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राजधानी की 5 एकड़ 26 डिसमिल आदिवासी जमीन को बना दिया गया सीएनटी फ्री लैंड

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-अवर निबंधक के फर्जी हस्ताक्षर कर बनाये गये दस्तावेज, जांच में कई गड़बड़ियां हुईं उजागर

Ranchi : राज्य में आदिवासियों की जमीन को गैर आदिवासी जमीन बनाने का खेल चल रहा है. खासकर राजधानी रांची में यह खेल जोरों पर चल रहा है. ऐसा ही एक ताजातरीन मामला सामने आया है. रांची के हेहल अंचल के मौजा बाजरा की 5 एकड़ 26 डिसमिल आदिवासी जमीन को उसके दस्तावेजों में फर्जी ढंग से आदिवासी रैयतों से इस्तीफा दिलाया हुआ दिखाकर गैर आदिवासी जमीन बना दिया गया. हेहल में अधिकांश जमीन के रैयत आदिवासी समुदाय से हॉं. सीएनटी एक्ट के प्रावाधन से बचाने के लिए गैर आदिवासी को जमीन बिक्री करने के मकसद से वर्ष 1945 के दस्तावेजों में छेड़छाड़ भी की गयी है. आदिवासी जमीन को गैर आदिवासी बनाने के इस खेल का खुलासा 1945 के उन दस्तावेजों (निबंधित इस्तीफानामा और कबूलियत बंदोबस्ती) की जांच रिपोर्ट में हुआ है. इसे भी पढ़ें- बेतला टाइगर रिजर्व में 398 गांवों का जबरन किया जा रहा है विस्थापन : फैक्ट फाइंडिंग टीम

क्या है मामला

उक्त जमीन से संबंधित वर्ष 1945 के दोनों दस्तावेजों (निबंधित इस्तीफानामा और कबूलियत बंदोबस्ती) की जांच जिला अवर निबंधक, रांची के कार्यालय में जांच दल द्वारा की गयी. इसमें कई चौंकानेवाले तथ्य सामने आये. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि हेहल अंचल के मौजा बाजरा की खाता संख्या 87, प्लॉट नंबर- 263, 265 आदि कुल रकबा 5 एकड़ 26 डिसमिल जमीन का नामांतरण मुकदमा संख्या 1235 आर 27/2016-17 द्वारा पुंदाग निवासी संजय साहू को 6 मई 2017 को कर दिया गया. जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस जमीन को गैर आदिवासी जमीन बनाने के लिए फर्जी तरीके से दस्तावेज (निबंधित इस्तीफानामा और कबूलियत बंदोबस्ती) बनाये गये, जिसमें दिखाया गया है कि उक्त जमीन को उसके खतियानी रैयतों द्वारा तत्कालीन जमींदार को इस्तीफा दिया गया. इसके बाद जमीन को सीएनटी एक्ट के बाहर कर गैर आदिवासीयों के नाम हस्तांतरित किया गया. इसे भी पढ़ें- राजधानी में गैर आदिवासियों ने हथिया ली आदिवासियों की जमीन,  2261 मामले हैं लंबित

हस्तांतरण में अपनाये गये कई हथकंडे

आदिवासी जमीन को गैर आदिवासियों के नाम हस्तांतरित करने के लिए कई हथकंडे अपनाये जा रहे हैं. इसमें जमीन संबंधी मूल दस्तावेज को दलालों द्वारा फेरबदल कर जमीन बिक्री की जा रही है. वहीं, दस्तावेज की जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि उक्त दस्तावेजों में अवर निबंधक के हस्ताक्षर भी फर्जी हैं. आदिवासी की जमीन को सीएनटी फ्री करने के लिए मूल दस्तावेज के इंडेक्स एक और इंडेक्स दो के पन्ने को भी बदल दिया गया है. मूल दस्तावेज के पन्ने हल्के हरे रंग के हैं, जबकि हल्के पीले रंग के पन्ने पर फर्जी दस्तावेज तैयार किये गये हैं. आदिवासी जमीन को गैर आदिवासी जमीन बनाने की शिकायत के बाद प्रमंडलीय आयुक्त (दक्षिणी छोटानागपुर) द्वारा इस पूरे मामले की जांच करायी गयी है. जांच में कई गड़बड़ियां समाने आ चुकी हैं, जिस पर कार्रवाई करने के लिए झारखंड सरकार के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को लिखा जा चुका है. न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.आप हमेंफ़ेसबुकऔर ट्विटरपेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

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