
Jamdhedpur : 14 साल पहले जमशेदपुर के उड़िया समाज ने सरकार से भगवान जगन्नाथ मंदिर के निर्माण के लिए जमीन मांगी थी. लेकिन सरकार अब तक जमीन हैंडओवर नहीं कर पायी है.
तीन करोड़ की लागत से ढाई एकड़ में मंदिर बनाने की योजना का बजट अब इन 14 वर्षों में करीब 70 करोड़ का हो गया है. इसका निर्माण अब छह एकड़ में होगा. लेकिन अभी भी ये तय नहीं है कि सरकार उड़िया समाज को कब तक जमीन मुहैया करा पायेगी.
जमशेदपुर व सरायकेला-खरसावां की 30 फीसदी आबादी का सपना
जो जमीन चिह्नित की गयी है उसमें अतिक्रमण का पेज फंसा हुआ है. एक साल पहले मरीन ड्राइव में जगह तय की गयी. बात हुई कि अतिक्रमण हटाकर जमीन हैंडओवर की जायेगी. लेकिन सरकार अतिक्रमण नहीं हटा सकी. इसके चलते मंदिर निर्माण अभी भी जमशेदपुर और सरायकेला- खरसांवा में रहने वाले 30 फीसदी आबादी के लिए सपना बना हुआ है.
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अतिक्रमण क्यों बना सरकार का सिरदर्द
रघुवर सरकार और राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू की पहल पर छह महीने पहले उत्कल एसोसिएसन को डीसी ने सोनारी और बाराबंकी में दो जगह जमीन दिखायी थी जिसमें उड़िया समाज ने मरीन ड्राइव को फाइनल किया. लेकिन जब राज्य सरकार ने सात जून को जमीन की लीज बंदोबस्ती कर श्रीजगन्नाथ स्प्रिचुअल एंड कल्चरल चैरिटेबल सेंटर को सीमांकन के लिए दी तो अतिक्रमणकारियों ने सीमाकन करने से रोक दिया.
कुछ दिनों बाद मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में भी काम शुरू करने की कोशिश की गयी. लेकिन बस्ती के लोगों ने जमीन पर मलिकाना हक जताते हुए हंगामा किया. इस वजह से मजिस्ट्रेट को दलबल के साथ लौटना पड़ा.
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक विवाद नहीं सुलझेगा तब तक यहां मंदिर नहीं बनेगा. राज्य सरकार में मंत्री सरयू रॉय ने भी मामले में शिकायत मिलने पर पहले लोगों को नयी जगह बसाने की पैरवी की है फिर मंदिर बनाने की.
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कैसा होगा मंदिर?
छह एकड़ के प्रांगण में तीन भव्य मंदिरों का निर्माण होना है. इसके अलावा एक लाइब्रेरी, प्रेक्षागृह और अध्यनयन सेंटर व एक बड़ा पार्क भी होगा. पूरा निर्माण पूरी में बने जगन्नथ मंदिर के जैसा होगा.
तीन भव्य मंदिरों में से बीच के मंदिर में जगन्नाथ स्वामी जी की स्थापना होगी. बाकी के दो मंदिरों में भी कई देवी-देवताओं की स्थापना होगी. तीनों मंदिरों को सिर्फ पत्थरों से बनाया जायेगा.
सबसे बड़ी बात ये है कि सरकार चाहती है कि ये मंदिर रांची, बोकारो समेत राज्य के दूसरे शहरों में बने भगवान जगन्नाथ के मंदिरों की तुलना में सबसे बड़ा हो जो पर्यटन के लिहाज से भी एक अच्छा केंद्र बन सके. हर साल रथ यात्रा के समय देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने की योजना है.
क्या कहना है उत्कल एसोसिएशन का
मंदिर के लिए उत्कल एसोसिएशन कई वर्षों से कोशिश में है और मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी भी इसी की है. एशोसिएशन का कहना है की बगैर अतिक्रमण हटाये जमीन हैडओवर नही ले सकते क्योकि किसी का घर उजाड़ कर मंदिर निर्माण नहीं किया जा सकता.
वैसे भी मंदिर निर्माण से पहले विवाद सुलझा लेने से परेशानी नहीं होगी क्योंकि जो नक्शा तैयार किया गया है उस हिसाब से यदि सरकार अभी जमीन हैडओवर करेगी तो भी मंदिर को पूरा होने में कम से कम छह साल लग जायेंगे और कोई रुकावट से ये समय और बढ़ जायेगा.
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