
रांची : राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के चेयरमैन संतोष कुमार यादव, (आईएएस) ने झारखंड सरकार को पत्र लिखकर राज्य में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की सराहना की है और लंबित मुद्दों के शीघ्र समाधान की अपील की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार झारखंड में सड़क ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार निवेश कर रही है, लेकिन कुछ परियोजनाएं भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति (Forest Clearance) और विभागीय समन्वय की दिक्कतों के कारण अटकी हुई हैं। हालांकि, राज्य के अधिकारयों के अनुसार वाराणसी कोलकाता हाईवे पर 60% से अधिक जमीन ले ली गई है अब इस पर काम तेजी से करने पर जोर दिया जा रहा है।
चेयरमैन ने लिखा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। इस संबंध में उन्होंने मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। इससे पूर्व भी राज्य के आला अधिकारियों को सारी बातों से अवगत कराया गया था, वहीं पूर्व सीएस अलका तिवारी से भी इन मामलों का समाधान कराने का अनुरोध किया गया था।
प्रमुख लंबित मुद्दे
1. वाराणसी–कोलकाता 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे
झारखंड से गुजरने वाले इस 245 किलोमीटर लंबे हाईवे के 7 प्रोजेक्ट पैकेजों (5 झारखंड में) पर करीब ₹10,675 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। लेकिन परियोजना शुरू नहीं हो पा रही है क्योंकि अभी तक Stage-I Forest Clearance प्राप्त नहीं हुई है। इस मुद्दे को पहले ही झारखंड के मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया जा चुका है।
2. साहिबगंज और देवघर जिलों की दो परियोजनाएं
कुल 74 किमी लंबाई की इन परियोजनाओं पर लगभग ₹2,100 करोड़ की लागत से नवंबर 2025 तक काम शुरू करने का लक्ष्य है।
हालांकि, ₹250 करोड़ के भूमि मुआवज़े का वितरण अब भी लंबित है।
3. उदयपुर–भोगू और भोगू–शंखा (NH-39)
कुल 151 हेक्टेयर भूमि के लिए Stage-I Forest Clearance लंबित है। यह अनुमति न मिलने का कारण GM(JJ) NOC का अभाव बताया गया है। एनएचएआई ने अनुरोध किया है कि संबंधित अधिकारी को शीघ्र पदस्थापित कर इस प्रक्रिया को पूरा किया जाए।
4. कुरु–उदयपुर सेक्शन (NH-39)
इस हिस्से पर भी कार्य अटका हुआ है क्योंकि पिछले एक वर्षों से मुआवज़े का भुगतान नहीं हो पाया है। इसका कारण नियमित DLAO-cum-CALA, नहीं होना भी कारण बताया।




