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बेतला टाइगर रिजर्व में 398 गांवों का जबरन किया जा रहा है विस्थापन : फैक्ट फाइंडिंग टीम

फैक्ट फाइंडिंग टीम की जांच में पाए गए तथ्य

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Latehar: शनिवार 18 अगस्त को बेतला टाईगर रिजर्व में प्रशासन और सरकार द्वारा 398 गांवों को जबरन विस्थापन करने की खबरों की जांच करने स्थानीय सामाजिक कार्यकताओं के समेत डब्लूएसएस और सीडीआरओ की 10 सदस्य की फैक्ट फाइंडिंग टीम विजयपुर गांव, रुध पंचायत, गारु ब्लाक, लातेहार जिला में जांच के लिए गए. टीम विजयपुर, पांडरा, गुटवा और गोपकर गांव के लोगों से मिली.

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इको विकास समीति को सहमति देने का अधिकार नहीं

21 फरवरी, 2018 को वन, पर्यावरण और जलवायू परिवर्तन मंत्रालय द्वारा एक गेजेट निकाला गया जिसमें बेतला टाईगर रिजर्व का कोर एरिया बढ़ा कर इसमें 398 गांवों को शामिल किया गया है. वन प्रमण्डल पदाधिकारियों ने इन गावों के इको डेवेलपमेंट कमिटि को 27 अप्रैल 2018 को एक नोटिस जारी किया कि वे इन गांवों के विस्थापन के लिए सहमति दे दें. इको विकास समीति में वन विभाग के लोग भी होते हैं, जिसके कारण विजयपुर की ग्राम सभा में यह तय किया गया कि इको विकास समीति को सहमति देने का कोई अधिकार नहीं है.

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ग्राम सभा को ही सहमति देने या नहीं देने का है अधिकार

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वन अधिकार कानून के अर्तगत ग्राम सभा को ही सहमति देने या नहीं देने का अधिकार है. कई गांवों ने विस्थापन के लिए सहमति देने से इंकार कर दिया है. 80 गांव वालों पर वन विभाग द्वारा वन उपज जमा करने के लिए फर्जी मामले डाले जा रहे है. वन अधिकार कानून के अंर्तगत ग्राम सभा को वन उपज के उपर मालिकाना हक है.  बैठक में उपस्थित 4 गांव वालों पर विस्थापन के लिए सहमति देने के लिए प्रशासन द्वारा काफी दबाव बनाया गया है. बेतला टाइगर रिजर्व में सभी 398 गांवों के जबरन पुनः स्थापन करने की प्रशासन की नीति और उनकी प्रशासनिक कोशिशों को रोका जाए. उसने वन अधिकारों को चिन्हित किया. उनके खिलाफ हुए वन कानून के उल्लंघन के फर्जी मामले वापस लिए जाएं. साथ ही पांचवीं अनुसूची के इलाकों में हो रहे जबरन विस्थापन तथा भूमि अधिग्रहण को रोका जाय. वन अधिकार कानून, पेसा, छोटा नागपुर टेनेनसी एक्ट और आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा करने वाले कानूनों को लागू किया जाए.

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