
Ranchi : हीमोफीलिया सोसाइटी रांची चैप्टर के द्वारा रिम्स में संचालित हीमोफीलिया ट्रीटमेंट सेंटर (एचटीसी) ने चार साल पूरे कर लिये हैं. चार साल के इस सफर में कई उतार-चढ़ाव भी आये, लेकिन इसके केयर टेकर हीमोफीलिया सोसायटी के सेक्रेटरी संतोष कुमार जायसवाल और वीमेन विंग की मुक्ता जायसवाल ने मरीजों को हर संभव मदद करने का प्रयास जारी रखा. यही वजह है कि आज चार सालों में 650 हीमोफीलिया के मरीज सेंटर में इलाज के लिए पहुंच चुके हैं. वहीं मरीजों को 4000 बार इनफ्यूजन लगाया जा चुका है.
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सेक्रेटरी संतोष कुमार जायसवाल ने कहा कि हमारा फोकस है कि मरीजों को जल्द से जल्द फैक्टर मिल जाये. वहीं राज्य के अन्य जिलों में चल रहे सेंटर में भी मरीजों को कोई परेशानी न हो इसका भी ध्यान रखा जा रहा है. वहीं एचटीसी के प्रोजेक्ट इंचार्ज डॉ गोविंद जी सहाय की मानें तो हीमोफीलिया के मरीजों के लिए फैक्टर जितना जरूरी है, उतना ही फीजियोथेरेपी भी. इसलिए मरीजों के लिए फीजियोथेरेपी ट्रीटमेंट की भी व्यवस्था की गयी है. एक्सपर्ट्स की मदद से मरीजों को इसका भी फायदा मिल रहा है.
फैक्टर जरूरी, लेकिन अधिकारी लापरवाह
हीमोफीलिया के मरीजों को इंटरनल ब्लीडिंग होती है. जिसे रोकने के लिए तत्काल उन्हें फैक्टर लगाया जाता है. अगर समय पर मरीज को फैक्टर न मिले तो इंटरनल ब्लीडिंग से मरीज की मौत भी हो जाती है. सेक्रेटरी ने बताया कि एचटीसी के चार साल पूरे हो गये और फैक्टर के लिए सरकार फंड दे रही है. लेकिन कुछ अधिकारी इसे लेकर गंभीर नहीं हैं. फिलहाल सभी सेंटर पर फैक्टर हैं लेकिन इनवीटर की दवा उपलब्ध नहीं है. मौके पर डॉ स्वाति, डॉ डी मुंडा, डॉ नैना, राहुल कुमार, संजय कुमार, आयुष्मान अग्रवाल, गोपी हेंब्रम, हरि ओम, महिला समूह की नीलू बाखला, खुशबू, जैनब, सुभद्रा समेत अन्य मौजूद थे.
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