
Manoj Kumar Pintu
Giridih: मानसून इस बार भी लगता है किसानों को दगा देने के मूड में है. खेतों में पानी भी वैसे नहीं दिख रहे हैं, जो बेहतर फसल उत्पादन के लिए होना चाहिए. जिला कृषि विभाग का ही आंकड़ा पूरे गिरिडीह में अगस्त माह में समान्य से कम 163. 5 फीसदी बारिश का है. जबकि अगस्त माह में उम्मीद थी कि जमकर बारिश होगी. और अगस्त माह में 291. 5 मिमि बारिश का रिकार्ड दर्ज किया जाएगा.
जो हुआ नहीं. ऐसे में किसानों की चिंता स्वाभाविक है. यह भी सच है कि जिस प्रकार मानसून ने दगा दिया, उसका सबसे अधिक प्रभाव बाजार में आने वाली सब्जी पर पड़ना तय है. वैसे प्राकृतिक की मार तो किसान झेल ही रहे हैं. साथ ही राज्य सरकार के कृषि मंत्रालय ने भी किसानों को काफी हद तक परेशान किया है.
क्योंकि किसानों को धान का बीज समय पर मिला नहीं. पैक्स के माध्सम से किसानों को धान का बीज करीब 25 दिनों से लेकर एक माह के लेट से मिला. वह भी बेहद कम.
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वितरण के लिए कम मिला बीज
कृषि विभाग ने जहां पूरे जिले में बेहतर खेती के लिए छह हजार क्विंटल बीज की मांग की थी. वहीं राज्य सरकार ने कृषि विभाग को महज 1300 सौ क्विंटल बीज ही उपलब्ध कराया. लिहाजा, कई किसान अब भी हैं जिन्हें पैक्स ने बीज उपलब्ध नहीं कराया. वहीं जिन किसानों को बीज मिला भी तो काफी लेट से. खेत रोपने का काम किसानों ने जूलाई के पहले सप्ताह से शुरु कर दिया था. जबकि किसानों को बीज मिला जूलाई के अंतिम सप्ताह में. जब रोपाई का काम पूरा खत्म होने को था.
लेट से बीज मिलने की शिकायत कहीं दूर की नहीं बल्कि सदर प्रखंड के पांडेयडीह पंचायत के बेरगी और फूचली गांव की ही है. यहां के किसानों की शिकायत प्रकृति के साथ-साथ राज्य सरकार से भी है. ऐसे में यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं कि राज्य सरकार ने किसानों की स्थिति को सुधारने के कई बड़े दावे किए. लेकिन धरातल पर जो दिख नहीं रहा, उसे किसान चितिंत है.
धान के बदले मकई उगा रहे किसान
इस दौरान सच्चाई जानने के लिए जब सीधी नजर के संवाददाता बेरगी और फूलची गांव पहुंचे, तो पता चला कि इन गांवों के चंद किसानों को ही बीज मिल पाया. जबकि अधिकांश किसान बीज नहीं मिलने के कारण सब्जी और मकई की खेती कर रहे हैं. वैसे जिन किसानों ने बीज नहीं मिलने का शिकायत की उसमें गांव के जानकी महतो, महेन्द्र वर्मा, हरहर वर्मा, जर्नादन वर्मा, खगेशवरी देवी शामिल हैं.
जिन्हें पैक्स ने अब तक बीज उपलब्ध भी नहीं कराया. लिहाजा, ऐसे किसान अब मकई के साथ सब्जियों की खेती कर रहे हैं. मकई की फसल पूरे गांव में लहलहाती नजर आयी. किसानों ने यह भी बताया कि गांव में जलस्त्रोत का कोई साधन नहीं है. वैसे किसानों की यह शिकायत भी सही है, क्योंकि बेरगी गांव में एक भी कुंआ नहीं मिला.
क्या कहते हैं कृषि पदाधिकारी
इधर मानसून की बेरुखी से किसान चितिंत हैं. लेकिन जिला कृषि विभाग नहीं. कृषि पदाधिकारी धीरेन्द्र पांडेय का कहना है कि इधर दो-तीन दिनों में मानसून ने गति पकड़ी है. हर दूसरे-तीसरे दिन रुक-रुक कर बारिश हो रही है. ऐसे में उम्मीद है कि शायद इस बार खेती बेहतर हो.
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