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कट ऑफ डेट फिक्स नहीं होने से 9000 कांट्रैक्ट कर्मियों की जा सकती है नौकरी

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  • जिला सचिवालय में लगभग 10 हजार कांट्रैक्ट कर्मी हैं
  • सरकार ने कांट्रैक्ट कर्मियों से लिया 10 साल काम, बाहर का रास्ता दिखाने के लिए सेक्शन पोस्ट का हवाला
  • 10 साल के मापदंड के लिए सरकार ने अब तक नहीं किया है कट ऑफ डेट का निर्धारण

Ranchi: राज्य सरकार एक ओर रोजगार देने का दावा कर रही है. वहीं दूसरी ओर लगभग 9000 कांट्रेक्ट कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है. राज्यभर में राज्य व जिला सचिवालय में लगभग 10 हजार कांट्रैक्ट  कर्मी कार्यरत हैं. इनमें से दिसंबर में कई को टर्मिनेशन लेटर भी थमाया जा चुका है. दिलचस्प यह है कि राज्य सरकार ने अब तक 10 साल या 10 साल से अधिक समय से काम करने वाले कांट्रैक्ट कर्मियों के स्थायीकरण के लिए अब तक कट ऑफ डेट का निर्धारण नहीं किया है. सवाल यह भी खड़ा हो गया है कि बिना स्वीकृत पद के कांट्रैक्ट कर्मियों से 10 साल कैसे काम लिया गया.

क्या है मामला

उमा देवी बनाम कर्नाटक सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि जो भी स्वीकृत पद पर 10 साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं, उन्हें स्थायी किया जाये और कांट्रैक्ट प्रथा खत्म कर नियमित नियुक्ति की जाये. इस आदेश के आलोक में झारखंड सरकार ने 2009 में 25 कांट्रैक्ट कर्मियों को स्थायी किया था. इसके बाद भी कट ऑफ डेट पर पेंच फंसा रहा.

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ऐसे फंसा है नियमावली का पेंच

वर्ष 2015 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में राज्य सरकार ने नियमावली गठित की. इसमें कट ऑफ डेट 2006 रखा गया. इस पर भी सवाल खड़े हो गये कि झारखंड का निर्माण 2000 में हुआ था तो 2006 कट ऑफ डेट कैसे हो सकता है? फिर सुप्रीम कोर्ट ने कहा चूंकि झारखंड नया राज्य है, इसलिए कट ऑफ डेट का निर्धारण होना चाहिये.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार हुई रेस

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार रेस हुई. कार्मिक ने राय दी कि चूंकि नोटिफिकेशन वर्ष 2015 में जारी हुआ था. तो कट ऑफ डेट 13 फरवरी 2015 को माना जा सकता है. इसके बाद विधि विभाग ने मंतव्य दिया कि जिस दिन अधिसूचना जारी होगी, उस दिन को कट ऑफ डेट माना जायेगा. अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कांट्रैक्ट कर्मियों के स्थायीकरण के लिए कट ऑफ डेट क्या होगा?

कांट्रैक्ट कर्मी कैसे किये जायेंगे बाहर

राज्य सरकार ने कांट्रैक्ट कर्मियों के स्थायीकरण के लिए विभाग स्तर पर कमिटी बनायी. जिसमें स्थायीकरण के लिए तीन निर्णय लिये गये. जिसमें कहा गया कि स्थायीकरण के लिए स्वीकृत पद होना जरूरी है. रोस्टर क्लीयर होना चाहिये और सक्षम प्राधिकार के द्वारा नियुक्त होना चाहिये. इसमें खास बात यह है कि सरकार ने 10 साल काम लेने के बाद भी इन चीजों पर ध्यान नहीं दिया. लगभग 9000 कांट्रैक्ट कर्मी बिना स्वीकृत पद के ही 10 साल से अधिक सेवा दे चुके हैं. यहीं पेंच फंसा हुआ है. इधर सरकार 2011-12 से जैप आइटी के जरिये मैन पावर उपलब्ध करा रही है.

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