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जब नेहरू की चिट्ठी दिखा धनबाद से चुनावी नैया पार कर गये थे पीआर चक्रवर्ती

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Dhanbad: बात 1962 के आम चुनाव की है. तब धनबाद के निवर्तमान सांसद थे डीसी मल्लिक. वे 1959 में प्रभातचंद्र बोस के निधन के बाद हुए उपचुनाव में धनबाद के सांसद चुने गये थे. वे पूरी तरह आश्वस्त थे कि टिकट उन्हें ही मिलेगा. धनबाद के सबसे बड़े ट्रांसपोर्टर परिवार से जुड़े मल्लिक की कांग्रेस में धाक थी. लेकिन तब हर कोई हक्का-बक्का रह गया जब मल्लिक का टिकट कट गया. और धनबाद से चुनाव लडऩे की हरी झंडी मिली पीआर चक्रवर्ती को. वे चुनाव लड़े और जीते भी.

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आगमन के पूर्व एक गुमनाम आदमी थे श्री चक्रवर्ती

चक्रवर्ती को धनबाद की जनता क्या, कांग्रेस कार्यकर्ता भी नहीं पहचानते थे. प्रथम सांसद पीसी बोस के पुत्र व इंटक नेता शंकर बोस के मुताबिक के दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संसदीय विभाग में सचिव थे. चक्रवर्ती कांग्रेस कार्यालय में ही रहते थे. जब वे चुनाव का नामांकन पत्र भरने पहुंचे, तो उनकी जेब में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की एक चिट्ठी भी थी. शंकर बोस के मुताबिक चक्रवर्ती ने नेहरू का जो पत्र दिखाया उसमें लिखा था कि चक्रवर्ती ने कांग्रेस पार्टी की काफी सेवा की है. लिहाजा उन्हें उनका (नेहरू का) प्रतिनिधि मान कर चुनाव में अपना वोट दें और विजयी बनायें. इस पत्र का कार्यकर्ताओं और धनबाद के लोगों पर जबरदस्त असर पड़ा. चुनाव में चक्रवर्ती को 75,170 वोट मिले. उन्होंने एसडब्ल्यूए के सच्चिदानंद त्रिगुनाईत को 24,170 वोट के अंतर से हराया था.

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जिसका टिकट कटा उसके घर में रहकर ही जीते चुनाव

इस चुनाव की एक और खास बात यह रही कि पीआर चक्रवर्ती ने जिस डीसी मल्लिक का टिकट काटा, उसी के घर रहकर उन्होंने चुनाव प्रचार किया. इंटक नेता व अधिवक्ता शंकर बोस बताते हैं कि डीसी मल्लिक का परिवार जोड़ाफाटक रोड के हावड़ा मोटर के पास था. वे दो भाई थे. मल्लिक ब्रदर्स तब धनबाद के रईसों में गिने जाते थे. डीसी मल्लिक ने शादी नहीं की थी. चक्रवर्ती धनबाद आये तो उन्हीं के घर ठहरे. वे लगभग एक महीने यहां रहे और चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया. यह अपने आप में अनूठा था. मल्लिक ने न सिर्फ चक्रवर्ती को पनाह दी, बल्कि उन्हें जिताने में कोई कोर कसर भी नहीं छोड़ा. इसका उन्हें प्रतिदान भी मिला. बाद में पंडित नेहरू ने उन्हें राज्यसभा में भेजा. इसके बाद भी, चक्रवर्ती जब कभी धनबाद आये, वे मल्लिक के आवास में ही ठहरे. हालांकि उन्हें भी दूसरी बार टिकट नहीं मिला. कार्यकाल पूरा होने के बाद चक्रवर्ती भी धनबाद में नहीं दिखे.

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