
Kumar Gaurav
Ranchi : रिम्स में विभिन्न विभाग के 156 पदों के लिए 08 मार्च 2019 को विज्ञापन जारी किया गया था. यह नियुक्तियां रिम्स के 38 विभिन्न विभागों के लिए थीं. परीक्षा हुई. दक्षता परीक्षा भी आयोजित की गयी. रिजल्ट भी जारी किया जा चुका है. इसमें 156 अभ्यर्थियों को नौकरी मिली है.
पर, अब इस नियुक्ति प्रक्रिया की गड़बड़ियां सामने आने लगी हैं. ओटी अटेंडेंट के लिए हुए स्किल टेस्ट में जिसने भाग ही नहीं लिया, उसे चयनित कर लिया गया. वहीं, लैब अटेंडेंट के लिए हुए परीक्षा में जिसे टॉप रैंक मिला था, उसे फाइनल मेरिट लिस्ट में नहीं रखा गया. दक्षता परीक्षा के बाद अंक जारी नहीं किये गये. सीधा अंतिम सूची जारी की गयी थी.
ओटी अटेंडेंट के एससी कैटेगरी के लिए कट ऑफ मार्क्स 25 रखा गया था. पर 23.3 अंक लाने वाले का चयन किया गया है. अभ्यर्थियों ने इसकी शिकायत रिम्स निदेशक से भी की है. रिम्स निदेशक ने उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है.
कई अभ्यर्थी अब इस गड़बड़ी को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी में हैं. बता दें कि पारा मेडिकल सटॉफ की नियुक्तियों के लिए कहीं भी स्किल टेस्ट नहीं लिया जाता है. नियम के अनुसार तीसरे और चतुर्थ वर्ग के लिए इंटरव्यू भी नहीं होना है.
पर रिम्स में स्किल टेस्ट के नाम पर इंटरव्यू लिया गया है. जिसका वीडियो भी सामने आ गया है.
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आरक्षण रोस्टर का भी नहीं किया गया पालन
रिम्स की इस नियुक्ति में कई पदों पर आरक्षण रोस्टर का भी पालन नहीं किया गया है. कार्मिक, प्रशासनिक तथा राजभाषा विभाग द्वारा जारी रोस्टर का पालन नहीं कया गया. यहां बता दें कि लैब टेक्नीशियन के कुल 33 पद थे.
जिसमें आरक्षण रोस्टर के हिसाब से समान्य वर्ग के लिए 14, एससी के लिए 3, एसटी के 8, ओबीसी 1 के लिए 3 और ओबीसी 2 के लिए 2 और ईडब्लयूएस के लिए 3 सीटें होनी चाहिए थीं. पर यहां ओबीसी के दोनों वर्गों के लिए सीटें आरक्षित नहीं थी.
ओबीसी कोटे की सीट को एसटी की सीटों में मिला दिया गया. जो गलत है. नियम के अनुसार सरकारी कर्मियों को पांच साल की उम्र में छूट भी दी जाती है. जो नहीं दी गयी.
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जानिये क्या गड़बड़ी हुई
ओटी अटेंडेंट पद के लिए मुनेश्वर कुमार, रेणु कुमारी और इंद्रजीत महतो पहले, दूसरे और तीसरे रैंक में होने के बावजूद अंतिम चयन नहीं किया गया.
राहुल कुमार का चयन अनारक्षित कोटे में तीसरे स्थान पर किया गया है. इनके पास ना तो ओटी अटेंडेंट की डिग्री है और ना ही अनुभव, फिर भी चयन किया गया.
सत्येंद्र कुमार जो बीसी वन कैटेगरी के अभ्यर्थी थे, लेकिन कोई अनुभव नहीं था. इस कारण इन्हें अनारक्षित कोटे में रखा गया. पर 32.5 अंकों के साथ इनका चयन अनारक्षित कोटे में कर लिया गया.
ओटी अटेंडेंट पद के लिए मंटू सक्सेना का नाम दक्षता परीक्षा से पहले किसी मेरिट लिस्ट में नहीं था. दक्षता परीक्षा में भी शामिल नहीं हुए थे. पर, इन्हें चयनित कर लिया गया.
कहां-कहां हुई गड़बड़ी
मुनेश्वर कुमार ओटी अटेंडेंट पद पर रिम्स के सर्जरी विभाग में 5 सालों से काम कर रहे हैं. दक्षता परीक्षा से पहले बीसी वन कैटेगरी में पहले स्थान पर थे. अनुभव भी ज्यादा था. लेकिन बाहर कर दिया गया.
3 जून 2018 को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री और मुख्य सचिव ने रिम्स निदेशक एवं अन्य अधिकारियों की एक बैठक हुई थी. इसमें निर्णय हुआ कि आउटसोर्स पर कार्यरत पारा मेडिकल कर्मियों को रिम्स की नियुक्ति में प्राथमिकता मिलेगी. परंतु, रिम्स में कार्यरत होने के बावजूद ऐसे लोगों को प्राथमिकता नहीं दी गयी.
लैब टेक्नीशियन पद के लिए स्किल टेस्ट से पहले गुणाधर पंडित (रैंक वन) विशाल कुमार (रैंक 5) और भुवन भास्कर (रैंक 14) को मेरिट से बाहर कर दिया गया. जबकि रैंक 40 वाले अभ्यर्थी का चयन कर लिया गया.
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