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मुंडा बने मिसाल, राय का सरेंडर, चौधरी के तेवर अब भी तल्ख लेकिन पांडेय जी कन्फ्यूजड

Akshay Kumar Jha

Jharkhand Rai

Ranchi: कहते हैं लोकतंत्र में हर चीज राजनीति से जुड़ी रहती है. इसलिए पूरे तंत्र पर यह हावी भी रहती है. राजनीति करने वाले एक सिंगल एजेंडे पर काम करते हैं. और वो एजेंडा होता है कुर्सी. बहुत कम ही ऐसे मिसाल देश भर में देखने को मिलेंगे, जिसमें कुर्सी के लिए नहीं बल्कि समाज के लिए राजनीति होती हो.

खैर… बीजेपी ने 2019 के लोकसभा में झारखंड में चार सीटिंग एमपी का टिकट काटा. इनमें खूंटी से कड़िया मुंडा, कोडरमा से रवींद्र राय, रांची से रामटहल चौधरी और गिरिडीह से रवींद्र पांडेय हैं. चुनाव से पहले झारखंड में पब्लिक के लिए चाय पर चर्चा का सबसे अहम और शानदार मुद्दा भी इन्हीं की टिकट काटे जाने की खबर थी.

इन चारों के टिकट काटे जाने के पीछे पार्टी की अपनी वजह है. रांची से सांसद रामटहल चौधरी और खूंटी से सांसद कड़िया मुंडा का टिकट उम्र को तकाजा मान कर काटा गया.

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वहीं कोडरमा के रवींद्र राय का टिकट बकौल प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ रिपोर्ट कार्ड के आधार पर काटा. लेकिन गिरिडीह से रवींद्र पांडेय का टिकट क्यों काटा गया, यह बात अभी तक खुद रवींद्र पांडेय के पल्ले नहीं पड़ी है.

मुंडा बने मिसाल तो राय जी ने किया सरेंडर

बीजेपी के कुछ शीर्ष नेताओं का भी टिकट उम्र की वजह से काटा गया. उन्होंने भी विरोध में आवाज बुलंद की. लेकिन हुआ कुछ नहीं. पूर्व केंद्रीय मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने पार्टी को जाते-जाते ब्लॉग के जरिये पाठ भी पढ़ाया.

लेकिन कड़िया मुंडा ने जिस तरीके से पार्टी के फैसले का स्वागत किया. वो देश भर में एक मिसाल साबित हो रहा है. उन्होंने साफ कहा कि राजनीति उनका पेशा था ही नहीं, वो किसान थे और किसान हैं. वहीं अपने लोकसभा क्षेत्र में बीजेपी के उम्मीदवार अर्जुन मुंडा के समर्थन में साथ खड़े हैं.

लेकिन इनके अलावा बाकी तीनों सीटिंग एमपी पार्टी से नाराज चल रहे हैं. हालांकि कोडरमा से सांसद रवींद्र राय ने अपना पार्टी को अपना सरेंडर वाला मैसेज भिजवा दिया है. रवींद्र राय ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा है कि “झारखंड धाम के पशुपात्र अस्त्रधारी महादेव की पूजन की, प्रार्थना की.

प्रभु शक्ति देना कि धर्म के मार्ग से विचलित नहीं हो. कोडरमा लोकसभा क्षेत्र का कल्याण करें. पत्रकार मित्र पूछते हैं कि टिकट क्यों कटा. मुझे कारण किसी ने बताया नहीं. इसलिए कहता हूं, सजा का तो पता है, खुदा जाने मेरी खता क्या है.” एक वायरल फोटो में रवींद्र राय बीजेपी से उम्मीदवार अन्नपूर्णा देवी के सामने सर झुकाए खड़े हैं. मानो उन्होंने अपना टोटल सरेंडर कर दिया है.

वायरल हो रही तस्वीर

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फूंफकार रहे हैं रामटहल

रांची के सीटिंग सांसद रामटहल चौधरी का टिकट कटने के बाद से ही उन्होंने बागी तेवर अख्तियार कर लिया है. न्यूज विंग से बात करते हुए उन्होंने साफ कहा कि “आज से नहीं बल्कि जिस दिन से पार्टी ने मुझे किनारा किया है, उसी दिन से मैं बोल रहा हूं कि मैं चुनाव लड़ूंगा. 16 अप्रैल को नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं. मतदाता के दवाब में मुझे चुनाव लड़ना पड़ रहा है.”

पार्टी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने साफ कहा कि उन्हें “अब पार्टी से क्या मतलब है. मुझे जिस तरीके से पार्टी ने डिसचार्ज किया है, उसके बाद पार्टी से मुझे कोई मतलब नहीं है. पार्टी को इस्तीफा देना अब सिर्फ एक औपचारिकता है. मैं निर्दलीय चुनाव लड़ूंगा.”

लेकिन पांडेय जी कन्फ्यूजड

आजसू के खाते में जाने के बाद से ही गिरिडीह लोकसभा के सीटिंग सांसद रवींद्र पांडेय पूरी तरह से कन्फ्यूजड दिखायी दे रहे हैं. पहले तो दिल्ली में जमकर लॉबिंग की. लेकिन दाल ना गलने की सूरत में वापसी के बाद दूसरी पार्टियों में टिकट के लिए जोर-आजमाइश करने लगे.

कुछ अखबारों ने दावा किया कि जेएमएम के कार्यक्रम के दौरान रवींद्र पांडेय वहां दिखायी दिये. कुछ दिनों पहले तो गिरिडीह में लोगों ने यह मान लिया था कि रवींद्र पांडेय को जेएमएम की तरफ से टिकट मिलना तय है.

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लेकिन जगरनाथ महतो का पलड़ा भारी होता देख. उन्होंने तीर-धनुष छोड़ कर सिर्फ तीर को हथियार बनाने की कोशिश की. लेकिन वहां से भी कुछ हाथ नहीं लगा. जदयू ने गठबंधन धर्म पालन करने का निर्णय लिया.

इस बीच बीजेपी के लोकसभा प्रभारी मंगल पांडेय ने उन्हें पार्टी कार्यालय तलब किया. थोड़े मान-मनौवल के बाद न्यूज विंग से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब वो चुनाव नहीं लड़ेंगे.

गिरिडीह में आजसू के उम्मीदवार को स्पोर्ट करेंगे. लेकिन दूसरे मीडिया हाउस से बात के दौरान उन्होंने बयान पलट दिया. फिर कुछ दिनों के बाद फिर से कहा कि चुनाव नहीं लड़ेंगे. दूसरे दिन फिर बयान से पलट गए. मतलब कन्फ्यूजन लेवल इतना हाई है कि हर मीडिया हाउस से तीसरी बात करते हैं.

इस बीच फिर से एक बार राजनीति विरासत कायम रखने के लिए उन्होंने हाथी की सवारी करने की सोची है. लिहाजा बसपा के लोकल नेताओं के संपर्क में हैं. मीडिया में खबर आने के बाद पूछे जाने पर कहते हैं, हमको नहीं पता मीडिया क्या छाप रहा है.

मैं बसपा में नहीं जा रहा. गिरिडीह लोकसभा में मतदान 12 मई को होना है. 23 अप्रैल तक नामांकन भरना है. लेकिन पांडेय जी अब तक कन्फ्यूजड है कि चुनाव लड़े या नहीं.

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