
Darbhanga: शुक्रवार को प्राचीन भारतीय इतिहास पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा में ‘जखन तखन’ व्याख्यानमाला का पांचवां व्याख्यान ‘किरिषि करिय मन लाय’ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर कमलानंद झा ने दिया. कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ प्रभाष चंद्र मिश्रा ने की.

व्याख्यान को संबोधित करते हुए प्रो० झा ने कवि कोकिल विद्यापति के पदावली में वर्णित कृषि, कृषक और महिलाओं की स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा कि- “ईश्वर को किसान की तरह होना चाहिए. एक पदावली में कवि कोकिल महादेव को संबोधित करते हुए लिखे हैं, ये भिक्षाटन करने से क्या होगा? अपने डंड और त्रिशूल को हल का रूप दीजिए, बैल को उसका वाहक और जटाओं में स्थित गंगा जल से सिंचाई करिए। अर्थात कवि कोकिल ने सबसे जरूरी कर्म कृषि करने को माना है.15वीं शताब्दी में किसानों की हालत बढ़ई, कुम्हार, नाई, कर्मकार, सफाई कर्मी आदि से ज्यादा ख़राब था. इसके बावजूद पूर्व काल से ही कृषि मानव जीवन का मूल आधार रहा है। उस समय लोग जल्दी सो जाते थे, इसका मूल कारण सवेरे जल्दी उठना नहीं था, बल्कि घर में दीपक जलाने हेतु तेल नहीं होता था। विद्यापति अपने समय के एक प्रसिद्ध समाजशास्त्री थे।” इसके अलावा तत्कालीन समाज में स्त्रियों के विभिन्न स्थितियों के संबंध में विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत किया.

विषय प्रवेश पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ अयोध्या नाथ झा ने, कार्यक्रम संयोजन साहित्यकार विभूति आनंद ने और मंच संचालन डा प्रतिभा किरण ने किया. इस कड़ी का छठा व्याख्यान प्रथम सप्ताह जुलाई 2023 को ‘देशिल बयना सब जन मिट्ठा’ विषय पर आयोजित की जाएगी. उस व्याख्यान के व्याख्याता प्रसिद्ध साहित्यकार प्रोफ़ेसर भीमनाथ झा होंगे.
इस मौक़े पर डा अवनींद्र कुमार झा, डा भक्ति नाथ झा, डा चंद्रभानु सिंह, डा मित्र नाथ झा, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रकाश कुमार, डा शिव शंकर श्रीनिवास, डा अभिलाषा, डा सुरेश पासवान, डा सुरेंद्र भारद्वाज, डा अमृता चौधरी, डा प्रतिभा किरण, डा सुशांत कुमार सहित विश्वविद्यालय के दर्जनों शिक्षाकर्मी, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं मौजूद थे.




