
RANCHI: भारत की आधी आबादी सुबह कमाओ और रात को खाओ की तर्ज पर चलती है. झारखंड में आधे से अधिक जनता का यही हाल है. ऐसे में लॉकडाउन से मुसीबत और भी बढ़ गयी है.
लॉकडाउन की शुरुआत के दिनों से ही कई के चूल्हों पर भी ताला लग गया. चूल्हों पर लगे लॉक और पेट की भूख को डाउन करने के लिए कई लोग सामने आये. कोई भूखा ना रहे इस ख्याल के साथ रांची के बिल्डर अनीशउद्दीन हैदर गरीबों के मसीहा के रूप में सामने आये.
कई लोगों से सुनने को मिला कि गरीबों को राशन पहुंचा रहे हैं. इसे सुनकर पहले तो मैंने अनदेखी कर दी. सोचा सब तो कर ही रहे हैं. तो इसमें क्या अलग है.
पर फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों के साथ वहां पहुंचा, जहां राशन की पैकिंग की जा रही थी. जाने से पहले सोचा था कि देखकर निकल जाऊंगा, लिखना नहीं है.
पर जब पहुंचा तो देखता ही रह गया. गांव में राशन मिलने वाले पीडीएस डीलरों के गोदाम से भी कई गुणा ज्यादा चावल-दाल के पैकेट और पैंकिंग में लगे युवाओं को देखकर बस देखता ही रह गया.

इसी बीच किसी ने बताया कि इससे भी बड़ा कैंप रांची के गुरुनानक स्कूल परिसर में लगा हुआ है, जहां 60 से अधिक लोग पैकिंग और राश्न बांटने के काम में लगे हुए हैं. इसके लिए प्रशासन ने पास भी जारी किया है.
निस्वार्थ भाव के साथ अपने दम पर अनीश हैदर की दरियादिली देखने लायक है. लॉकडाउन के तीसरे दिन से लेकर अब तक प्रतिदिन हजार लोगों तक एक सप्ताह का राशन पहुंचा रहे हैं.
एक सप्ताह के बाद वे फिर से उसी इलाके में जाकर राशन पहुंचाने का काम करते हैं. अनीशउद्दीन हैदर ने बताया कि लॉकडाउन जारी रहने तक वे ऐसा करते रहेंगे.
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पहले बनती है जरुरतमंदों की लिस्ट, फिर पहुंचायी जाती है राशन
अनीश हैदर ने बताया कि पहले इलाकों से जरुरतमंदों की लिस्ट मंगायी जाती है. फिर एक दिन और स्थान मुकर्रर कर राशन बांटी जाती है. उन्होंने बताया कि राशन के पैकेट सभी जरुरी इलाकों में भेजे जा रहे हैं.
जहां भी राशन बांटने जाते हैं, वहां के स्थानीय को खड़ा कर राशन बंटवा दिया जाता है. उन्होंने बताया कि मेरे यहां पर जितने भी लोग काम में लगे हैं, उन्हें 14 दिन काम करने के बाद मैं क्वारेंटाइन करवा देता हूं.
फिर उनका कोविड जांच के लिए सैंपल लिया जाता है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही काम पर लगाया जा रहा है. सभी को उसके बदले पैसे भी दिये जा रहे हैं.
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जरुरतमंदों की लिस्ट भेजते ही पहुंच रहा सामान
अनीशउद्दीन हैदर ने बताया कि कई लोग हमारे पास लोगों की राशन की जरुरत को लेकर आते हैं. हम उन्हें जरुरत के हिसाब से राशन दे देते हैं. जिला प्रशासन के तरफ से भी हमें जरुरतमंदों की लिस्ट भेजी जाती है, तो उन इलाकों में भी जाकर हम राशन पहुंचाने का कर रहे हैं.
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