
Gyan Ranjan
Ranchi: झारखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र 16 दिसंबर से होगा. पांच दिनों के इस सत्र में चालू वित्तीय वर्ष का द्वितीय अनुपूरक बजट के साथ कई विधेयक सरकार सदन में पेश करेगी. जानकारी के अनुसार सदन में पेश होनेवाले अधिकांश विधेयक विभिन्न विभागों में नियुक्ति नियमावली से सम्बंधित हैं. सत्र को लेकर विभागीय स्तर पर तैयारी शुरू है. सत्ता पक्ष और विपक्ष भी सत्र को लेकर अभी से तैयारी शुरू कर दिया है. इस सत्र में सरकार को विपक्ष तो विपक्ष अपनों के भी वार का सामना करना पड़ेगा.
इसे भी पढ़ें : शिक्षकों की लेटलतिफी से आजिज बच्चों ने स्कूल में जड़ा ताला और पहुंच गया थाना
झारखंड सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वर्ष 2021 को नियुक्ति वर्ष घोषित किया था. शुरू के छह से ज्यादा महीने कोरोना में ही बीत गया. इसके बाद सरकार ने नियुक्ति को लेकर जो नियमावली तैयार की है उससे विपक्ष को मुद्दा तो मिल ही गया है, सत्ता पक्ष के विधायक भी असहज महसूस कर रहे हैं. खासकर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में भोजपुरी, मगही, अंगिका, मैथिली भाषा को नहीं रखे जाने से हेमंत सरकार की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी कांग्रेस के कई विधायक नाराज हैं. इसके आलावा स्थानीय होने के लिए झारखंड से मैट्रिक और इंटर की परीक्षा पास करने की बाध्यता ने कांग्रेस विधायकों को खासा परेशां कर रखा है. 10 वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम का मामला भी गरमाया हुआ है. सरकार के लिए यह मामला गले की हड्डी बन सकता है.
कांग्रेस विधायक जता चुके हैं नाराजगी
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में भाषा का विवाद और स्थानीय होने के लिए मैट्रिक और इंटर झारखंड से उत्तीर्ण करने की बाध्यता का विरोध कांग्रेस विधायक पार्टी फोरम के साथ साथ सरकार के समक्ष भी कर चुके हैं. कांग्रेस विधायकों ने पहले विधायक दल की बैठक में अपने नेता आलमगीर आलम के समक्ष इस बात का विरोध दर्ज कराया था. इसके बाद कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने अपने सभी विधायकों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ बैठक करवाई थी. मुख्यमंत्री ने भले ही विधायकों को इस मामले पर विचार करने का आश्वासन दिया था, लेकिन कांग्रेस विधायकों की मुख्यमंत्री के साथ बैठक के कुछ दिनों बाद ही कार्मिक विभाग ने एक सर्कुलर निकाला जिसमें अनुबंध की नौकरियों में भी स्थानीय होने के लिए झारखंड से मैट्रिक और इंटर उत्तीर्ण करने की बाध्यता रखी गयी है.
इसे भी पढ़ें : IPL मैच में एक ओवर में 5 छक्के लगानेवाले ने अचानक की शादी, पंत, धवन सहित कई स्टार प्लेयर पहुंचे
कांग्रेस विधायकों को यह नागवार गुजर रहा है. कांग्रेस विधायकों का कहना है कि एक तरफ मुख्यमंत्री यह आश्वासन देते हैं कि नियुक्ति नियमावली में भाषा और स्थानीय को लेकर सरकार विचार करेगी और दूसरी तरफ कार्मिक विभाग कुछ और ही सर्कुलर निकलता है. यानि जो मांगें हमलोगों ने की है सरकार उसे दरकिनार कर रही है. विधायकों का कहना है कि सत्र से पहले विधायक दल की बैठक में फिर से इस मामले को रखा जाएगा और उसके बाद भी बात नहीं बनी तो सत्र में इस मामले को जोर-शोर से उठाया जाएगा. कांग्रेस के विधायक पिछड़ी जाति को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले पर भी सरकार को फिर से कठघरे में खड़ा करेगा.
झारखंड के युवाओं के साथ छलावा कर रही हेमंत सरकार : भानु
भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही ने कहा कि हेमंत सरकार झारखंड के युवाओं के साथ छलावा कर रही है. नियुक्ति वर्ष में अभी तक एक भी नुयिक्ति नहीं हुई नही लेकिन कैसे यहाँ के लोगों में फुट डाली जाय इसकी व्यवस्था सरकार ने कर दी है. कहा कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में भाषाई विवाद इसका प्रमाण है. सरकार को यह भी पता नहीं है कि झारखंड में कौन कौन सी भाषाएँ बोली जाती है. जिस तरह से सरकार ने कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में भोजपुरी, मगही, अंगिका और मैथिली भाषा को अलग कर दिया है उससे यह साफ़ जाहिर होता है. झारखंड में भोजपुरी, मैथिली, मगही और अंगिका बोलनेवालों की संख्या बहुतायत में है. यदि इन भाषाओं को कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा से बाहर कर देने से लाखों युवाओं के साथ अन्याय होगा. इसी तरह सरकार ने स्थानीय के लिए इंटर और मैट्रिक झारखंड से उत्तीर्ण करने की बाध्यता रखी है.
इसे भी पढ़ें : कमलपुर : ट्रैक्टर की चपेट में आने से बाइक सवार पति-पत्नी घायल
सरकार पहले यह तो बताये कि झारखंड के वैसे खातिहानधारी जो झारखंड से बाहर नौकरी करते हैं उनके बच्चों ने क्या गलती की है जो उन्हें स्थानीय का लाभ नहीं दिया जाएगा. कहा कि आपलोगों ने देख ही लिया कि किस तरह से झारखंड लोकसेवा आयोग की 10 वीं प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में घालमेल हुआ है. जब छात्र इस घालमेल का विरोध करते हैं तो उनपर लाठियां बरसाई जाती है. उन्होंने कहा कि भाजपा इन सभी मुद्दों को लेकर संजीदा है और सरकार को शीतकालीन सत्र में सभी का जवाब देना होगा. एक सवाल के जवाब में भानु प्रताप शाही ने कहा कि कांग्रेस के विधायक केवल युवाओं के नाम पर घरियाली आंसू बहा रहे हैं. यदि सही में कांग्रेस विधायकों को लगता है कि सरकार ने नियुक्ति नियमावली में गलती की है तो उसका हर मोर्चे पर विरोध करे. मुख्यमंत्री के पास बात पहुँचाने की बात कर वाहवाही लेना बंद करे.




