
Akshay Kumar Jha
Ranchi/Bermo : जनता चुनाव के वक्त अपना प्यार वोट के रूप में देती है. बदले में जनप्रतिनिधियों से विकास चाहती है. अगर इस समीकरण में तालमेल गड़बड़ाता है, तो इसका जवाब जनता चुनाव के वक्त मांगती है. बात हो रही है गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र की. वर्तमान सांसद को जनता ने एक नहीं, पांच बार यहां से सांसद चुना है, लेकिन इस बार राजनीति की हवा उल्टी बहने के पूरे आसार हैं. क्योंकि, जिनके वोट से सांसद रविंद्र पांडे जीत का परचम लहराते थे, उन्हें सांसद महोदय ने इस बार कई मायनों में निराश किया है. गौर से देखें, तो जनता के किसी मामले पर किसी तरह का कोई आंदोलन या पहल सांसद की तरफ से नहीं हुआ. हां, संसद में रविंद्र पांडे ने कुछ मामलों को लेकर सवाल जरूर किये, लेकिन इन सवालों से भी जनता का किसी तरह से कोई फायदा नहीं हुआ. यहां तक कि इस बार कार्यकर्ता भी सांसद से खुश नहीं हैं. बीजेपी के ही कई बड़े नेताओं को इस बात की भनक है. लिहाजा, कई नेताओं की इस सीट पर नजर है. बाजी कौन मारता है, यह वक्त आने पर पता चलेगा. बीते पांच साल में यहां चार बड़े कोल प्रोजेक्ट बंद हो गये.
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उद्योग-धंधों पर लग गये ताले
गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र की बात करें, तो सांसद रविंद्र पांडे को ग्रामीण क्षेत्र से ज्यादा शहरी क्षेत्र से वोट मिलता है. गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र के शहरी क्षेत्रों में काफी संख्या में उद्योग-धंधे हैं. इन उद्योगों में काम करनेवाले कामगार उनके वोट बैंक हैं. लेकिन, बीते साल में उद्योग-धंधों में जिस तरह से ताले लगे हैं, वह चिंता का विषय है. बेरमो क्षेत्र के कल्याणी-ढोरी का सीएचपी प्लांट बंद हो गया. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस प्लांट से जुड़े लोगों के पास रोजगार का संकट आया. पास की कथारा कोलियरी के स्वांग और जारंडीह की अंडर ग्राउंड माइंस बंद हो गयीं. लिहाजा, सीसीएल ने इनमें कइयों का तबादला दूसरी कोलियरी में कर दिया. इन खदानों से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोगों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया. तबादला हो जाने की वजह से वोटरों की संख्या में भी कमी आयी. बेरमो सांसद रविंद्र पांडे का निवास स्थान है, यहां भी बीएसआई इनक्लाई बंद हो गयी. जितने भी वाशरी बेरमो इलाके में चल रहे हैं, सभी की हालत नाजुक है. सीसीएल कभी भी इनमें से कुछ को बंद कर सकती है. ऐसा हुआ, तो कोयले के लिए जाना जानेवाला बेरमो गरीबी और बेरोजगारी के लिए जाना जायेगा. ऐसे में सांसद रविंद्र पांडे पर सवाल उठना लाजिमी है कि उनके रहते आखिर क्यों यहां के उद्योग-धंधों पर ताले लग रहे हैं.
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सांसद नहीं खुलवा सके डीसी लाइन
रेलवे ने चंद्रपुरा-धनबाद रेल लाइन को बंद कर दिया. इस रूट से झारखंड से बिहार जानेवाली कई ट्रेनों का रूट बदल गया. रोजाना चंद्रपुरा से धनबाद जानेवाले लोगों को काफी परेशानी होने लगी. सांसद ने यहां के लोगों से वादा किया था कि इस रूट को किसी भी हालत में वह दोबारा से खुलवा देंगे. मामले को लेकर उन्होंने केंद्र के कुछ मंत्रियों के साथ मुलाकात की. हर मुलाकात की बात मीडिया में प्रमुखता से छपी. संसद में रविंद्र पांडे ने अपनी बात रखी, लेकिन अपने वादे को वह पूरा नहीं कर सके. डीसी लाइन अब भी बंद है और यह बात पूरी तरह से अब पक्की हो चुकी है, रूट दोबार शायद ही खुले.
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