नए समीकरण की वकालत कर रहे हैं.
सूत्रों का कहना है कि हेमंत सोरेन बाबूलाल से कॉन्टैक्ट में हैं. वहीं कुछ पुख्ता सूत्रों का कहना है कि हेमंत सोरेन दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान के सामने जेवीएम को साथ लाने की बात रख रहे हैं.
वहीं कांग्रेस भी जेवीएम के सामने ऑप्शन खोलने को तैयार हैं. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव दो बार बाबूलाल से मिलने की कोशिश कर चुके हैं. लेकिन बाबूलाल मरांडी ने मुलाकात के दौरान किसी राजनीतिक समीकरण की बात नहीं की. ऐसे में कहा जा रहा है कि बाबूलाल इस बार चुनाव लड़ने से पहले ही किंग मेकर का राजनीतिक मजा ले रहे हैं.
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बाबूलाल की हर हरकत पर है बीजेपी की नजर
बाबूलाल मरांडी 2019 के चुनाव में क्या करेंगे. क्या वो गठबंधन के साथ जाएंगे या अकेले चुनाव में हाथ आजमाएंगे. इन सभी बातों पर बीजेपी की नजरें टिकी हुई हैं. दरअसल जेवीएम अगर चुनाव में अकेला उतरता है, तो विपक्ष दो खेमा में बंट जाएगा. एक महागठबंधन और दूसरा जेवीएम.
कुछ सीटों पर बीजेपी को जेवीएम अकेले लड़ते हुए डैमेज कर सकती है. लेकिन ज्यादातर नुकसान विपक्षी महागठबंधन को ही होने वाला है. ऐसे में बीजेपी हरगिज नहीं चाहेगी कि जेवीएम महागठबंधन में शामिल हो. कहा तो यह भी जा रहा है कि बीजेपी की तरफ से भी गठबंधन को कमजोर करने का काम अंदर ही अंदर हो रहा है.
लेकिन इसकी कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं है. आने वाले समय में चुनाव के कैनवास पर राजनीति की कलम से क्या लिखा जाएगा, वो तो समय तय करेगा. लेकिन फिलहाल यह तय है कि बाबूलाल मरांडी विधानसभा चुनाव से पहले सेंट्रल प्वाइंट बने हुए हैं.
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