
- सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में सभी राज्यों में छह माह में सूचना आयुक्तों के पद भरने का निर्देश दिया था
- जनसंवाद में मामला पहुंचने के बाद कार्मिक विभाग में हो रही कार्रवाई
Chhaya
Ranchi: राज्य सूचना आयोग, जो सूचना अधिकार अधिनियम के तहत लोगों को सूचनाएं उपलब्ध कराता है, में सूचना आयुक्तों की कमी है. वर्तमान में राज्य सूचना आयोग में नौ सूचना आयुक्तों की कमी है. एक मुख्य सूचना आयुक्त आदित्य स्वरूप हैं, जो दिसंबर में सेवानिवृत्त हो जायेंगे. वहीं एक सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी हैं. जबकि किसी भी राज्य के सूचना आयोग में कम से कम दस सूचना आयुक्त होने चाहिए. इसके साथ ही एक मुख्य सूचना आयुक्त. राज्य में लंबे समय से ये पद रिक्त हैं. जिस कारण सूचना अधिकार अधिनियम के तहत आयोग को प्राप्त वादों का निबटारा आयोग नहीं कर पा रहा है. जानकारी मिली है कि आयोग को मिलनेवाले वादों की सही से सुनवाई नहीं हो पा रही है. सूचना आयुक्तों की कमी के कारण कई बार आवेदकों को सालों भर बाद की तारीख सुनवाई के लिए दी जा रही है.
इसे भी पढ़ें – बीजेपी विधायक ढुल्लू के गुर्गे घर में घुसकर देते हैं जान की धमकी, अब तो पार्टी ने भी किया किनारा
कार्मिक विभाग ने निकाली थी नियुक्ति
इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की गयी थी, जिसके बाद फरवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि राज्यों को खाली पड़े सूचना आयुक्तों के पदों को छह माह में भरना है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि रिक्त सूचना आयुक्त के पद पर रिटार्यड सूचना आयुक्त ही नहीं, बल्कि अन्य योग्य उम्मीदवार को भी पद पर रखा जा सकता है. इसके बाद 27 फरवरी को कार्मिक एवं राजभाषा विभाग की ओर से विज्ञापन निकाला गया. जिसमें सूचना आयुक्त के पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किये गये. आवेदन भरने की अंतिम तिथि 10 अप्रैल थी. इसके बाद भी कार्मिक की ओर से उक्त पदों पर नियुक्ति नहीं की गयी.
इसे भी पढ़ें – 2008 वाली मंदी की आहट! मार्केट से पैसा निकाल रहे हैं अमेरिकी CEO
विभागीय नोडल पदाधिकारी ने अवर सचिव से मांगा जवाब
इस संबंध में धनबाद के आरटीआइ कार्यकर्ता महेश कुमार ने मुख्यमंत्री जनसंवाद में शिकायत की थी. जिसके बाद कार्मिक एवं राजभाषा विभाग के नोडल पदाधिकारी ने विभागीय अवर सचिव से जवाब मांगा है. महेश ने जानकारी दी कि राज्य सूचना आयोग में कई मामले लंबित रह जाते हैं. सूचना आयूक्तों की कमी के कारण मामलों की सुनवाई नहीं होती. कई बार तो साल भर बाद की तारीख दी जाती है. वहीं सुप्रीम कोर्ट का भी निर्देश है कि राज्यों में सूचना आयुक्तों के खाली पदों को भरा जाये. इसके बाद भी कार्मिक विभाग इस मामले में लापरवाही बरत रहा है.
इसे भी पढ़ें – धनबादः दो पक्षों के बीच विवाद के कारण मेला पर लगा ग्रहण, दुकानदारों के समक्ष उत्पन्न हुई विकट स्थिति



