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NTPC पर अवैध खनन करने पर 81 करोड़ जुर्माना की अनुशंसा

Ranchi: एनटीपीसी पर अवैध खनन मामले में जुर्माना लगाने की अनुशंसा की गयी है. अनुशंसा समेकित क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से की गयी है. पिछले दिनों केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने मामले में जांच किया था. जिसके बाद जुर्माना लगाने की अनुशंसा की गयी है. अनुशंसा करते हुए बताया गया है कि एनटीपीसी ने 400 एकड़ जमीन में अवैध खनन किया है. जो लगभग 156 हेक्टेयर जमीन है. ऐसे में एनटीपीसी पर 81 करोड़ 82 लाख रूपये से अधिक राशि का जुर्माना लगाने की अनुशंसा की गयी है. इस मामले के शिकायतकर्ता मंटू सोनी है. जिनकी ओर से बिहार हाईकोर्ट के अधिवक्ता नवेंदु कुमार पक्षकार है. जानकारी हो कि पिछले साल नवेंदु कुमार की नोटिस पर रांची कार्यालय ने रिपोर्ट केंद्र को भेजी थी. जिसके बाद मामले में अनुशंसा की गयी है.

अवैध खनन प्रश्रय से जुड़ा मामला: मामला केंद्रीय उपक्रमों के द्वारा अवैध खनन को प्रश्रय देने से जुड़ा है. इसे राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की नजर से देखा जा रहा है. जानकारी हो कि इसके पहले भी कई केंद्रीय कंपनियो ंपर जुर्माना लगाया गया है. अगर एनटीपीसी पर ये जुर्माना लगाया जाता है तो ये अब तक की सबसे बड़ी जुर्माना राशि होगी, जो किसी केद्रीय उपक्रम पर लगायी गयी है.

400 एकड़ से अधिक क्षेत्र पर अवैध खनन

रिपोर्ट के अनुसार, एनटीपीसी ने निर्धारित क्षेत्रफल से 400 एकड़ अधिक क्षेत्र में अवैध खनन कर चुकी है. इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय उपक्रम एनटीपीसी के ऊपर 81 करोड़ 89 लाख 82 हजार रुपये के जुर्माने का अनुशंसा की गयी है. रिपोर्ट की मानें तो एनटीपीसी ने लीज एरिया से बढ़कर अवैध खनन किया है. इसके पहले भी मार्च 2022 में हजारीबाग के दुमुहानी नाला को नष्ट करने और लगभग 100 एकड़ भूखंड पर अवैध खनन के आरोप में 23 करोड़ रुपये जुर्माना लगाने की अनुशंसा की गयी थी.

अवैध परिवहन को बढ़ावा देने का भी आरोप

एनटीपीसी पर एक अन्य आरोप भी है. जिसके तहत कंवेयर बेल्ट बनने के बाद सड़क मार्ग से अवैध परिवहन को बढ़ावा देने की बात कही गयी है. जो कि निर्धारित शर्तों का उल्लंघन है. स्थानीय वन विभाग के ऊपर इस अवैध परिवहन को रोकने की जिम्मेदारी है. लेकिन इसे रोकने में विभाग असफल दिख रहा है. कंवेयर बेल्ट बने जाने के बाद कोयले का परिवहन सड़क मार्ग से नहीं करने की शर्त पूर्व से ही निर्धारित थी और इसका अनुपालन नहीं होने से आसपास के क्षेत्रों में कोयले के कण वायुमंडल में घुल मिलकर आम जनजीवन के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं.

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