Opinion

कोरोना इफैक्ट इन इंग्लैंड

Madhu Chaurasia

 

 

 

जहां कोरोना से पूरी दुनिया जंग लड़ रही है, वहीं कुछ देशों में हालात धीरे-धीरे सुधर रहे हैं. इंग्लैंड में भी ताज़ा हालत की बात कि जाये तो पहले से बेहतर हुए हैं. 22 मार्च से वहां भी लॉकडाउन की स्थिति है और वहां पीडितों और मृतकों का ग्राफ भी काफी ज्यादा रहा है. लेकिन ज्यादातर मामले मार्च से अप्रैल में दर्ज किए गए. जबकि मई के अंत में इसके ग्राफ में कमी दर्ज की गई और जून की शुरूआत में यह और भी नीचे की ओर गई हैं. अप्रैल में यहां सबसे ज्यादा आंकड़ा रिकॉर्ड किया गया. मृतकों की बात की जाये तो अब तक यहां 40 हजार 261 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि अब भी 2 लाख 83 हजार तीन सौ ग्यारह कोरोना पीड़ित हैं.

इंग्लैंड में 1 जून से आम जनता के लिए स्कूल खोल दिए गए हैं. इससे पहले स्कूल में केवल की-वर्कर्स के बच्चों को ही आने की अनुमति थी. वहां अभी केवल दो कक्षा के बच्चों को आने की अनुमति है. हर कक्षा को दो भागों में बांट दिया गया है, एक सुबह और दूसरा शाम का ग्रुप. हालांकि यह अभिभावकों पर छोड़ दिया गया है कि वो अपने बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं या नहीं. स्कूल खुलने के बाद कुछ स्कूलों में शिक्षक और कुछ छात्र कोरोना पॉजिटिव पाए गए जिसके बाद उन कक्षाओं को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. स्कूलों में बच्चों का ख़ास ख्याल रखा जा रहा है. उन्हें बार-बार हैंडवॉश और दो मीटर की दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही हैं. हालांकि ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने की बजाये उन्हें घर पर रखना बेहतर मान रहे हैं. स्कूल से समय-समय पर गृहकार्य मिल रहे हैं और बच्चें उन्हें घर पर रहकर कर रहे हैं.

वहां धीरे-धीरे शॉपिंग कॉम्पलैक्स और बाकी चीजें खोलने की योजनाएं बनाई जा रही है लेकिन इसके साथ ही कुछ नियमों का हर किसी को खास ख्याल रखने की हिदायत दी जा रही हैं. वहां शुरू से किराना दुकानें और मेडिकल स्टोर खुले रहे हैं लेकिन लोगों को दो मीटर का डिस्टेंस हमेशा मेंटेन रखने की सलाह दी जाती रही हैं. पहले लोगों को बाहर निकलने की सख्त मनाही थी, लेकिन अब लोग घरों से बाहर निकल सकते हैं और एक साथ 6 अलग-अलग परिवारों के सदस्य एक दूसरे से गार्डन या किसी खुले स्थान पर मिल सकते हैं, लेकिन उन्हें हमेशा दूरी का ख्याल रखना होगा. हालांकि लोग अब भी एक-दूसरे से मिलने से कतरा रहे हैं और केवल परिवारिक लोगों से मिल रहे हैं.

इंग्लैंड में लगभग 8 से 9 महीने सर्दी रहती हैं और केवल 3 से 4 महीने ही लोगों को सूरज की रौशनी मिलती है. ऐसे में लोग ज्यादातर डिप्रेशन का शिकार होते हैं. इस वक्त वहां गर्मी का मौसम है ऐसे में लोग धूप का आनंद लेने बाहर निकल रहे हैं. लोग गार्डनिग कर समय बिता रहे हैं.

भारत की तरह इंग्लैंड में लॉकडाउन को किसी फेज़ में नहीं बांटा गया है. वहां आम जनता सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को कड़ाई से पालन करती हैं. यहां सैनिक द्वारा बल प्रयोग भी नहीं किए जाते बल्कि जनता अपनी हिफ़ाज़त के लिए स्वयं पहल करती हैं. वहां भी स्कूल-कॉलेज, ज्यादातर ऑफ़िस, रेस्टोरेंट, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स सब बंद हैं. हालांकि ट्रांसपोर्ट के साधन खुले हैं लेकिन हवाई यातायात मूल रूप से बंद हैं. केवल ब्रिटिश नागरिक, जो दूसरे देशों में फंसे हैं, उन्हें निकालने का काम अब भी जारी है और दूसरे देशों के नागरिक जो इंग्लैंड में फंसे हैं, उन्हें अपने वतन लौटने की अनुमति दी जा रही है.

इंग्लैंड में हज़ारों की तादाद में भारतीय छात्र फंसे थे, जो वक्त रहते भारत नहीं जा पाए थे, उन्हें भारत सरकार द्वारा जारी वंदे मातरम योजना के तहत अलग-अलग फेज़ में भारत लाया जा रहा है. हजारों की तादाद में भारतीय उच्चायोग लंदन में भारतीयों ने आवेदन किया है, जिन्हें प्रायोरिटी बेसिस पर भारत लाया जा रहा है. वहां कई ऐसे छात्र फंसे हैं, जिन्हें खाने और रहने के लिए भी जद्दोज़हद करनी पड़ रही हैं. कई छात्र पार्ट टाइम जॉब कर अपना गुज़ारा कर रहे थे, अब बंद की वजह से उन्हें काम नहीं मिल रहा. ऐसे में कुछ सामाजिक संस्थान उनके खाने और रहने जैसी बुनियादी सुविधाओं में उनकी मदद के लिए आगे आ रहे हैं.

Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: