
Ranchi. राज्य में खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति पर कागजी कवायद, लेट लतीफी का आलम जारी है. तीन खिलाड़ियों को सब इंसपेक्टर के पोस्ट पर नौकरी दिये जाने का फैसला हो चुका है. रितेश आनंद, भाग्यमति चानू और मधुमिता कुमारी को इसके लिये योग्य पाया गया. पर पिछले पांच महीनों में भी इसका अनुपालन नहीं हो सका है. वैसे 22 जुलाई को इन तीनों के लिये पुलिस मुख्यालय (कार्मिक विभाग) की ओर से एक लेटर जारी किया गया. उन्हें 26 जुलाई को योगदान देने को कहा गया. इसमें से अब तक मात्र एक प्लेयर को ही लेटर मिला है, वह भी 28 जुलाई को. उधर, बाकी 9 खिलाड़ी भी गृह विभाग में योगदान कराये जाने संबंधी चिट्ठी की आस में दिन गिने जा रहे हैं.
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एनओसी की डिमांड पर सवाल
खिलाड़ियों को जारी पत्र में कहा गया है कि अगर वे पहले से कहीं कार्यरत हैं तो वहां से एनओसी हासिल करें. दिलचस्प यह कि एक तो खिलाड़ी को योगदान की तिथि के बाद चिट्ठी मिल रही है. ऊपर से आनन फानन में एनओसी की डिमांड के साथ ज्वाइन करने को कहा गया है. इसे पाने में महीने-दो महीने तक का समय लग जाता है. ऐसे में इतने शॉर्ट टाइम में इसकी डिमांड हास्यापद भी है. योगदान के समय शादी में किसी प्रकार का दहेज लेन-देन नहीं किये जाने से संबंधित घोषणा पत्र की भी मांग रोचक है. रितेश आनंद और भाग्यमति चानू शादीशुदा हैं जबकि मधुमिता अभी अविवाहित. अब उन्हें इसकी भी व्यवस्था करनी है.
जारी है ज्वाइनिंग लेटर की आस
17 मार्च को सीएम हेमंत सोरेन के हाथों 28 खिलाड़ियों को सीधी नियुक्ति दी गयी थी. इसके बाद से 3 खिलाड़ियों का सब-इंसपेक्टर के लिये जबकि बाकी 9 खिलाड़ियों (फरजाना खान, दिनेश कुमार, कृष्णा खलखो, सरिता तिर्की, लवली चौबे, रीना कुमारी, लखन हांसदा, एम विजय कुमार, विप्लव कुमार झा) का सिपाही के लिये सीधी नियुक्ति का इंतजार जारी है. 22 जून को कैबिनेट की बैठक में सीधी नियुक्ति के लिये अनुशंसित खिलाड़ियों के संबंध में निर्धारित अहर्ताओं को शिथिल किये जाने का फैसला लिया गया था. इसके तहत फरजाना, दिनेश सहित अन्य के लिये उम्र सीमा, शैक्षणिक योग्यताओं की अनिवार्यता के मामले में छूट देते हुए नियुक्ति दिये जाने की बात हुई थी. इसी दौरान खेल मंत्री हफीजुल हसन ने दो सप्ताह के अंदर बाकी खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति कराये जाने का दावा किया था. अब तक रिजल्ट शून्य है.
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क्या कहते हैं खिलाड़ी
रितेश आनंद के मुताबिक उन्हें अब तक नियुक्ति संबंधी कोई पत्र नहीं मिला है. चिट्ठी मिलने पर विचार होगा. वे अभी रेलवे में कार्यरत हैं. वैसे सरकार ने जो पहल की है. उसका स्वागत है. पर इसके साथ ही यह भी हो कि खिलाड़ियों का उपयोग केवल नौकरी देने तक ना हो. उम्र बाकी हो तो खेलने का भरपूर अवसर मिले या फिर कोच, एडमिनिस्ट्रेटर वगैरह के तौर पर उपयोग हो. पुलिस सेवा में नौकरी के बाद कहीं उसका भविष्य अधर में ना रहे.
क्या कहती है सरकार
मुख्य सचिव सुखदेव सिंह कहते हैं कि ज्वाइनिंग लेटर जारी होने के बाद अगर योगदान में किसी तरह की समस्या किसी खिलाड़ी को आती है तो वे उनके पास बात रखें. इसी तरह एक विभाग की नौकरी छोड़कर पुलिस विभाग में सेवा देने में कोई आशंका है तब भी उनसे चर्चा खिलाड़ी कर सकते हैं. सरकार उनका साथ देगी.
पुलिस उप महानिरीक्षक (कार्मिक) विजय लक्ष्मी के अनुसार खिलाड़ियों को लेटर जारी किया गया है. अगर उन्हें लेट से लेटर मिल रहा हो तो कोई विशेष इश्यू नहीं है. पत्र मिलने के बाद खिलाड़ी आकर योगदान दें. दिक्कत होने पर पुलिस मुख्यालय से संपर्क करें.
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