
Ranchi : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ सुनील चंद्र दुबे ने कहा कि आनेवाले समय में झारखंड देश के अग्रणी राज्य के रूप में उभरेगा. इस प्रांत का सामाजिक, आर्थिक, अकादमिक, राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व महिलाशक्ति के हाथों में होगा. बीएयू में आयोजित सरहुल महोत्सव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में प्रारंभ से ही कृषि और संबद्ध गतिविधियों का 80-90% हिस्सा महिलाएं संपादित करती रही हैं. अब राज्य में शिक्षक, डॉक्टर, नर्स, रेस्टोरेंट कर्मी, होटल के रिसेप्शनिस्ट, सब्जी विक्रेता आदि के रूप में ज्यादा महिलाएं ही दिख रही हैं, जो राज्य के उज्जवल भविष्य का संकेत है. हॉकी, तीरंदाजी आदि खेलों में भी झारखंड की लड़कियां देश का प्रतिनिधित्व और नेतृत्व करती रही हैं. बीएयू सहित राज्य के तकनीकी संस्थानों में लड़कियों का प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है. सरहुल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों और शोभा यात्रा में भी भाग लेने वाले विद्यार्थियों में 80- 90% छात्राएं ही रहीं. महिलाओं के शिक्षित, समर्थ और जागृत होने से समाज ज्यादा सुदृढ़ होता है. कुलपति ने कहा कि सरहुल सहित भारत की धार्मिक परंपराएं विज्ञान से जुड़ी हुई हैं, इसलिए पर्व-त्योहारों के वैज्ञानिक पक्ष पर चिंतन होना चाहिए. जैव विविधता के मामले में झारखंड देश के समृद्धतम राज्यों में से है, इसलिए उस विविधता के संरक्षण, संवर्धन के लिए वैज्ञानिक प्रयास होना चाहिए. आरएसी प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ जगरनाथ उरांव, कृषि संकाय के डीन डॉ धीरेन्द्र कुमार शाही, पशुचिकित्सा संकाय के डीन डॉ सुशील प्रसाद, निदेशक छात्र कल्याण डॉ बिनय कुमार अग्रवाल ने भी अपने विचार रखे.
विश्वविद्यालय मुख्यालय से विद्यार्थियों एवं कर्मियों की एक शोभायात्रा निकली जो सरना स्थल तक गया जहां विधिवत पूजन विधान सम्पन्न हुआ. कदमा गांव के पाहन ने पूजन अनुष्ठान संपन्न कराया.
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कृषि, पशुपालन एवं वानिकी संकाय के छात्र-छात्राओं ने गीत, संगीत एवं नृत्य का रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया. कार्यक्रम का संचालन समन्वयक डॉ बसंत चन्द्र उरांव ने किया.
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