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30 करोड़ रुपये बर्बाद करने के लिए निगम और विभाग ने अपनाये तरह-तरह के हथकंडे

Ranchi : झारखंड में सरकारी योजनाओं के नाम पर पैसे की बर्बादी देखनी हो, तो झारखंड के कामकाज की समीक्षा कीजिये. सरकार ने कई ऐसी योजनाएं बनायी, जिनकी ना तो जरुरत और ना ही इस्तेमाल का आकलन किया गया. यह तक नहीं देखा गया कि जो योजनाएं बन रही है, उससे लोगों को फायदा मिलेगा भी या नहीं. योजनाएं बनायी जाती है, उस पर करोड़ों रुपये खर्च कर भवन बनाया जाता है. फिर उस भवन को लावारिश छोड़ दिया जाता है.

नगर विकास विभाग और रांची नगर निगम 30 करोड़ की सरकारी राशि को बर्बाद करने के लिए तरह-तरह के हथकंड़े अपना चुका है. इसमें निगम द्वारा 18 करोड़ रूपये की राशि से बने स्लॉटर हाउस और विभाग द्वारा बनाए गये बिरसा मुंडा पार्क और अर्बन हाट पर करोड़ों रूपये खर्च की गयी राशि शामिल है.

जहां बिरसा मुंडा पार्क में 7 करोड़ की लागत से बने कई संरचना में बदलाव कर नये सिरे से कार्य हो रहा है. वहीं अर्बन हाट में 5 करोड़ खर्च कर बदलाव की सिफारिश कर दी गयी है.  कांके में बनाये गये आधुनिक स्लॉटर हाउस पिछले एक साल से बंद पड़ा है.

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बिरसा मुंडा पार्क में 7 करोड़ फूंका, अब हो रहा 26.75 करोड़ का काम

सबसे पहले बात राजधानी रांची स्थित पुराने जेल में प्रस्तावित भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क के निर्माण लागत की. इस पार्क का शिलान्यास 15 नवंबर 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया था. पार्क निर्माण कार्य का जिम्मा वन विभाग को सौंपा गया था.

विभाग ने 7 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर यहां प्रवेश द्वारा, पार्क के अंदर तिकोनी घड़ी, चिल्ड्रेन पार्क, बागवानी,  चहारदीवारी, डांस फ्लोर, पुल, बच्चों के खेलने के लिए झूले व रेन डांस की सुविधा के साथ आकर्षक ओपेन स्पेस, लाइट्स व ओपेन थियेटर की व्यवस्था की थी.

जब राज्य में नये मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सत्ता संभाली, तो पार्क में बने उक्त सभी कार्य का निरीक्षण बंद हो गया. इससे पार्क के अंदर की गयी सारी व्यवस्था बेकार होने लगी.

बीते साल 11 अक्टूबर को सीएम ने पार्क निर्माण का नये सिरे से शिलान्यास कर दिया. इससे पुराने पार्क में  7 करोड़ की लागत से जो निर्माण किया गया था, वो बर्बाद हो गये.

वर्तमान में पुराने बिरसा मुंडा जेल परिसर को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने का काम तेजी से चालू है. इसके लिए करीब 26.75 करोड़ रूपये ( 25 करोड़ केंद्रीय मद से और 1.75 करोड़) खर्च किये जाने हैं. 15 नवंबर तक बिरसा मुंडा संग्रहालय और स्मृति पार्क बनाने का डेडलाइन तय है.

अर्बन हाट में 5 करोड़ खर्च, अब 30 करोड़ का नया डीपीआर

कांके रोड स्थित रॉक गॉर्डेन के पीछे बने अर्बन हाट में करीब 5 करोड़ रूपये खर्च करके कई संरचनात्मक कार्य किये गये हैं. लेकिन अब इसमें भी बदलाव की तैयारी की जाने वाली है. नगर विकास विभाग ने इसमें भी बदलाव का निर्णय ले लिया है.

अब इस परिसर में स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाया जाएगा. इसके लिए कंसल्टेंट को डीपीआर बनाने का निर्देश दिया गया है. इस सेंटर को बनाने में करीब 30 करोड़ रूपये खर्च किये जाएंगे. यानि 5 करोड़ राशि खर्च करने के बाद अब 30 करोड़ के सेंटर के लिए नया डीपीआर बनाया जा रहा है.

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18 करोड़ का बना स्लॉटर हाउस पड़ा है बंद

शहर को स्वच्छ बनाने और लोगों को हाइजेनिक मीट खिलाने के लिए निगम ने 18 करोड़ की लागत से राज्य का पहला आधुनिक स्लॉटर हाउस कांके में करीब 5 एकड़ क्षेत्र में खोला था. बीते वर्ष 6 मई को इसका शिलान्यास भी किया गया.

लेकिन शुरू होने के साथ ही ये स्लॉटर हाउस अपनी बदहाली का रोना रोने लगा. एक साल बीतने के बाद भी यह बंद पड़ा है. भले ही राजधानी के मीट कारोबारियों ने इसके बनने से अपने व्यवसाय पर प्रभाव पड़ने की बात कहकर हाईकोर्ट चले गये.

लेकिन देखा जाए, तो निगम की उदासीनता और जागरूकता की कमी की वजह से अब यह बेहाली की कगार पर है. वही आधुनिक स्लॉटर हाउस के साथ शुरू हुए 5 मॉडर्न मीट शॉप पर भी इस बेहाली का असर दिख रहा है. निगम के कई कर्मचारी भी स्लॉटर हाउस की स्थिति पर काफी नाराजगी जताते रहे हैं.

इनका कहना है कि इसके बनने के पहले ही निगम को इसमें आने वाली तमाम मुश्किलों का निपटारा कर लेना चाहिए था. लेकिन ऐसा नहीं करके इसका निर्माण करने से 18 करोड़ की सरकारी राशि पूरी तरह से बेकार हो गयी है.

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