
Ranchi : इन दिनों राजधानी रांची के कई इलाकों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से बदहाल है. शहर की जनता जनता गंदगी के ढेर में रहने को विवश है. इसके पीछे का कारण 33 वार्डों में सफाई काम कर रही कंपनी रांची एमएसडब्ल्यू (रांची नगर निगम और एस्सेल इंफ्रा का ज्वाइंट वेंचर) को बताया जा रहा है. लेकिन देखा जाये, तो सफाई की नारकीय व्यवस्था के लिए निगम भी कम जिम्मेवार नहीं है.
ऐसा इसलिए क्योंकि शहर के कुल 53 वार्डों में से 20 पर निगम सफाई का काम कर रहा है. लेकिन इन सभी वार्डों की स्थिति खराब होने की जानकारी है. खऱाब होती इस स्थिति को देख अब कंपनी को टर्मिनेट करने की बात हो रही है.
इसके लिए निगम ने एक प्रस्ताव नगर विकास विभाग को भेजा भी था. इसके जवाब में विभागीय सचिव अजय कुमार सिंह ने नगर आयुक्त को कहा है कि निगम स्वयं कंपनी को हटाने में सक्षम है. ऐसे में कंपनी को हटाने में दोनों में तालमेल का अभाव है.

टर्मिनेट करने का जिम्मा अब निगम के पाले में
शहर के सफाई कार्य का जिम्मा कंपनी रांची एमएसडब्ल्यू को 2 अक्टूबर 2016 को मिला था. कुछ माह तक कंपनी 33 वार्डों में सफाई कार्य करती रही. लेकिन बाद में कई वार्डों के पार्षदों ने कंपनी के कार्यशैली पर सवाल खड़ा करना शुरू कर दिये. पार्षद लगातार आरोप लगाते रहे कि अपने अधिकार क्षेत्र में कंपनी सफाई कार्य नहीं कर रही है. कंपनी के कार्यशैली से सफाई कर्मचारी भी नाराज है. इसकी प्रमाणिकता ऐसी है कि कंपनी के सात मिनी ट्रांसफर स्टेशन (एमटीएस) के कर्मचारी पिछले दो वर्षों में 18 से अधिक बार हड़ताल पर जा चुके है.
पार्षदों के लगातार दबाव के बाद निगम ने विभाग को एक पत्र लिख कंपनी को टर्मिनेट करने का प्रस्ताव भेजा था. लेकिन अब सचिव ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर कहा कि निगम अपने आप में कंपनी को टर्मिनेट करने में सक्षम है. सूत्रों के मुताबिक जब निगम और कंपनी के बीच सफाई कार्य को लेकर एग्रीमेंट हुआ था. ऐसे में क्यों निगम ने विभाग से मंजूरी लेना जरूरी समझा. कंपनी को हटाने की पूरी प्रक्रिया से साफ है कि विभाग और कंपनी के बीच तालमेल का अभाव है. और उस तालमेल की मार पूरी तरह से शहर की जनता झेल रही है.
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चरमरा गयी है सफाई व्यवस्था, पूरे शहर में गंदगी का अंबार
गत 9 मार्च को कंपनी को टर्मिनेट करने के लिए निगम बोर्ड ने एक प्रस्ताव पास किया था. प्रस्ताव पर नगर विभाग से अनुमति लेनी थी. लेकिन आचार संहिता लगने के कारण यह मामला लटक गया. ऐसे में कंपनी को जब लगा, कि उसे हटाने पर विचार हो रहा है, तो उसने अपने अधिकार वाले 33 वार्डों में सफाई कार्य करना बंद कर दिया. इससे उन 33 वार्डों में सफाई व्यवस्था नारकीय हो गयी. शिकायत आने लगी कि कई घऱों से कूड़े का उठाव नहीं हो रहा है.
इसके बाद निगम ने इन वार्डों में अपने स्तर पर काम करना शुरू किया. लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही. दरअसल अपने अधिकार वाले 20 वार्डों में तो निगम की सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़ा होता रहा है. अचानक अतिरिक्त 33 वार्डों का काम मिलने से निगम की स्वास्थ्य शाखा पर इतना भार हो गया, जिससे निगम के अधीन सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गयी.
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कूड़े के ढेर से पहाड़ बना झिरी, एसटीपी की योजना भी अधर में
अगर निकलने वाले कूड़े की बात करें, तो शहर के करीब 1.88 लाख घऱों से प्रतिदिन 650 टन कूड़ा निकलता है. इन सभी कूड़ों को रिंग रोड स्थित झिरी डंपिग यार्ड में डंप किया जाता है. हालांकि वहां पर कंपनी द्वारा सॉलिड बेस्ट मैनेजमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाने की बात हुई थी. प्लांट लगने के लिए झिरी में जमीन को भी चिंह्ति किया गया था. लेकिन जिस तरह से कंपनी को टर्मिनेट करने का प्रस्ताव पास हुआ है, उससे प्लांट लगने की योजना पूरी तरह से अधर में लटक गयी है.
लगातार गिरते कूड़े और इसके निपटारे की कोई सही व्यवस्था नहीं होने से झिरी में कूड़े का पहाड़ बन गया है. आसपास के लोग यहां नारकीय जीवन जीने को विवश हैं. गिरते कूड़े के कारण मच्छरों का प्रभाव इतना है कि यहां के कई घरों में लोग दिन हो या रात, दरवाजे पर मच्छरदानी लगाकर रहते है.
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वैकल्पिक व्यवस्था बनाने पर हो रहा विचार
कंपनी को टर्मिनेट करने का अधिकार निगम के पाले में आने से कंपनी का सफाई कार्य से बाहर जाना तय माना जा रहा है. हालांकि इसके पहले निगम को एक वैकल्पिक व्यवस्था बनाने का निर्देश सचिव ने नगर आयुक्त को दिया है. लेकिन 53 वार्डों में सफाई कार्य लेने के साथ ही निगम के समक्ष भी चुनौती भी कम नहीं है. कंपनी के कार्य नहीं करने के दौरान सफाई व्यवस्था पर जैसी स्थिति वर्तमान में बनी है, उससे भी निगम के समक्ष चुनौतियां कम नहीं दिखती है.




