
Ranchi : झारखंड सरकार का स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग नियमावली बनाने और संशोधन करने में ही लगा हुआ है. ऐसा नहीं है कि इन नियमावलियों पर काम हाल के दिनों में शुरू हुआ है. शिक्षक बनने की पात्रता तय करने के लिए होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा बीते एक साल से प्रक्रियाधीन ही है. इसी तरह सालों से संघर्ष कर रहे 60 हज़ार से ज्यादा पारा शिक्षकों के लिए भी नियमावली अटकी हुई है. स्थानान्तरण से लेकर प्रोन्नति तक की नियमावली में संशोधन चल ही रहा है. पेश है एक रिपोर्ट…
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पारा शिक्षक सेवा शर्त नियमावली
राज्य में 65 हज़ार पारा शिक्षकों के वेतनमान और निर्धारण करने को लेकर नियमावली बनाने की प्रक्रिया चल ही रही है. यहां बिहार की तर्ज पर पारा शिक्षकों को सुविधाएं दी जायेंगी. 18 अगस्त 2021 को शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों, शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो और पारा शिक्षकों के साथ हुई बैठक में सेवा शर्त नियमावली बनाने पर सहमति बनी. इसके बाद सेवा शर्त नियमावली बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई है.
क्या है वर्तमान स्थिति : शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के साथ हुई वार्ता को 40 दिन से अधिक हो चुके हैं. लेकिन अभी तक सेवा शर्त नियमावली प्रक्रियाधीन ही है. हालांकि 26 सितंबर को शिक्षा मंत्री के 10 दिनों के भीतर सेवा शर्त नियमावली बना लेने की बात कही है.
झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली
राज्य में शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली अब भी प्रक्रिया में है. राज्य में शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए अब तक दो बार (पहली नियमावली वर्ष 2012 में बनी. इसके बाद 2016 में दूसरी नियमावली बनी) नियमावली बनी. दो बार की नियमावली में साल 2013 और 2016 में परीक्षा ली गयी. इसके बाद से नियमावली में संशोधन ही चल रहा है. लगभग एक साल होने को हैं लेकिन नियमावली पूरी नहीं ही सकी है.
क्या है वर्तमान स्थिति : राज्य में तीसरी बार वर्ष 2019 में शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली बनायी गयी थी. नियमावली तैयार होने के बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने परीक्षा लेने संबंधित प्रस्ताव झारखंड एकेडमिक काउंसिल को भेजा था. काउंसिल ने नियमावली के कुछ बिंदुओं पर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से दिशा-निर्देश मांगा था, जिसके बाद विभाग की ओर से इसमें संशोधन की प्रक्रिया शुरू की गयी. यह संशोधन विषय के अंकों में एकरूपता नहीं होने की वजह से किया जा रहा है.
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शिक्षक स्थानांतरण नियमावली
राज्य में वर्ष 2019 में बनी शिक्षक स्थानांतरण नियमावली में फिर से संसोधन की प्रक्रिया चल रही है. इस नियमावली में संसोधन कर 1994 की नियमावली का प्रावधान लागू करने पर विचार बन रहा है. इसके लिए ड्राफ्ट तैयार किया गया है. नियमावली में संसोधन के बाद वैसे शिक्षक जो झारखंड के नहीं हैं, उन्हें भी अपनी इच्छा के अनुरूप जिला चयन का अवसर दिया जा सकता है. इसके तहत राज्य में शिक्षकों को पांच साल की सेवा पूरी होने के बाद पूरे सेवा काल में अंतर जिला स्थानांतरण का अवसर मिलेगा. शिक्षक अपने गृह जिला का भी चयन कर सकते हैं. महिला शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए वर्ष की बाध्यता नहीं होगी.
क्या है वर्तमान स्थिति : नियमावली में संशोधन को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट शिक्षा सचिव को सौंप दी है. स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के सचिव की सहमति के बाद संशोधित नियमावली तैयार की जायेगी.
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प्राथमिक शिक्षकों की सेवा शर्त नियमावली
स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग द्वारा प्राथमिक शिक्षकों की सेवा शर्त नियमावली में बदलाव किया जा रहा है. प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है. इसमें शिक्षकों की प्रोन्नति प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी है. वर्तमान में प्राथमिक शिक्षकों को कुल आठ ग्रेड में प्रोन्नति दी जाती है. उनके लिए शैक्षणिक योग्यता एवं कालावधि आधारित प्रोन्नति का प्रावधान है.
नये प्रस्ताव में 18 वर्ष की सेवा के बाद शिक्षकों को अवर शिक्षा सेवा संवर्ग व शिक्षा सेवा में प्रोन्नति देने का प्रावधान किया गया है. अवर शिक्षा सेवा में 10 फीसदी व शिक्षा सेवा में पांच फीसदी पद आरक्षित किया जायेगा. इसके लिए शिक्षकों को सीमित परीक्षा में शामिल होना होगा. अवर शिक्षा सेवा संवर्ग में प्रोन्नति के बाद शिक्षक प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज में व्याख्याता और डिप्टी डीएसइ बन सकेंगे. वहीं, शिक्षा सेवा में प्रोन्नति पाने पर अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक और जिला शिक्षा पदाधिकारी बन सकेंगे.
क्या है वर्तमान स्थिति : संशोधन प्रक्रिया के अधीन है.
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