
Ranchi: झारखंड शहरी आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (जुडको) की तरफ से इन दिनों योजनाओ के लिए सेंटेज चार्ज (एजेंसी कमीशन) की वसूली की जा रही है. इससे योजना के स्वीकृत डीपीआर (विस्तृत प्रगति प्रतिवेदन) से लागत में 10 फीसदी का अंतर हो जा रहा है.
यदि कोई योजना 100 करोड़ की है, तो सेंटेज लागू होने के बाद योजना की लागत 108.5 से 110 करोड़ हो जा रही है. इन गतिविधियों पर नगर विकास और आवास मंत्री सीपी सिंह ने भी अंगूली उठायी है. उन्होंने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से कहा है कि वे नगर विकास विभाग की योजनाओं के संचालन पर निगरानी रखें.
उन्होंने कहा है कि जुडको में बाबूओं का जमावड़ा हो गया है. अधिकतर बाबू कांट्रैक्ट पर नियुक्त किये गये हैं. शहर में जुडको की ओर से 26 सौ करोड़ का काम हो रहा है. 10 प्रतिशत सेंटेज काटे जाने से योजनाओं की लागत 2650 करोड़ तक पहुंच गयी है.
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जुडको की तरफ से बनाये जा रहे हैं कई भवन
जुडको की देखरेख में कई भवन बनाये जा रहे हैं. इनमें स्मार्ट सिटी, दो फ्लाईओवर, कनवेंशन सेंटर, रवींद्र भवन, राजधानी की चार सड़कों का थ्री लेन बनाने का काम प्रमुख है. सेंटेज चार्ज, वित्त विभाग के नियमों के अनुसार, निर्माण (कांट्रैक्टर कंपनी) कंपनी को ही भुगतान करना होता है. जुडको कोई निर्माण एजेंसी नहीं है.
कमीशन का अंक गणित
जुडको की ओर से 100 करोड़ की योजना में पहले 10 करोड़ पर सात प्रतिशत सेंटेज चार्ज लिया जा रहा है. फिर अगले 100 करोड़ पर पांच प्रतिशत चार्ज लिया जा रहा है. इससे योजना की लागत 100 करोड़ से बढ़ कर 105 करोड़ हो जाती है.
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इतना ही नहीं पुन: डीपीआर बनाने पर यह चार्ज 1.5 प्रतिशत और बढ़ा दिया जाता है. प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट और पीएमयू का चयन करने पर 1.5 प्रतिशत सेंटेज और लिया जा रहा है.
जुडको में प्रोजेक्ट मैनेजर, प्रोजेक्ट इंचार्ज, टेक्निकल हेड, टाउन प्लानर, इंजीनियर, आर्किटेक्ट सभी अस्थायी रूप से तीन वर्ष के कांट्रैक्ट पर लिये गये हैं. जुडको में 50 से अधिक कर्मी हैं, जो संविदा पर काम कर रहे हैं.
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