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नियुक्ति वर्ष में नियुक्ति पत्र के इंतजार में हैं 626 शिक्षक, राजनीतिक लड़ाई में युवाओं को न बनायें मोहराः रघुवर

Ranchi : पूर्व सीएम रघुवर दास ने नियुक्ति वर्ष में नियुक्ति प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं किये जाने पर सवाल उठाया है. सीएम हेमंत सोरेन को उन्होंने इस संबंध में बुधवार को एक पत्र भी लिखा. कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में स्थानीय नौजवानों को नौकरी में प्राथमिकता देने के उद्देश्य से पहल की.

हाई स्कूल टीचर के 17,572 पदों पर (विज्ञापन संख्या 21/2016) रिक्तियां निकालीं. 2018 में परीक्षाफल आया. 2019 में नियुक्तियां शुरू हुईं. उनकी सरकार के कार्यकाल में लगभग 90 फीसदी पदों पर बहाली हो गयी.

केवल इतिहास और नागरिकशास्त्र विषय के 626 सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जानी थी. इनकी नियुक्ति की अनुशंसा भी हो गयी है. केवल नियुक्ति पत्र दिया जाना है. राज्य सरकार ने इस साल को नियुक्ति वर्ष कहा है. ऐसे में नियुक्ति वर्ष में भी इन 626 शिक्षकों का बेरोजगार दिखना दुखद है.

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कोर्ट का आदेश भी दरकिनार

रघुवर दास के मुताबिक 626 शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में शिक्षा विभाग ने 18 फरवरी 2021 को रोक लगा दी. इससे पूर्व 11 गैर अनुसूचित जिलों में से देवघर में नियुक्ति की जा चुकी है. अपनी नियुक्तियों के लिए ये सफल अभ्यर्थी उच्च न्यायालय की शरण में गये. कोर्ट ने 11 फरवरी, 2021 को शिक्षा विभाग को छह सप्ताह में नियुक्ति देने का आदेश दिया था. उस समय सोनी कुमारी वाले मामले की आड़ में शिक्षा विभाग ने 18 फरवरी को इनकी नियुक्ति पर कार्मिक विभाग को पत्र लिख कर रोक लगवा दी.

राज्य सरकार के गलत फैसले के कारण हाई स्कूल में नौकरी पाये झारखंडवासियों की नौकरी पर संकट आ गया. इसके खिलाफ सोनी कुमारी व अन्य अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट तक गये. 9 जुलाई 2021 को उसने 13 अनुसूचित जिले व 11 गैर अनुसूचित जिलों में हुई बहाली को सही ठहराया. इसके बाद इतिहास व नागरिकशास्त्र के सफल अभ्यार्थियों के साथ बाकी नियुक्तियों का भी रास्ता साफ हो गया पर अब भी सरकार इन्हें नियुक्ति पत्र देने में आनाकानी कर रही है.

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नियुक्ति नियमावली का अब तक पता नहीं

वर्ष 2021 को नियुक्ति वर्ष घोषित किया गया है. आधे से ज्यादा साल बीत गया. अभी तक सरकार नयी नियमावली नहीं बना पायी है. सरकार के मुताबिक एक माह में नियमावली में सुधार का दावा भी अब पूरा होता नहीं दिख रहा है.

इसी प्रकार पंचायत सचिव, सहायक पुलिस, पारा शिक्षक आदि हर कोई आंदोलन करने को मजबूर हैं. पारा शिक्षकों के मामले में तो नियमावली, वेतनमान, कल्याण कोष के गठन समेत अन्य चीजों का उनकी सरकार ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया था. अब उसे केवल कैबिनेट में लाकर पारित करने की जरूरत है.

बड़े-बड़े वादे कर यह सरकार सत्ता में तो आ गयी पर अब सरकार युवाओं को छलने का काम कर रही है. पांच लाख सालाना रोजगार देने के वादे से आयी सरकार लोगों को नये रोजगार तो दे नहीं पा रही है, बल्कि जिन्हें रोजगार मिला हुआ है, उनसे रोजगार छीन रही है.

सरकार की लड़ाई भाजपा से हो सकती है पर इन युवाओं के साथ राजनीति नहीं होनी चाहिए. युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद हो.

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